काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद मामले में सीनियर डिवीज़न फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट का बड़ा फ़ैसला. अदालत ने पूरे परिसर का पुरातात्विक सर्वेक्षण कराने को कहा. मंदिर पक्ष ने दिसंबर 2019 में पुरातात्विक सर्वे के लिए अपील की थी.*

पुरषोत्तम चतुर्वेदी की रिपोर्ट

वाराणसी। स्वयंम्भू लॉर्ड विश्वेश्वर ज्‍योति‍र्लिंग वर्सेज अंजुमन इंतेज़ामिया कमेटी मस्जिद और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के बीच चल रहे पुरातत्विक सर्वे के मामले में सिविल जज सीनियर डिवीज़न फास्ट ट्रैक कोर्ट वाराणसी आशुतोष तिवारी ने आज फैसला सुनाते हुए पुरातत्विक सर्वे का आदेश दे दिया है। इस आदेश में उन्होंने केंद्र सरकार को अपने खर्चे पर यह सर्वेक्षण कराने का आदेश दिया है, साथ ही इस सर्वे में पुरातात्विक सर्वे ऑफ़ इंडिया के 5 विख्यात पुरात्तत्ववेत्ताओं को शामिल करने का आदेश दिया है जिसमे दो अल्‍पसंख्‍यक समुदाय से होंगे।

इस फैसले पर स्वयंभू लार्ड विश्वेश्वर ज्‍योति‍र्लिंग के वाद मित्र तथा सीनि‍यर एडवोकेट विजय शंकर रस्तोगी ने ख़ुशी ज़ाहिर की है। वहीँ सुन्‍नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड के वकील मोहम्मद तौहीद खान ने फैसले की कॉपी को स्टडी करने के बाद अगला निर्णय लेने की बात कही है।

इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रया देते हुए वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी ने बताया कि सिविल जज सीनियर डिवीज़न फास्ट ट्रैक कोर्ट वाराणसी आशुतोष तिवारी के न्यायालय में वादी पक्ष की तरफ से 2019 से प्रार्थना पत्र दिया गया था कि ज्ञानवापी परिसर में स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान् विश्वेश्वर का पुराना मंदिर स्थित था और उसमे 100 फुट का ज्योतिर्लिंग मौजूद था, जोकि‍ एक भव्य मंदिर स्वरुप में ज्ञानवापी परिसर में था।

इसको धार्मिक विद्वेष के कारण बादशाह औरंगजेब ने 1669 के फरमान के द्वारा इसे तोड़वा दिया था और उसके एक हिस्से पर स्थानीय मुसलमानों द्वारा एक ढांचा बना दिया गया था, जिसे वो मस्जिद कहते हैं और नमाज़ पढ़ते हैं, लेकिन विवाद यह था कि 15 अगस्त 1947 को इसकी धार्मिक स्थिति क्या थी। इसको तय करने के लिए यह साक्ष्य आवश्यक है कि यह विवादित ढांचा बनने के पहले पुरातन कोई विश्वेश्वर मंदिर का अवशेष वहां उपलब्ध है कि नहीं। उसक नीचे तहखाना उपलब्ध है कि नहीं। उसके अगल-बगल मंदिर का अवशेष है कि नहीं।

विजय शंकर रस्तोगी ने बताया कि मंदिर की दीवारों को नंगी आँखों से देखा जा सकता है कि नहीं। इसका पुरातत्व विभाग सर्वेक्षण करे और जो 100 फुट ऊँचा ज्योतिर्लिंग है उसको संरक्षित करने के लिए माननीय न्यायालय ने बहुत लंबा निर्देश दिया है। वाद मित्र ने बताया कि कोर्ट ने आदेशित किया है कि पुरातत्व विभाग, सेंट्रल गवर्नमेंट इसका सर्वेक्षण अपने खर्चे पर करके अपनी आख्या दे। इस सर्वेक्षण में प्रख्यात पुरातत्वविदों को इस कार्य में सम्मिलित करे, जिसमें दो पुरातत्ववेत्ता माईनार्टी के भी होने चाहिए।

वहीँ इस आदेश पर सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता मोहम्मद तौहीद खान ने बताया कि हमने बहस की और कोर्ट को बताया कि इस स्टेज पर सर्वे का आदेश नहीं देना चाहिए, पर आज कोर्ट ने स्वयंभू लार्ड विश्वेश्वर के वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी की आर्क्योलॉजिकल सर्वे की अपील को मान लिया है। हमारे पास अभी आदेश की कॉपी नहीं आयी है। उसे स्टडी करने के बाद जो कानूनी प्रोसेस हैं उसके अनुरूप कार्य करेंगे।

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