अस्थमा में ओरल स्टेरॉयड का सेवन हो सकता है घातक- डा पाठक

अस्थमा में ओरल स्टेरॉयड का सेवन हो सकता है घातक .. उचित खान पान बचा सकता है अस्थमा अटैक….

रिपोर्टर पुरूषोतम चर्तुवेदी वाराणसी।

ब्रेथ ईजी चेस्ट सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, अस्सी वाराणसी द्वारा विश्व अस्थमा दिवस 5 मई 2026 के उपलक्ष में 4 मई 2026 को गुरुद्वारा प्रांगण, सुभाष नगर, मुगलसराय में एक निशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया जिसमे १६४ लोगों की स्वास्थ्य जाँच ब्रेथ ईजी के वरिष्ठ श्वास टी.बी, एलर्जी एवं फेफड़ा रोग विशेषज्ञ डॉ एस.के पाठक के नेतृत्व में किया गया I इस शिविर में अस्थमा सम्बंधित बचाव/ सुझाव/ व नि:शुल्क परामर्श का आयोजन किया गया I

डॉ. पाठक ने बताया – “इस बार ग्लोबल इनिशिएटिव फॉर अस्थमा ने इस खास दिन की थीम को नाम दिया है – “Asthma Education Empowers” अर्थात “अस्थमा सम्बंधित शिक्षा सशक्त बनाती है” I GINA अस्थमा से पीड़ित लोगों को उनकी बीमारी का प्रबंधन करने के लिए उचित शिक्षा के साथ सशक्त बनाने और चिकित्सा सहायता कब लेनी है, इसकी पहचान करने की आवश्यकता पर जोर देती है। स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों को अस्थमा से निरंतर टालने योग्य रुग्णता और मृत्यु दर और अस्थमा के प्रभावी प्रबंधन पर प्रकाशित साक्ष्य के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए कहा जाता है, ताकि वे अपने रोगियों के लिए विश्वसनीय जानकारी और इष्टतम उपचार प्रदान करने में सक्षम हों।“

डॉ. पाठक ने बताया – “विश्व अस्थमा दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य, विश्व भर के लोगों को अस्थमा बीमारी के बारे में जागरूक कराना है । अस्थमा के लक्षण व्यक्ति विशेष के अनुसार बदल सकते हैं। वैसे सामान्य रूप से अस्थमा के निम्न लक्षण दिखाई देते हैं: छाती में जकडऩ, रात में और सुबह कफ की शिकायत होना, श्वास नली में हवा का प्रवाह निर्बाध रूप से न होना, सांस लेने में कठिनाई या सांस उखडऩा, सांस लेते हुए घरघर की आवाज करना, खांसी, प्रारंभ में ये लक्षण मौसम में बदलाव या अत्यूधिक गर्मी या अत्यधिक सर्दी में दिखाई देते हैं लेकिन अगर इनका ठीक प्रकार से उपचार न कराया जाये तो यह अधिक गंभीर हो जाते हैं और पूरे वर्ष दिखाई देते हैं।“

ब्रेथ ईजी के श्वास, टी.बी, एलर्जी एवं क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डॉ स्वप्निल पाठक ने बताया कि – “अस्थमा में मुख्यत: श्वांस नलियों में सूजन हो जाता हैं, जिसके कारण बाद में उन नालियों में सिकुडन भी हो जाता हैं, जो साधारण दवाइयों से नही ठीक हो पता हैं I इसके लिए एक विशेष प्रकार की थेरेपी का इस्तमाल किया जाता हैं, जिसे इन्हेलेशन थेरेपी कहतें हैं I अस्थमा की बीमारी फेफड़ो से सम्बंधित हैं, इसलिए इसमें इन्हेलेशन थेरेपी का ही उपयोग होना चाहिए जोकि सीधे फेफड़ो में जाकर अपना काम करती हैं, जिससे अस्थमा के मरीज को 2-3 मिनट में ही आराम मिल जाता हैं I”

डॉ पाठक ने आगे बताया – “दमा के मरीज को डाइट और लाइफस्टाइल का बहुत ख्याल रखना पड़ता है, जरा सी लापरवाही से मरीज की जान मुश्किल में आ जाती है I आजकल बहुत कम उम्र में बच्चे भी अस्थमा से प्रभावित हो रहे हैं I बढ़ता प्रदूषण और कमजोर इम्यूनिटी इसकी वजह बन रहे हैं, हालांकि अपने स्वास्थ्य के हिसाब से भोजन लिया जाए तो इसे काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है I” डॉ पाठक आगे बताते हैं कि – “जिन लोगों को अस्थमा की समस्या है, उन्हें अपनी डाइट में ब्रोकली, जामुन, केला, पत्तेदार साग, खरबूजे, और एवोकाडो को जरूर शामिल करना चाहिए। ये फेफड़ों की कार्यक्षमता में सुधार कर सकते हैं। अस्थमा के मरीजों के लिए मैग्नीशियम काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। यह फेफड़ों को स्वस्थ रखने में काफी मददगार है। डॉ पाठक ने ये भी बताया कि अस्थमा मरीजों को चावल, फ्राई चीजें, ठंडी चीजों और दही नहीं खाना चाहिए I

डॉ पाठक ने अंत में बताया ये पूरा सप्ताह अस्थमा वीक डे रहेगा जिसमे 6 मई को घाटों पर ब्रेथ ईजी टीम फेफड़ो की जाँच निशुल्क करेगी, तथा 7,8 एवं 9 मई को ब्रेथ ईजी द्वारा मोबाइल कैंप का आयोजन भी किया जायेगा जिसमे ब्रेथ ईजी वैन वाराणसी के प्रमुख चौराहों पर जा कर लोगो की फेफड़ों की जाँच करेगी I

ब्रेथ ईजी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में डॉ स्वप्निल पाठक, डॉ साक्षी पाठक, डॉ शिवांगी पाण्डेय एवं डॉ दिवाकर ने मरीजों का जांचा और सलाह प्रदान की ।

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