सामाजिक कार्य दिवंगत पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का सशक्त माध्यम -एडीजे

विंध्यवासिनी देवी स्मृति प्रवेश द्वार का उदघाटन,सम्मानित हुए सीनियर सिटीजन

सासाराम।नेशनल सीनियर सिटीजन एसोसिएशन के दिवंगत वरिष्ठ सदस्या एवं समाजसेविका स्व.विंध्यवासिनी देवी की याद में जिले के चेनारी प्रखंड अंतर्गत पांडेयडीही ग्राम में नव निर्मित स्मृति हॉल का उदघाटन ताराचंडीधाम के पीठाधेश्वर महर्षी अंजनेशजी महाराज, एडीजे आशुतोष कुमार, राधवेन्द्र प्रताप सिंह, सीएफटीयूआई के महासचिव ब्रदर निरज चौबे,उपाध्यक्ष माया पांडेय के द्वारा संयुक्त रूप से कर इसे समाज के लिए समर्पित किया गया।इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में न्यायिक एवं प्रशासनिक पदाधिकारी तथा कई श्रमिक,राजनैतिक व सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगो ने संघ एवं समाज के लिए उनके योगदान को याद किया। वही प्रवेश द्वार का उद्घाटन सासाराम सांसद छेदी पासवान ने किया।उन्होंने कहा की बुजुर्ग समाज के धरोहर होते है इनके मार्गदर्शन से ही समाज उन्नति करता है। इस समाजिक कार्य का सभी को अनुकरण करना चाहिये। सुग्रीव प्रसाद सिंह की अध्यक्षता व सत्यनारायण स्वामी के संचालन में वरिष्ट नागरिक सह श्रवणपुत्र सम्मान समारोह आयोजित कर उपस्थित सभी वरिष्ठ नागरिकों एवं अपने माता-पिता,बुजुर्गों की सेवा करने वाले ओपी श्रीवास्तव,वरिष्ठ पत्रकार ब्रजेश पाठक,जितेंद्र सिह,कमलेश महतो,हिमांशू त्रिपाठी को श्रवणपुत्र सम्मान से अलंकृत किया गया।महर्षि अंजनेशजी ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए आशीर्वचन प्रदान किया। मुख्य अतिथि एडीजे आशुतोष कुमार ने कहा कि स्व.विंध्यवासिनी देवी एक धार्मिक एवं परोपकारी महिला थी जो गरीबो का हमेसा ख्याल रखती थी,परिवारिक जीवन में नैतिकता,सेवा व सामाजिक सरोकार का जो मिसाल उन्होंने कायम किया था उनके उस विरासत को उनके पुत्र एवं परिजन भली-भांति सम्हाल रहे है,परिजनों द्वारा उनके परोपकारी कार्यो को जारी रखना ही उनके लिए सच्ची यादगारी एवं श्रधांजलि है। उन्होंने कहा कि सामाजिक कार्य अपने दिवंगत पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व सम्मान व्यक्त करने का सशक्त माध्यम है,स्व.विंध्यवासिनी देवी की याद में निर्मित प्रवेश द्वार एवं स्मृति हाल सदैव ही उनकी कृति की याद दिलाती रहेगी और वै हमेशा अमर रहेंगी। राष्ट्रीय महासचिव रामायण पांडेय “एलौंन” ने कहा कि वे मेरी पत्नी के साथ मेरी मित्र भी थी जिन्होंने परिवारिक दायित्व अपने ऊपर ले मुझे समाज व संगठन के कार्यो के लिए स्वतंत्र रखी।इस संगठन को राष्ट्रीय स्तर तक पहुचाने में उनका महत्वपूर्ण सहयोग रहा है।वही निरज चौबे ने कहा कि वर्तमान परिवेश में एक ओर जहा समाज में जीवित रहते हुए बूढ़े-बुजुर्गो को अपने मान-सम्मान के लिए तरसना पड़ रहा है,बृद्धाआश्रम में जीवन व्यतीत करना पड़ रहा है,सरकार को सीनियर सिटीजन एक्ट जैसा कानून बनाना पड़ा,वही खासकर ग्रामीण क्षेत्र में मरणोपरांत भी अपने बुजुर्गो का सामाजिक कार्यो के माध्यम से सम्मान जारी रखने के लिए निःसन्देह स्व.विंध्यवासिनी के परिजन धन्यवाद के पात्र है। इससे युवापीढ़ी को सिख लेते हुए अपने बुजुर्गो का हमेशा सम्मान करना चाहिए। मौके पर सर्वश्री आरपी एलौन, आशुतोश कुमार, जगरोपन सिह, चन्द्रिका यादव, अशोक कुमार, गिरिधर पाठक, उमाप्रसाद गुप्ता,एन.के.सिह, सोनेलाल, रामबली सिह, माया पांडेय, ए.एन चतुर्वेदी, ओपी शर्मा, मनोज कुमार, सरस्वती मिश्रा, गगन कुमार सेन, रामजी दुबे, अवधविहारी राय, मदनमोहन श्रीवास्तव, अशोक कुमार, सुरेंद्र दुबे, धीरेंद्र दुबे, वीरेंद्र कुमार सिंह, डॉ वीरेंद्र प्रसाद, मनोज कुमार, डॉ सुरेंद्र नाथ मिश्र, कामेश्वर मिश्र, द्वारिका चौबे, सरजू ओझा, किशोर कुमार झा, शत्रुघ्न पांडेय, लल्लन दुबे, रंजीत कुमार श्रीवास्तव, देवी बसंती त्रिपाठी, कुसुम देवी, मीना पांडेय, गुप्तेश्वर नाथ दुबे, सरदार अरविंद सिंह, रामायण तिवारी संजय कुमार तिवारी, सरस्वती मिश्रा, धर्मेंद्र प्रसाद, उमा प्रसाद गुप्तासहित उनके परिवार के डा.नारायण पांडेय, गोविंद पांडेय,धीरज,निरज,बिरज,सूरज,भास्कर,कृष्णा,सत्यम, सत्यप्रकाश,तान्या,कृति,साक्षी उपस्थित थे।

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