सुखदेव, राजगुरू, भगत सिंह को बलिदान दिवस पर किया गया याद

शहीद दिवस के उपलक्ष्य में किया गया विभिन्न आयोजन

सोनभद्र। शहीद दिवस के उपलक्ष्य में सोमवार को सुखदेव, राजगुरू, भगतसिंह को याद किया गया। तिरंगा झंडा रोहण के साथ राष्ट्र गान पश्चात शहीदों की प्रतिमा पर माल्यार्पण, दीपदान व वाग्देवी के चित्र पर वरिष्ठ कथाकार, अतिथि समाजसेवी कमलेश खांबे,

ओमप्रकाश त्रिपाठी पूर्व शिक्षक व सोनभद्र बार अध्यक्ष अशोक कुमार श्रीवास्तव एड, महामंत्री योगेश कुमार द्विवेदी, चंद्र प्रकाश द्विवेदी नरेन्द्र कुमार पाठक एडवोकेट, विनोद चौबे एडवोकेट, सुरेन्द्र पांडेय एडवोकेट, ओमप्रकाश पाठक एडवोकेट, दिलीप चौबे, धर्मराज जैन, अजीत शुक्ल , गुप्तकाशी सेवा ट्रस्ट के रवि

प्रकाश चौबे ने दीप प्रज्ज्वलित कर आयोजन का आगाज किया। वरिष्ठ कवि शिवदास चंदौली ने वंदना, सुनाकर तान वीणा की हृदय में अर्चना भर दे तथा लहर रहा है गगनांगन में गौरव का अभिमान तिरंगा मांग रहा बलिदान सुनाकर माहौल में देशभक्ति का जज्बा जगाया। भदोही से पधारे ओज कवि संदीप कुमार बालाजी की

नाट्य कृति अमरो बीरा का भव्य विमोचन किया गया जो शहीद ए-आजम भगत सिंह को समर्पित रहा। ओमप्रकाश त्रिपाठी ने जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी का विश्लेषण किया तो वहीं रामनाथ शिवेन्द्र वरिष्ठ कथा कार ने वीर शहीदों के व्यक्तित्व का विशद विवेचन व योगदान की चर्चा किये तथा युद्ध नहीं बुद्ध की जरूरत अनिवार्य बताया। कमलेश खांबे ने भगत सिंह को शहीद ए आजम क्यों कहा जाता है इसके संदर्भ में व्याख्यान दिया कि सबसे कम उम्र के और सबसे बड़ा बलिदान जिसने पूरे देश को एक सूत्र में पिरोकर आजादी की आग जन जन तक पहुंचाया।प्रथम सत्र का संचालन अशोक तिवारी एडवोकेट ने किया।सभी कवियों अतिथियों को अंगवस्त्र, लेखनी, पुस्तिका देकर अभिनंदन किया गया तदुपरांत कवि सम्मेलन दूसरे सत्र में आयोजित हुआ। ओज श्रृंगार की कवयित्री कौशल्या कुमारी चौहान ने मुझको अबला मत समझो मैं झांसी वाली रानी हूँ सुनाकर वातावरण में राष्ट्रीय भाव भर दिया। संचालन कर रहे गीतकार दिलीप सिंह दीपक ने तुम सब कुछ बेच दो लेकिन हिंदुस्तान मत बेचो व सारिका श्रीवास्तव कवयित्री जौनपुर ने अपने काव्यपाठ से आयोजन में चार चांद लगाते हुये माहौल में गतिज उर्जा दीं व सराही गई। सुधाकर पांडेय ने जनाजा जब मेरा निकले वतन के वास्ते निकले सुनाकर वातावरण सृजित किया। श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए वरिष्ठ गीतकार ईश्वर विरागी ने, ऐ हिंद हम तुझको कभी झुकने न देंगे सुनाकर जय हिंद वंदेमातरम का नाद कराते रहे।ओजस्वी कवि प्रभात सिंह चंदेल व संदीप बालाजी ने वीर रस की रचनाओं से शहीदों को नमन किया।आयोजक प्रदुम्न त्रिपाठी ने काश लहू का इक इक कतरा भारत माँ के काम आये सुनाकर गतिज उर्जा दिया। धर्मेश चौहान एडवोकेट ने बड़ा ही सुंदर बड़ा ही मनोहर अपना हिंदुस्तान, सुनील चौचक ने बासी भात पर बेना जिनि हौंका, अहरौरा से पधारे धर्म देव चंचल ने हास्य व्यंग्य सुनाकर देर तक हंसाते रहे। जौनपुर से पधारी कवयित्री डा सीमा सिंह मेडिकल आफीसर ने श्रृंगार सम- सामयिक व दार्शनिक कविता से लोगों को सोचने पर विबस किया व अनेक प्रस्तुति देकर आयोजन को ऊंचाई दी। सुशील मिश्रा ने लोकगीत के माध्यम से माटी से जुड़ी रचना देशवा हमार शहीदन के सपनवां सुनाकर सबकी आंख नम कर दिया। गोपाल कुशवाहा, राधेश्याम पाल, जयराम सोनी, विकास वर्मा, विवेक चतुर्वेदी, विशेष अस्थाना, विजय विनीत, जुल्फेकार हैदर खान, अशोक त्रिपाठी, सुनील तिवारी, सिद्धि नाथ पांडेय, दिव्या राय, अमरनाथ अजेय, अनमोल मणि, ऋषभ त्रिपाठी, नीतिन सिंह ने भी काव्यपाठ किया। इस अवसर पर जयशंकर तिवारी, सत्यनारायण, बृज किशोर देव, राम यश त्रिपाठी, ठाकुर कुशवाहा, राधा प्रसाद चौहान, हर्ष चौहान ,अनीशा संदीप कुमार शुक्ल एड, आशीष पाठक एडवोकेट, चौहान आद्या, अंशिका, प्रधान संगीता तिवारी, नीरज तिवारी, फारुख अली हाश्मी, रामधारी सिंह, गुलाम हुसैन, सोमारू आदि जमे रहे। आभार संयोजन कर रहे वरिष्ठ शायर अशोक तिवारी एडवोकेट ने व्यक्त किया।

Translate »