हाईकोर्ट जज देते हैं पौधे लगाने की सजा; हर महीने थाने में बताना पड़ता है पौधा कितना बढ़ा

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भोपाल (शमी कुरैशी).मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच के जस्टिस आनंद पाठक का न्याय देने का तरीका अनोखा है। उनके द्वारा दी जाने वाली सजा में प्रकृति भी समृद्ध होती है। यहां लगने वाली याचिकाएं, राजीनामे और जमानत आवेदन पर निकलने वाले आदेश में सख्त लहजे में विनम्र कार्य के निर्देश होते हैं। किसी याचिकाकर्ता को पौधा लगाने और उसके रख-रखाव का आदेश मिलता है, तो किसी को अनाथालय या वृद्धाश्रम में सेवाकार्य दिया जाता है। आदेश में कोर्ट का विचार स्पष्ट लिखा होता है-‘यह प्रश्न एक पौधा लगाने का नहीं, बल्कि एक विचार को पालने का है।’ जस्टिस पाठक की बेंच ने डेढ़ साल में 100 से ज्यादा लोगों को ऐसी सजा दी है, जिसमें करीब 500 पौधे अब तक रोपे जा चुके हैं।

  1. इस कोर्ट के आदशों में किसी को गार्डन गोद लेने को कहा गया और कोई शहर में डस्टबिन भी लगवा रहा है। कोर्ट इस बात का ध्यान रखता है कि जो व्यक्ति जिस लायक होता है, उसे उसके हिसाब से ही काम दिया जाता है। स्वेच्छा से गार्डन गोद लेने वालों की सुविधा के लिए कोर्ट ने नगर निगम ग्वालियर को पत्र भी लिखा है।

  2. कई मामलों में जुर्माने के तौर पर याचिकाकर्ता को अनाथाश्रम भेजा जाता है। यहां वे सेवाकार्य करते हैं या फिर जुर्माने की राशि के बराबर रुपए से फल-दूध बांटते हैं। अब तक ऐसे करीब 15 ऑर्डर निकाले जा चुके हैं। कई याचिकाकर्ता इन स्थानों पर जाने के बाद आदेश में लिखी सीमा से अधिक कार्य करते हैं और इस पुण्य कार्य से दिल से जुड़ जाते हैं। इस सेवा का एक मकसद यह भी है कि शेल्टर होम में होने वाली कई गड़बड़ियां उजागर होंगी या बंद होंगी।

  3. कोर्ट के आदेशों में कई लोगों को गृह मंत्रालय के मोबाइल एप ‘भारत के वीर’ के जरिए शहीदों के परिवार को आर्थिक सहायता देने के निर्देश भी दिए गए हैं। 29 जनवरी 2019 के एक आदेश में कोर्ट ने दो व्यापारियों के बीच विवाद के राजीनामे के बाद उन्हें 50-50 हजार रुपए मोबाइल एप के जरिए जमा करने का निर्देश दिया। इस तरह अब तक करीब 2 लाख रुपए की आर्थिक सहायता भी की जा चुकी है। यह सहायता वीर एप के अलावा अार्मी सेंट्रल वेलफेयर फंड, नगालैंड वेलफेयर रिलीफ फंड और केरल बाढ़ राहत कोष में भी जमा कराई जा चुकी है।

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      High court judges sentence to planting

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