प्रदोष व्रत-पूजा बहुत ही सरल है क्योंकि भोलेनाथ एकमात्र देव हैं जो पवित्र मन से की गई पूजा से ही प्रसन्न हो जाते हैं

जीवन मन्त्र।शिवकृपा प्राप्त करने के लिए हर महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी पर प्रदोष व्रत किया जाता है।

* भोलेनाथ जब प्रसन्न होते हैं तो समस्त दोष समाप्त कर परम प्रसन्नता, परम सुख प्रदान करते हैं!

* प्रदोष व्रत-पूजा बहुत ही सरल है क्योंकि भोलेनाथ एकमात्र देव हैं जो पवित्र मन से की गई पूजा से ही प्रसन्न हो जाते हैं.

* शिवोपासना में दूर्लभ मंत्र और कीमती पूजा सामग्री की जरूरत नहीं है, सच्चे मन से… नम: शिवाय का जाप करें और शिवलिंग पर सर्वसुलभ पवित्र जल चढ़ाएं.

* सुख का अहसास कराता है- शांत मन और दुख का कारण है- अशांत मन, शिवोपासना से तुरंत मानसिक शांति प्राप्त होती है.

* प्रदोष व्रत में दिनभर निराहार रहकर सायंकाल पवित्र स्नान करने के बाद श्वेत वस्त्रों में शांत मन से भगवान शिव का पूजन किया जाता है.

* जैसाकि नाम से ही स्पष्ट है, प्रदोष व्रत को करने से हर प्रकार के दोष मिट जाते हंै.

* इस व्रत के प्रमुख देवता शिव हैं इसलिए उनके साथ-साथ शिव परिवार की आराधना विषेष फलदायी मानी जाती है.

* विभिन्न दिनों के प्रदोष व्रत का अलग-अलग महत्व और प्रभाव होता हैै….

* बुधवार के दिन यह व्रत करने सर्वकामना सिद्धि होती है.

* बृहस्पतिवार के प्रदोष व्रत से शत्रुओं का नाश होता है.

* शुक्रवार प्रदोष व्रत से सौभाग्य की वृद्धि होती है.

* शनिवार प्रदोष व्रत से संतान सुख की प्राप्ति होती है.

* रविवार के दिन प्रदोष व्रत हमैशा स्वस्थ रखता है.

* सोमवार के दिन प्रदोष व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं

* मंगलवार को प्रदोष व्रत रखने से ऋण-रोग से मुक्ति मिलती है.

* संपूर्ण वर्ष प्रदोष व्रत संपूर्ण सुख प्रदान करता है….

-आज का राशिफल-

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम 27:29 तक:

मेष, कर्क, सिंह,

वृश्चिक, मकर, मीन

*मिथुन राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र

उसके पश्चात –

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

मेष, वृषभ, सिंह,
कन्या, धनु, कुम्भ

*कर्क राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र

* यहां राशिफल चन्द्र के गोचर पर आधारित है, व्यक्तिगत जन्म के ग्रह और अन्य ग्रहों के गोचर के कारणशुभाशुभ परिणामों में कमी-वृद्धि संभव है, इसलिए अच्छे समय का सद्उपयोग करें और खराब समय मेंसतर्क रहें.

– बुधवार का चौघडिय़ा

दिन का चौघडिय़ा रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- लाभ पहला- उद्वेग

दूसरा- अमृत दूसरा- शुभ

तीसरा- काल तीसरा- अमृत

चौथा- शुभ चौथा- चर

पांचवां- रोग पांचवां- रोग

छठा- उद्वेग छठा- काल

सातवां- चर सातवां- लाभ

आठवां- लाभ आठवां- उद्वेग

* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसारइनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है औरजीवन का अंत है!

पंचांग

बुधवार, 11 सितंबर 2019

प्रदोष व्रत

ओणम

शक सम्वत 1941 विकारी

विक्रम सम्वत 2076

काली सम्वत 5121

दिन काल 12:27:51

मास भाद्रपद

तिथि त्रयोदशी – 29:08:28 तक

नक्षत्र श्रवण – 13:59:43 तक

करण कौलव – 15:55:24 तक, तैतिल – 29:08:28 तक

पक्ष शुक्ल

योग अतिगंड – 18:35:03 तक

सूर्योदय 06:03:48

सूर्यास्त 18:31:38

चन्द्र राशि मकर – 27:28:29 तक

चन्द्रोदय 17:10:00

चन्द्रास्त 28:12:59

ऋतु शरद

दिशा शूल: उत्तर में

राहु काल वास: दक्षिण-पश्चिम में

नक्षत्र शूल: कोई नहीं

चन्द्र वास: दक्षिण में 27:29 तक, पश्चिम में 27:29 से

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