बीजपुर (सोनभद्र)। स्थानीय दुधहिया देवी मंदिर प्रांगण में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के आठवें दिन शुक्रवार को प्रभु राम के वनवास का मार्मिक प्रसंग सुनाया गया। कथा व्यास राममोहन दास रामायणी ने जब अपनी ओजस्वी वाणी में राम-सीता और लक्ष्मण के

अयोध्या त्याग का वर्णन किया तो पांडाल में उपस्थित सैकड़ों भक्तों की आँखें नम हो गईं।कथा के क्रम को आगे बढ़ाते हुए रामायणी जी ने कहा कि राम का वनवास केवल एक राजा के पुत्र का निष्कासन नहीं बल्कि अधर्म के विनाश की भूमिका थी। उन्होंने बताया कि कैसे पिता के वचनों को निभाने के लिए श्रीराम ने सहर्ष राजसी सुखों का त्याग कर दिया। उन्होंने कहा जहाँ राम हैं वहीं अयोध्या है।इस दौरान राम वन गमन के भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूम उठे।कथा के बाद भक्तों ने एक स्वर में हनुमान चालीसा का पाठ किया जिससे पूरा बीजपुर क्षेत्र भक्तिमय हो गया।आयोजन के विशेष अनुष्ठान के तहत नौ देवियों की विधिवत पूजा-अर्चना की गई।श्रद्धालुओं ने माता के नौ रूपों के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि कथा के अंतिम चरण में पहुंचने के कारण श्रद्धालुओं की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है।आरती के उपरांत उपस्थित जनसमूह के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। इस अवसर पर क्षेत्र के गणमान्य नागरिक और भारी संख्या में मातृशक्ति उपस्थित रही।
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