दीवाली का त्योहार रोशनी और उल्लास का प्रतीक है, इसे प्रदूषण का जरिया न बनने दें
अपनी और अपने अपनों की सांसों की सुरक्षा के लिए पटाखों से दूरी बनाएं और सुरक्षित दीवाली मनाएं
डॉ. स्वप्निल पाठक (श्वांस, फेफड़ा एवं एलर्जी रोग विशेषज्ञ, ब्रेथ ईज़ी हॉस्पिटल)
रिपोर्टर पुरुषोत्तम चतुर्वेदी
वाराणसी। दीपों का महापर्व दीवाली खुशियों और रोशनी का त्योहार है, लेकिन पटाखों से निकलने वाला जहरीला धुआं और हानिकारक गैसें सांस और फेफड़ों के मरीजों के लिए गंभीर संकट खड़ी कर सकती हैं। ब्रेथ ईज़ी हॉस्पिटल के श्वांस, फेफड़ा एवं एलर्जी रोग विशेषज्ञ डॉ. स्वप्निल ने आम जनमानस को दीवाली पर सतर्क रहने और अपने श्वसन स्वास्थ्य की सुरक्षा करने की सलाह दी। डॉ. स्वप्निल के अनुसार, पटाखों में सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड के साथ-साथ लेड, बेरियम और कैडमियम जैसी भारी धातुएं होती हैं। इनसे उत्पन्न होने वाले सूक्ष्म कण (PM 2.5 और PM 10) सीधे फेफड़ों की गहराई तक पहुंच जाते हैं, जिससे अस्थमा (दमा) और सीओपीडी (COPD) के मरीजों में अचानक सांस फूलना और अटैक का खतरा बढ़ जाता है। फेफड़ों में सूजन, अत्यधिक खांसी, सीने में जकड़न और एलर्जी की समस्या गंभीर रूप ले सकती है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर इसका सबसे प्रतिकूल असर पड़ता है। डॉ. स्वप्निल ने प्रमुख स्वास्थ्य सलाह व सावधानियां के बारे में बताया जैसे – “यदि बाहर निकलना आवश्यक हो, तो सामान्य कपड़े के मास्क के बजाय N-95 मास्क का उपयोग करें, जो सूक्ष्म प्रदूषक कणों को रोकने में अधिक प्रभावी है। साँस और एलर्जी के मरीज अपनी नियमित दवाइयां और इनहेलर हमेशा पास रखें। डॉक्टर के परामर्श के बिना दवा की खुराक न बदलें। घरों के खिड़की-दरवाजे बंद रखें आतिशबाजी के चरम समय (शाम से देर रात तक) खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें ताकि धुआं घर के अंदर न भरे। हाइड्रेटेड रहें और भाप लें: पर्याप्त मात्रा में गुनगुना पानी पिएं। दिन में एक से दो बार भाप (स्टीम) लें ताकि श्वसन मार्ग साफ रहे। ग्रीन पटाखों को प्राथमिकता या पटाखों से परहेज, पारंपरिक पटाखों के बजाय रोशनी के इस पर्व को दीयों, मोमबत्तियों और मिठाइयों के साथ इको-फ्रेंडली तरीके से मनाएं।
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