वरिष्ठ अधीक्षक केंद्रीय कारागार नैनी को 50 रुपये अर्थदंड की सजा

  • 18 अक्तूबर को न्यायालय के समक्ष हाजिर होकर अपना पक्ष रखने का था आदेश, किंतु नहीं आए
  • एक वर्ष बाद नैनी जेल से अभियुक्त रामसजीवन कोर्ट में कराया गया हाजिर
  • एडीजे प्रथम अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट के एक्शन प्लान के तहत नहीं हो पा रहा था निस्तारण

सोनभद्र। अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम खलीकुज्ज्मा की अदालत ने मंगलवार को वरिष्ठ अधीक्षक केंद्रीय कारागार नैनी, प्रयागराज के न्यायालय में हाजिर न आने पर धारा 349 सीआरपीसी के तहत दोषी मानते हुए 50 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। साथ ही वरिष्ठ कोषाधिकारी प्रयागराज को आदेशित किया गया है कि वरिष्ठ जेल अधीक्षक, नैनी, प्रयागराज के वेतन से 50 रुपये कटौती कर अर्थदंड की धनराशि जमा करावें तथा न्यायालय को सूचित करें।
बता दें कि वरिष्ठ अधीक्षक केंद्रीय कारागार नैनी, प्रयागराज ने 21 जुलाई 2022, 10 अगस्त 2022, 22 सितंबर 2022 व 28 सितंबर 2022 को भेजे रेडियोग्राम में यह अवगत कराया है कि फोर्स उपलब्ध नहीं होने के कारण ही अभियुक्त रामसजीवन को कोर्ट के समक्ष नहीं हाजिर किया जा सका है। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने 12 अक्तूबर को कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि 3 माह से अभियुक्त रामसजीवन को नैनी जेल से तलब किया जा रहा है। लेकिन वरिष्ठ अधीक्षक केंद्रीय कारागार नैनी, प्रयागराज ने अभियुक्त रामसजीवन को कोर्ट में हाजिर नहीं किया। जिसे कोर्ट ने लापरवाही माना है। कोर्ट ने कहा कि वरिष्ठ अधीक्षक केंद्रीय कारागार नैनी, प्रयागराज कोर्ट से भेजे गए आदेश को गम्भीरता से नहीं लेते और न ही उसका अनुपालन करने में ही रुचि लेते हैं। जिसकी वजह से इस मामले का हाईकोर्ट के एक्शन प्लान के तहत निस्तारण नहीं हो पा रहा है। अतः धारा 349 सीआरपीसी के तहत वरिष्ठ अधीक्षक केंद्रीय कारागार नैनी, प्रयागराज के विरुद्ध नोटिस जारी किया जाए। साथ ही 18 अक्तूबर 2022 को न्यायालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष प्रस्तुत करें एवं अभियुक्त रामसजीवन को कोर्ट में हाजिर करने का आदेश दिया था। बावजूद इसके वरिष्ठ जेल अधीक्षक नैनी, प्रयागराज मंगलवार को न्यायालय के समक्ष हाजिर नहीं हुए। वर्ष 2021 से अभियुक्त रामसजीवन को न्यायालय में हाजिर कराने के लिए कहा जाता रहा, लेकिन गम्भीरता से नहीं लिया गया। बल्कि यह स्पष्टीकरण दिया गया है कि पुलिस मुहैया नहीं कराई गई थी। अभियुक्त रामसजीवन को मंगलवार को न्यायालय के समक्ष हाजिर कराया गया। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने उपरोक्त आदेश दिया है।

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