गुरु पूर्णिमा के अवसर पर तीन दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन

श्री सर्वेश्वरी समूह ने जारी किया वर्ष भर के जनसेवा कार्यों का विस्तृत विवरण

रिपोर्टर पुरुषोत्तम चतुर्वेदी

वाराणसी। अघोर पीठ, श्री सर्वेश्वरी समूह संस्थान देवस्थानम्, अवधूत भगवान राम कुष्ठ सेवा आश्रम, पड़ाव, वाराणसी में आयोजित गुरुपूर्णिमा महोत्सव की पूर्व संध्या पर हुए पत्रकार सम्मेलन के अवसर पर श्री सर्वेश्वरी समूह के अध्यक्ष पूज्यपाद बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम जी ने श्री सर्वेश्वरी समूह कि वार्षिक-पत्रिका ‘अघोरेश्वर-स्मारिका वर्ष 2026’ का पत्रकारों के समक्ष लोकार्पण किया। तत्पश्चात पत्रकारों द्वारा पूछे गये सम-सामयिक सामाजिक-आध्यात्मिक सवालों का जवाब देते हुए पूज्य बाबाजी ने कहा- आज कल के युवक-युवतियाँ आधुनिकता की चकाचौंध में अपने बड़े-बुजुर्गों और संत-महापुरुषों के दिखाए मार्गों की उपेक्षा और अनादर कर रहे हैं, उन पर चलने का प्रयत्न नहीं कर रहे हैं, जिसके चलते ही अनेकानेक समस्यायें उनके जीवन को बुरी तरह से परेशान कर रही हैं। हमारे अगुआ लोग सही रास्ता दिखायें, क्योंकि उनका बड़ा व्यापक प्रभाव समाज पर पड़ता है। तत्कालीन समाज के राजनेताओं, उद्योगपतियों आदि का ही लोग अनुसरण करते हैं। राष्ट्र और समाज के उत्थान की बातें और कृत्य लोग नहीं कर रहे, यह बड़ा ही दुर्भाग्यपूर्ण है। लोगों के आचरण-व्यवहार बहुत निम्न कोटि के हो गये हैं जिसके चलते ही प्रकृति भी कुपित है। कहीं अति वर्षा, कहीं सूखा और कहीं भूकंप आदि की समस्याएं विकराल रूप लेती जा रही हैं। एक प्रश्न के जवाब में आपने कहा कि अघोर और औघड़ सहज हैं, पर सुगम नहीं। श्री सर्वेश्वरी समूह का वार्षिक प्रतिवेदन – 2025-26
पत्रकार सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री सर्वेश्वरी समूह के मंत्री डॉ. एस. पी. सिंह जी ने बताया कि –
श्री सर्वेश्वरी समूह के अध्यक्ष पूज्यपाद बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम जी के निर्देशन में प्रधान कार्यालय तथा उसकी शाखाओं से प्राप्त वार्षिक प्रतिवेदन के अनुसार गत् गुरुपूर्णिमा से इस गुरुपूर्णिमा के पूर्व तक कुल 88,390 रोगियों की चिकित्सा की गयी। रक्त–दान भी किया गया। बहुत-से शिविरों में पैथोलॉजी की भी व्यवस्था थी। इस वर्ष पर्यावरण-संरक्षण व वन्य-जीव संवर्धन बहुत उत्कृष्ट रहा। 2,10,500 से अधिक पौधरोपण हुआ। संस्था की प्रेरणा और पहल से छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में दो लाख से अधिक बीज गोले यानि सीड बाल पहाड़ों पर बिखेरे गए। इस ऐतिहासिक उपलब्धि को ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में स्थान दिया गया है। नरसिंहगढ़ (म.प्र.) में भी स्वयंसेवकों ने एक लाख से अधिक बीज गोलों का रोपण किया। जशपुर आश्रम में चाय की खेती ने स्थानीय आदिवासी पलायन को रोककर रोजगार तो दिया ही है, इस वर्ष पिपरमेंट और कोको की खेती भी इसी उद्देश्य से प्रारम्भ की गयी है। अत्यधिक गर्मी के चलते मानव-सेवा के साथ-साथ पक्षियों के संरक्षण हेतु नगरों और गाँवों में इनके दाना-पानी की व्यवस्था की गई। देशी गो-पालन, देशी बीज संरक्षण एवं जल-संरक्षण को बल दिया गया। जाड़े में जरुरतमंदों को कम्बल, रजाई व शाल देश के विभिन्न भागों के साथ-साथ नेपाल के थारू समुदाय में भी वितरित किये गए। इसी प्रकार ग्रीष्म ऋतु में राहगीरों हेतु पनशालायें भी अनवरत चलाई गयीं। ऋतु के अनुसार पिछड़े क्षेत्रों के लोगों को साड़ी, पुरुषों हेतु धोती, गमछा, तौलिया, स्वेटर, जैकेट, टोपी, स्कार्फ, मोजा इत्यादि वितरित किये गए। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में राजपुर प्रखंड के ग्राम बचवार में अनुसूचित जनजाति के पहाड़ी कोरबा– कोड़ाकू तथा नगेशिया समाज के लोगों में कम्बल और स्कार्फ का वितरण किया गया। विशेष उल्लेखनीय है कि चारो तरफ पहाड़ और घने जंगल से घिरे इस सड़क विहीन गाँव में दस किमी. दुर्गम रास्ते से इन वंचित लोगों के सेवार्थ जब सर्वेश्वरी सैनिक पहुँचे तो आँखों में कृतज्ञता और मौन आशीर्वाद लिए एक 85 वर्षीय वृद्ध स्थानीय भाषा में यही बोले कि “हमलोगों के बीच यहाँ तक आनेवाले आपलोग प्रथम आदमी हैं, शासन–प्रशासन या किसी संस्था का भी कोई व्यक्ति अब तक ऐसे कार्य के लिए यहाँ नहीं आया था।’’
युवाओं के साथ-साथ महिला-संगठन के स्वयंसेवकों ने भी ग्रामदेवी मंदिरों की साफ-सफाई एवं सदर चिकित्सालयों, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों, वृद्धाश्रमों व बाढ़ शिविरों आदि में फल, ब्रेड, वस्त्र, ताड़ के पंखे इत्यादि का वितरण किया। सर्वधर्म-समन्वय हेतु मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा व गिरजाघरों में झाड़ू, अगरबत्ती

इत्यादि वितरित किया गया। मच्छरजनित बीमारियों के रोकथाम हेतु मच्छरदानी बाँटा गया। राष्ट्रीयता और सदाचारयुक्त जीवन की प्रेरणा हेतु आमजन एवं कारागारों में अघोर-साहित्य वितरित किया गया।
अवधूत भगवान राम नर्सरी विद्यालय के प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त विद्यार्थियों को मेडल, प्रशस्ति-पत्र व छात्रवृति प्रदान की गयी। इसी प्रकार काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर दर्शन-शास्त्र में प्रथम स्थानप्राप्त विद्यार्थियों को अघोराचार्य बाबा कीनाराम और बाबा राजेश्वर राम तथा अघोरेश्वर भगवान राम एवं बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम स्वर्ण-पदक प्रदान कर सम्मानित किया गया। कई विद्यालयों के बच्चों को स्कूल बैग, कॉपी, किताब, लेखन व खेल-कूद सामग्री भी वितरित की गयी। सभी राष्ट्रीय-पर्व देशभक्ति के परिवेश में मनाये गए। “जातिवाद राष्ट्रहित के लिए दुखद है” विषय पर विद्यालयों में निबंध-प्रतियोगिताएं आयोजित कर मेधावियों को सम्मानित किया गया। गरीब परिवार के बच्चों हेतु निःशुल्क भोजन, आवास और शिक्षा की भी व्यवस्था की गयी है। आडम्बर और फिजूलखर्ची से दूर संपन्न हुईं अनेक शादियाँ आधुनिक समाज के लिए प्रेरणादायक हैं। यह संस्था उन क्षेत्रों में जनकल्याण कार्यों पर विशेष बल देती है जो बहुत पिछड़े हैं और जहाँ सुविधाओं–संसाधनों का बहुत अभाव है। इस अवसर पर श्री सर्वेश्वरी समूह के उपाध्यक्ष डॉ. ब्रजभूषण सिंह, अवधूत भगवान राम कुष्ठ सेवा आश्रम के प्रमुख वैद्य बैकुंठनाथ पाण्डेय, संस्था की प्रबंध-समिति के सदस्य डॉ. बामदेव पाण्डेय, वरिष्ठ पत्रकार दलीप सिंह भी ने पत्रकारों के सवालों का जवाब दिया।

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