श्रमिकों को समर्पित रही रामजियावन दास बावला की जयंती

चकिया । भोजपुरी भाषा साहित्य के महान रचनाकार व जनकवि रामजियावन दास बावला की जयंती मौजूदा व्यवस्था में श्रमिकों की बदहाल दशा को समर्पित रही।आल इंडिया यूनाइटेड विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के तत्वावधान में बावलाजी की जयंती उनके सांस्कृतिक विरासत के उत्तराधिकारी सिकंदरपुर निवासी कवि राजेश विश्वकर्मा के मड़ई पर मौजूदा व्यवस्था में श्रमिकों की दशा पर आयोजित वेबिनार (संगोष्ठी) के साथ संपन्न हुई। राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार विश्वकर्मा ने वेबिनार के माध्यम से संबोधित करते हुए कहा बावलाजी गंवई के निवासी बनवासी खेती-किसानी कामगार और श्रमिकों के सच्चे प्रतिनिधि एवं रामभक्त थे। उनकी रचनाओ में भ्रष्टाचारी व्यवस्था किसान और श्रमिकों की बदतर दशा पर जीवंत व करारा प्रहार है। बावलाजी का प्रतिभा संपन्न व्यक्तित्व एवं कृतित्व सामाजिक एवं प्रशासनिक भेदभाव और उपेक्षा का शिकार होकर गुमनामी के कगार पर है. संगोष्ठी में वक्ताओं ने कोरोना काल में अपने घरों की ओर लौटने वाले प्रवासी श्रमिकों और कमजोर वर्ग के लोगों के साथ प्रशासनिक अन्याय, भेदभाव और पुलिस के बर्बर व अमानवीय अत्याचार एवं भुखमरी, बीमारी तथा दुर्घटना के चलते हुई हजारों मौत पर गहरा दुख और संवेदना व्यक्त करते हुए सरकार की संवेदनहीनता को उत्तरदायी ठहराया. संगोष्ठी में नेताओं ने आरोप लगाते हुए कहा कि मौजूदा सरकार में निरंकुश पुलिस जुल्म के बल पर श्रमिक और कमजोर वर्ग के लोगों की आवाज को दबा रही है, जिससे मेहनतकश कामगारों, श्रमिकों और कमजोर वर्ग के लोगों में गहरा आक्रोश है, जो आने वाले समय में स्पष्ट तौर पर दृष्टिगोचर होगा। संगोष्ठी में नेताओं ने दुख व्यक्त करते हुए कहा जिला और स्थानीय नगर पालिका प्रशासन से बावलाजी द्वारा स्थापित चंद्रप्रभा साहित्यिक संस्था के लिए पुस्तकालय एवं उनके गौरवशाली स्मृति में उनकी आदमकद प्रतिमा स्मृति द्वार तथा चकिया से उनके गांव को जोड़ने वाली सड़क का निर्माण कार्य कराने के अनेकों अनुरोध को नजरअंदाज कर दिया गया। संगोष्ठी में पुनः इस मांग को दोहराते हुए पूरा कराने हेतु प्रशासन का ध्यान आकृष्ट किया गया। कार्यक्रम के आरंभ में राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बावलाजी के चित्र पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलित किया तथा बावलाजी की रचनाओं का प्रतिनिधित्व करने वाले कवि राजेश कुमार विश्वकर्मा ने उनके गीतों को प्रस्तुत किया। वेबिनार संगोष्ठी कार्यक्रम से जुड़ने वाले लोगों में श्रीकांत विश्वकर्मा डॉक्टर प्रमोद कुमार विश्वकर्मा नंदलाल विश्वकर्मा सुरेश विश्वकर्मा एडवोकेट श्याम बिहारी विश्वकर्मा दीनदयाल विश्वकर्मा रमेश विश्वकर्मा भैरव विश्वकर्मा लोचन विश्वकर्मा श्यामलाल फौजी राम अवतार विश्वकर्मा सुरेश शर्मा विजय विश्वकर्मा पत्रकार श्रीमती अनीता विश्वकर्मा विजय बहादुर विश्वकर्मा राहुल विश्वकर्मा कालिका विश्वकर्मा अवधेश विश्वकर्मा प्रेम विश्वकर्मा दिनेश विश्वकर्मा बृजमोहन दास विश्वकर्मा पारसनाथ विश्वकर्मा सहित बड़ी संख्या में लोग थे।

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