एनसीएल की बीना परियोजना पर विस्थापितों का धरना हुआ समाप्त

पुर्व में जारी दो सूची के २६६ विस्थापित व तीसरी सुची के विस्थापितों के समायोजन पर बनी सहमति।

सोनभद्र।:- एनसीएल की बीना परियोजना में अधिभार के खनन व अभिवहन के कार्य में कार्यरत बीजीआर-डेको संघ में विस्थापितों को रोजगार दिये जाने को लेकर पिछले 13 दिनों से विस्थापितों के चल रहे धरने व 7 दिनों से चल रहे उपवास के बाद आज उप जिलाधिकारी दुद्धी और पुलिस क्षेत्राधिकारी पिपरी की अध्यक्षता में बिना गेस्ट हाउस में घंटों विस्थापित प्रतिनिधियों और एनसीएल प्रबंधन की त्रिपक्षीय वार्ता चलती रही ।। वार्ता में कई बार माहौल गर्म हो गया व वार्ता में गतिरोध बना रहा ।।विस्थापितों की ओर से पंकज मिश्रा और अंकुश दुबे ने कोल इंडिया की पुनर्वास नीति और एनआईटी का हवाला देते हुए परियोजना प्रभावित परिवारों के सदस्यों के लिए रोजगार की बात रखी।पंकज मिश्रा ने वार्ता में बताया कि 266 प्रभावित परिवार के सदस्यों को परियोजना प्रभावित व्यक्ति के रूप में चिन्हित कर रोजगार उपलब्ध कराए जाने के बाबत एक माह पूर्व ही बीना परियोजना द्वारा सूची बीजीआर-डेको को प्रेषित कर दी गई थी परंतु अभी तक एनआईटी के अनुसार आउटसोर्सिंग कंपनी बीजीआर डेको द्वारा रोजगार नहीं उपलब्ध कराया जा रहा जिसके लिए विस्थापित आंदोलन को मजबूर हैं वहीं दूसरी ओर

अंकुश दुबे और दयासागर दुबे पिछले 7 दिनों से उपवास पर हैं पर एनसीएल और बीजीआर कंपनी विस्थापितों के रोजगार के मामले में हीला हवाली कर रही है। तीन घंटे चली लंबी वार्ता के बाद बैठक में यह तय हुआ कि 266 चयनित प्रभावित व्यक्तियों को 31 जनवरी रोजगार उपलब्ध करा दिया जाएगा तथा लंबित व छूटे हुए व्यक्तियों के आवेदन को सूचीबद्ध कर 30 जनवरी तक आउटसोर्सिंग कंपनी बीजीआर डेको संघ को सौंप दिया जायेगा तथा उन्हें रोजगार उपलब्ध करा दिया जाएगा तथा इसकी समीक्षा बैठक ३१ जनवरी के बाद होगी उपरोक्त मांगो पर दोनों पक्षों में बनी सहमति के बाबत एक कार्यवृत्त स्टाफ अधिकारी कार्मिक एनसीएल बीना द्वारा जारी किया गया। इस त्रिपक्षीय वार्ता में उप जिलाधिकारी दुद्धी, क्षेत्राधिकारी पिपरी, एनसीएल बीना महाप्रबंधक एलपी गोडसे मुख्य महाप्रबंधक (राजस्व पुनर्वास ) के अलावा विस्थापितों की ओर से पंकज मिश्रा, अंकुश दुबे, दयासागर दुबे, गोविंद मिश्रा, अरविंद दुबे सहित दर्जनों लोग वार्ता में मौजूद थे।वार्ता के बाद विस्थापितों के पक्ष में लिए गए निर्णय के बाद विस्थापितों में खुशी व उल्लास का माहौल है और विस्थापितों ने इसे अपनी एक बड़ी जीत के रूप में बताया है।।

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