सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियमों के उल्लंघन पर एनजीटी सख्त

अल्ट्राटेक सीमेंट डाला यूनिट को नोटिस


चंद्रकांत मिश्रा


सोनभद्र। जनहित में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता आशीष चौबे द्वारा बतौर अधिवक्ता प्रस्तुत याचिका पर माननीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने अल्ट्राटेक सीमेंट, डाला सीमेंट यूनिट के विरुद्ध सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियमों के गंभीर उल्लंघन को लेकर संज्ञान लेते हुए नोटिस जारी किया है और संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया है। सोनभद्र जनपद के डाला क्षेत्र में स्थित अल्ट्राटेक सीमेंट (डाला सीमेंट यूनिट) द्वारा औद्योगिक ठोस अपशिष्ट का अवैज्ञानिक, अवैधानिक एवं नियमों के विपरीत निस्तारण लंबे समय से किया जा रहा है। इसके कारण पूरे क्षेत्र में तीव्र दुर्गंध फैल रही है, जिससे स्थानीय नागरिकों का दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।उक्त जानकारी सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता आशीष चौबे ने दी।

हालात ऐसे हैं कि लोगों को सांस लेने में कठिनाई, आंखों में जलन, सिरदर्द जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिससे जन-स्वास्थ्य पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इन गंभीर परिस्थितियों को देखते हुए, जनहित में यह मामला सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता आशीष चौबे द्वारा माननीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण के समक्ष प्रस्तुत किया गया। यह प्रकरण “सूर्य प्रकाश मिश्रा बनाम अल्ट्राटेक सीमेंट, डाला सीमेंट यूनिट” के नाम से पंजीकृत किया गया है। माननीय एनजीटी ने प्रथम दृष्टया पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन को गंभीरता से लेते हुए निम्नलिखित प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है—
जिलाधिकारी, सोनभद्र
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
इस पर सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता आशीष चौबे ने कहा कि “यह लड़ाई केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे जनपद के नागरिकों के स्वास्थ्य, पर्यावरण और भविष्य की रक्षा की लड़ाई है। मैं जनहित के इस संघर्ष में सोनभद्र के नागरिकों के साथ मजबूती से खड़ा हूं और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पर्यावरणीय कानूनों का उल्लंघन करने वालों को जवाबदेह ठहराया जाए।”वहीं याचिकाकर्ता सूर्य प्रकाश मिश्रा ने कहा कि डाला क्षेत्र के लोग वर्षों से प्रदूषण की मार झेल रहे हैं। जहरीली दुर्गंध, दूषित हवा और अवैध कचरा निस्तारण ने आम जन-जीवन को नरक बना दिया है। यह केवल पर्यावरण का नहीं, बल्कि हमारे बच्चों, बुजुर्गों और आने वाली पीढ़ियों के जीवन का प्रश्न है।” उन्होंने आगे कहा—“पर्यावरण संरक्षण और जनहित की इस लड़ाई में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता आशीष चौबे द्वारा निशुल्क विधिक सेवा प्रदान किया जाना हम सभी के लिए संबल है। हम आशा करते हैं कि माननीय न्यायाधिकरण के हस्तक्षेप से दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी और क्षेत्र के लोगों को प्रदूषण से मुक्ति मिलेगी।”सूर्य प्रकाश मिश्रा ने यह भी स्पष्ट किया कि

“इस कानूनी लड़ाई का उद्देश्य किसी उद्योग का विरोध नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि औद्योगिक विकास पर्यावरणीय नियमों और जन-स्वास्थ्य की कीमत पर न हो। जब तक क्षेत्रवासियों को स्वच्छ वातावरण और न्याय नहीं मिलेगा, यह संघर्ष जारी रहेगा।”
कोर्ट का निर्णय सर्वमान्य होगा।

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