कम उम्र से ही खिलाड़ियों को फिक्सिंग के खतरे से सचेत करना होगा

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छह साल तक लगातार इनकार करने के बाद आखिरकार पाकिस्तान के पूर्व लेग स्पिनर दानिश कनेरिया ने काउंटी क्रिकेट में हुई फिक्सिंग में शामिल होने की बात स्वीकार की। इस कारण उन पर 2012 में आजीवन प्रतिबंध लगा था। कनेरिया ने एसेक्स टीम के साथी खिलाड़ी मर्वेन वेस्टफील्ड को 2009 में हुए मैच में एक ओवर में 12 रन देने के लिए राजी किया था। वेस्टफील्ड ने 10 रन ही दिए थे।

कनेरिया ने पहले वेस्टफील्ड पर करियर खराब करने का आरोप लगाया था

बाद में जांच के दौरान उन्होंने कहा कि कनेरिया के कहने पर उन्होंने खराब प्रदर्शन के लिए सट्‌टेबाज से पांच हजार पाउंड (लगभग 4 लाख, 80 हजार रुपए) की रकम ली थी। वेस्टफील्ड को चार महीने की जेल हुई थी और उन पर पांच साल का प्रतिबंध लगा था। वहीं, कनेरिया को क्रिकेट के लिए गंभीर खतरा बताते हुए आजीवन प्रतिबंध लगाया गया था। तब कनेरिया ने वेस्टफील्ड पर आरोप लगाया था कि उन्होंने उनका करियर बर्बाद कर दिया। कनेरिया ने दो बार प्रतिबंध के खिलाफ अपील भी की, लेकिन दोनों ही बार उन्हें विफलता मिली। कनेरिया ने पिछले सप्ताह अल जजीरा चैनल को दिए इंटरव्यू में फिक्सिंग की बात स्वीकार की।इसमें उन्होंने वेस्टफील्ड, एसेक्स, पाकिस्तानी फैंस, साथी खिलाड़ियों और प्रशासकों से माफी मांगी है।

कनेरिया के टिप्स से सट्टेबाजों से बच सकते हैं खिलाड़ी

कनेरिया नेखुद पर लगाए आजीवन प्रतिबंध को हटाए जाने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि वे युवा खिलाड़ियों को सट्‌टेबाजों और फिक्सर्स से बचने के टिप्स दे सकते हैं।कनेरिया ने कहा कि तब उनके पिता कैंसर से जूझ रहे थे, इसलिए उन्होंने फिक्सिंग की बात स्वीकार नहीं की। उनके मुताबिक वे अपने पिता को सदमा नहीं देना चाहते थे, क्योंकि उनके पिता कनेरिया के पाकिस्तानी क्रिकेटर होने पर गर्व करते थे।हालांकि, आलोचकों का कहना है कि कनेरिया के पिता का निधन 2013 में ही हो गया था। इसके बावजूद पिछले सप्ताह तक वे खुद को निर्दोष बताते रहे थे, इसलिए उनका प्रतिबंध नहीं हटना चाहिए।

गलती मान लेने वाले खिलाड़ियों की मदद से पकड़ में आ सकेंगे सट्टेबाज

यह एक पेचीदा मामला है, लेकिन मेरा मानना है कि खेल में भ्रष्टाचार के कैंसर के खिलाफ अगर कहीं से मदद मिले तो उसे प्रोत्साहित करना चाहिए, न कि हतोत्साहित करना। मेरा मानना है कि प्रतिबंध हटे या न हटे, कनेरिया को अपनी मदद के साथ आगे आना चाहिए और बोर्ड को उनकी मदद स्वीकार करनी चाहिए। इससे न सिर्फ फिक्सर्स के काम करने का तरीका पता चलेगा, बल्कि उसके खिलाफ उपाय भी मिलेंगे। ऐसे पूर्व खिलाड़ी जो अपनी गलती स्वीकार कर चुके हैं, युवा खिलाड़ियों पर ज्यादा प्रभाव छोड़ेंगे। वे उन्हें करियर और जिंदगी को मैनेज करने और भविष्य में मिलने वाले प्रलोभन से बचने का रास्ता बता सकते हैं।कनेरिया के मामले से स्पष्ट है कि खेल में अब भी भ्रष्टाचार है और यह कई स्तर पर है।

टी-20 लीग में मिलने वाले अत्यधिक धन सेफिक्सिंग का खतरा बढ़ा

हाल के वर्षों में टी-20 लीग की बाढ़ आने से इसका खतरा और भी ज्यादा हो गया है। कनेरिया की स्वीकारोक्ति का मुख्य हिस्सा यह है कि इसमें वेस्टफील्ड शामिल हुए, जो उस समय महज 21 साल के थे।कनेरिया ने कहा कि वेस्टफील्ड अपनी लाइफ स्टाइल बदलने के लिए धनवान बनना चाहते थे। बड़ी संख्या में युवा खिलाड़ियों का माइंडसेट ऐसा हो सकता है। टी-20 लीग में मिलने वाली रकम में बड़े अंतर से खतरा और भी ज्यादा हो जाता है। जैसा कि पहले साबित हो चुका है कि खेल में भ्रष्टाचार रोकने का कोई फुलप्रूफ तरीका नहीं है। यह सही है कि जांच अच्छे तरीके से होनी चाहिए और सजा भी कड़ी मिलनी चाहिए। साथ ही कम उम्र से ही इस बारे में खिलाड़ियों की मेंटरिंग और काउंसलिंग की जानी चाहिए।

जयसूर्या का व्यवहार हैरानी भरा

उधर, सनत जयसूर्या का भ्रष्टाचार के मामले में आईसीसी की जांच में सहयोग न देना हैरान करने वाला है। श्रीलंकाई क्रिकेटर पर कोई आरोप नहीं है, लेकिन आईसीसी का कहना है कि वे मदद नहीं कर रहे हैं। जयसूर्या ने इसके बाद कहा है कि वे अपनी ओर से हरसंभव सहायता करेंगे। उम्मीद है कि वे ऐसा ही करेंगे।

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दानिश को स्पॉट-फिक्सिंग मामले में 2010 में वेस्टफील्ड के साथ गिरफ्तार किया गया था। – फाइल


आईसीसी ने सनत जयसूर्या पर संस्था के भ्रष्टाचार रोधी नियम के उल्लंघन के आरोप लगाए हैं। – फाइल

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