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जीवन मंत्र । जानिये पंडित वीर विक्रम नारायण पांडेय जी से वासुकी कालसर्प योग परिचय एवं अरिष्ट शांति के उपाय

जीवन मंत्र । जानिये पंडित वीर विक्रम नारायण पांडेय जी से वासुकी कालसर्प योग परिचय एवं अरिष्ट शांति के उपाय

वासुकी कालसर्प योग परिचय एवं अरिष्ट शांति के उपाय

यह कालसर्प दोष बहुत उत्तम माना जाता है और अगर अन्य ग्रह बल देते है तो जातक उम्र और धन के मामलों में उत्तम होता है,तुला और मकर लगन वालों के लिये यह राहु बेकार का होता है। अन्य के लिये यह कालसर्प एक पहरेदार की तरह से जातक की रक्षा करने का मालिक होता है,जातक जो कह देता है वह पूरा होता है,जातक को आंख बन्द करने के बाद विचार करने की आदत होती है और वह जो दृश्य आंख बन्द करने के बाद देखता वे दृश्य कालान्तर में सत्य होते देखे गये हैं। ऐसा व्यक्ति सवा सात सौ दिन पहले किसी भी बात का अनुमान लगा कर अगर बात को कह दे तो वह पूर्णत: सत्य मानी जाती है, इस प्रकार के जातक अक्सर प्लानिंग और मीडिया के अन्दर जाकर अपनी कलम और जुबान को हथियार की तरह से प्रयोग करते है,और जो काम बहुत बली नही कर पाता है अक्सर इस प्रकार के जातक कर लेते हैं। इस प्रकार के कालसर्प दोष वाले व्यक्ति के पुत्र और पिता की स्थिति अच्छी होती है,जातक अपने समाज में राजनीति में और धर्म तथा जातिगत मामलों में लोगों पर छाजाने वाला होता है,लालकिताब के अनुसार यहां का राहु मंगल के पक्के घर में होता है और मंगल की कन्ट्रोलिंग पावर की बजह से कोई गलत हरकत नही करता है,अगर किसी प्रकार से मंगल भी इस राहु का साथ दे रहा हो तो जातक एक बडे शासक के रूप में अपनी स्थिति को जाहिर करता है। राहु पर अगर किसी प्रकार से शुक्र का प्रभाव पडता है तो भी जातक को चमकदमक और फ़िल्मी स्टाइल पसंद नही होगी,वह अपने उद्देश्य के लिये तो इस प्रकार की आदतों में जा सकता है लेकिन हमेशा के लिये नही जा सकता है,ऐसा जातक पति या पत्नी और धन सम्पत्ति के मामलों में उत्तम किस्म का इन्सान ही माना जाता है। राहु अगर किसी प्रकार से धनु या मीन राशि का हो तो उसके मंदे असर के कारण उसके भाई बन्धु ही उसकी सम्पत्ति को खराब करते है,उसकी पारिवारिक जिन्दगी में उसकी खुद की बहिने दखल देतीं है और अक्सर इस प्रकार से जातक के जीवन में तलाक जैसे केश बनते देखे गये हैं।इस प्रकार के प्रभावों के लिये भी चांदी की डिब्बी में चावल अपने निवास में रखने से इस प्रकार के कालसर्प दोष में सुधार मिलता है,अक्सर इस प्रकार के कालसर्प दोष के दुष्प्रभाव जातक के भाई दिखाते है,वे शराब कबाब और अन्य मामलों में दोषी होते है और जातक के लिये एक अभिशाप बनकर जीवन को गर्त में डालने वाले होते हैं। अगर नवें केतु के बाद के भावों में अन्य ग्रह तथा बारहवें घर में मंगल के अलावा और अन्य ग्रह हों तो जातक के जीवन में उसके साधन पुत्र भतीजे और मान्जे उसके जीवन में नयी नयी समस्यायें लेकर परेशान करेंगे और बुध वाले कारक जैसे बहिन बुआ बेटी भी किसी न किसी प्रकार के चारित्रिक या भौतिक मामलों में जातक को परेशान करने वाले होंगे। इस कालसर्प योग की एक और पहिचान है कि जातक का पति या पत्नी ज्योतिष से बहुत लगाव रखता होगा। इस राहु का सबसे बडा दुष्प्रभाव बहिन बुआ या बेटी पर होता है,यानी बुध और सूर्य अगर किसी प्रकार से राहु का साथ दे रहे हों और कुन्डली में मंगल खराब हो तो बहिन बुआ या बेटी जातक की उम्र के बाइसवें या तेईसवें साल में अथवा चौतींसवी और पैंतीसवीं साल में विधवा हो सकती हैं।इस प्रकार के योग में जातक को पुराने वाहन खरीदने और उनको प्रयोग करने तथा पुराने वाहनों का सामान अपने पास रखने,गणेश पूजा से विमुख होने से भी जातक को भारी हानि हो सकती है। जातक जब भी सफ़ेद कपडे प्रयोग करेगा जातक के कपडों पर कोई न कोई दाग लग ही जायेगा। जातक को अपनी दाहिनी भुजा पर सौंफ़ और मिश्री लाल कपडे में बांध कर रखने से इस प्रकार के कालसर्प योग में फ़ायदा होता है। जातक की माता को कभी भूल कर नीले कपडे नही पहिनने चाहिये,जातक को नीलम नही धारण करना चाहिये,जात को जब भी घर से बाहर जाता है उसे रविवार को पान सोमवार को दर्पण मंगल को गुड, बुध को धनिया गुरु को राई शुक्र को दही और शनि को अदरक का प्रयोग करके जाना चाहिये,यह उपाय सभी प्रकार के कालसर्प दोषों के लिये मान्य है।

उपाय

महामृत्युंजय मंत्रों का जाप प्रतिदिन ११ माला रोज करें,

जब तक राहु केतु की दशा-अंर्तदशा रहे और हर शनिवार को श्री शनिदेव का तैलाभिषेक करें और मंगलवार को हनुमान जी को चौला चढ़ायें।

प्रत्येक बुधवार को काले वस्त्रों में उड़द या मूंग एक मुट्ठी डालकर, राहु का मंत्रा जप कर भिक्षाटन करने वाले को दे दें। यदि दान लेने वाला कोई नहीं मिले तो बहते पानी में उस अन्न हो प्रवाहित करें। ७२ बुधवार तक करने से अवश्य लाभ मिलता है।

किसी शुभ मुहूर्त में नाग पाश यंत्र को अभिमंत्रित कर धारण करें।

नव नाग स्तोत्रा का एक वर्ष तक प्रतिदिन पाठ करें।

नाग/नागिन जोड़े की पूजा कर राहु केतु के वैदिक मंत्र निर्दिष्ट संख्या अनुसार जाप करे तत्पश्चात दशांश हवन करवाएं।

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