खाद्य पदार्थों में मिलावट का अपराध हत्या जैसे अपराध से भी जघन्य है : शिवप्रकाश सिंह

रिपोर्टर पुरुषोत्तम चतुर्वेदी वाराणसी।

वाराणसी। पर्यावरण एवं उपभोक्ता संरक्षण समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवप्रकाश सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को जागरुक अधिवक्ता समिति के पदाधिकारियों तथा प्रबुद्ध नागरिकों एवं आम उपभोक्ताओं की एक अति आवश्यक बैठक आयोजित की गयीं। बैठक में पूरे देश विशेषकर उत्तर प्रदेश में विगत वर्षों से खाद्य पदार्थ में खतरनाक रसायनों तथा अन्य अखाद्य पदार्थों की मिलावट की बढ़ती प्रवृत्ति तथा बेतहाशा वृद्धि पर गम्भीर चिन्ता व्यक्त की गयी। विशेष रुप से मिलावट पर उच्चतम न्यायालय द्वारा की गयी गम्भीर टिप्पणियों, संसद में उठाये जाने तथा कैंसर, हृदय, किडनी तथा फेफड़ों की बढ़ती जानलेवा बीमारियों के बावजूद मिलावट पर अंकुश न लग पाने पर घोर आश्चर्य व्यक्त किया गया। इस जानलेवा तथा गम्भीर समस्या पर सरकार, विपक्षी, स्वयंसेवी आन्दोलन करने वाले संस्थाओं, बुद्धिजीवियों तथा बात-बात पर आन्दोलनजीवियों की उदासीनता तथा भूमिका को भी कटघरे में खड़ा किया गया। समिति के अध्यक्ष शिवप्रकाश सिंह एडवोकेट ने कहा कि खाद्य-पदार्थों में मिलावट का अपराध हत्या जैसे गम्भीर अपराध से भी जघन्य तथा खतरनाक है, क्योंकि हत्या में केवल एक व्यक्ति की जान जाती है किन्तु मिलावट से होने वाले कैंसर जैसे जानलेवा रोग के कारण सम्पूर्ण परिवार का आर्थिक तथा सामाजिक जीवन नष्ट हो जाता है। इन कृत्यों को पूरे समाज एवं मानव जाति की हत्या का षणयंत्र माना जाना चाहिये। साथ ही साथ उन्होने खाद्य तथा आपूर्ति विभाग के भूमिका संलिप्तता तथा भ्रष्टाचार पर भी गम्भीर सवाल खड़े किये, क्योंकि सम्बन्धित विभाग केवल त्यौहारों पर सैम्पलिंग करके तथा अपने हिस्से की वसूली करके खानापूर्ति कर लेते हैं। हद तो तब हो जाती है जब सैंपल लिये गये खाद्य पदार्थ भी रिपोर्ट आते-आते बाजार में खप जाते हैं। इस कार्य प्रणाली से सरकार की पूरी स्वास्थ्य पालिसी तथा उस पर खर्च किया गया बजट भी विफल तथा निष्प्रभावी हो जाता है तथा युवा पीढ़ी की कार्यक्षमता तथा देश का भविष्य प्रभावित होता है। समिति के उपाध्यक्ष अरुण कुमार सिंह ने बताया कि अत्यन्त ही प्रतिष्ठित तथा सफल बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के खाद्य पदार्थ के मानक विदेशों तथा भारत में अलग-अलग होते हैं। समिति के अध्यक्ष शिवप्रकाश सिंह ने उपभोक्ताओं का आवाह्वान किया कि उपभोक्ता की कोई जाति तथा धर्म नहीं होती क्योंकि सभी उपभोक्ता समान रुप से प्रभावित तथा पीड़ित होते हैं। यदि आम उपभोक्ता जागरुक तथा एकताबद्ध हो जाय तो वह देश का सबसे बड़ा दबाव समूह बन सकता है तथा इससे सामाजिक तथा राष्ट्रीय एकता भी मजबूत होगी तथा बड़े दबाव समूह के अस्तित्व में आने के बाद मिलावट खोरी जैसी जानलेवा समस्या का अवश्य निदान निकलेगा। सभा का संचालन समिति के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अरुण कुमार सिंह एडवोकेट ने किया तथा सभा में प्रमुख शिक्षाविद डॉ रामसुधार सिंह, कृष्णानिधि पाण्डेय एड, मनीष कुमार एड, शिवशंकर राय एड, राजेश द्विवेदी एड, विनय प्रकाश चतुवेर्दी एड, नितेश पाठक एड, त्रिभुवन नारायण प्रजापति एड, प्रवेश पाण्डेय, पंकज सिंह एड, अतुल पाण्डेय एड आदि थे।

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