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क्रांति दिवस के दिन होगा क्रांति पथ प्रवेश द्वार का लोकार्पण

  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • 9 अगस्त को है क्रांति दिवस
  • ऊँचडीह – ओईनीमिश्र – करकी मार्ग को कहा जाता है क्रांति पथ
  • इसी मार्ग पर है प्रमुख दस सेनानियों के गांव
  • लोक निर्माण विभाग और विकास विभाग ने भी कई योजनाएं बनायीं

वरिष्ठ पत्रकार विजय शंकर चतुर्वेदी की रिपोर्ट

सोनभद्र(सर्वेश श्रीवास्तव)। 9अगस्त क्रांति दिवस के दिन जनपद के क्रांति पथ पर बने विशाल प्रवेश द्वार का लोकार्पण घोरावल विधायक अनिल कुमार मौर्य द्वारा किया जाएगा । ऊँचडीह – ओईनी मिश्र – करकी मार्ग को क्रांतिपथ कहा जाता है जिस पर जिले के प्रमख दस सेनानियों के आवास स्थित हैं।
राबर्ट्सगंज – घोरावल मुख्य मार्ग के छठवें किलोमीटर पर स्थित ऊँचडीह में आजादी के अमृत महोत्सव के तहत सेनानियों की स्मृति में क्रांतिपथ प्रवेश द्वार का निर्माण घोरावल के विधायक अनिल कुमार मौर्य द्वारा कराया गया है , जिस पर इस मार्ग पर स्थित गांवों के कुल दस स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम अंकित कराए गए हैं। स्वतंत्रता आंदोलन के समय यह रास्ता सेनानियों और आजादी के सिपाहियों को प्रताड़ित करने के लिए अंग्रेज सिपाहियों की आवाजाही का प्रमुख मार्ग हुआ करता था । इसी मार्ग पर स्थित देवरी खुर्द गांव में स्वतंत्रता आंदोलन के महानायक पँ महादेव चौबे ने वर्ष 1939 में नमक कानून भंग किया था । इसी मार्ग पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पँ महादेव चौबे, प्रभाशंकर शर्मा, देवेन्द्रनाथ चौबे, गौरीशंकर देव पांडेय, बालगोविंद पांडेय , राधाप्रसाद शर्मा , अछैवर उपाध्याय , यज्ञनारायण सिंह, रामप्रताप सिंह और गुलाब सिंह के निवास हैं। 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह आंदोलन और 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में इस रास्ते पर अंग्रेज घुड़सवारों की सक्रियता आम बात थी, वे कभी सेनानियों को सम्मन , कुर्की नीलामी, आंदोलनों को रोकने और सेनानियों के परिजनों को उत्पीड़ित करने के लिए इस रास्ते से आवागमन करते थे । देवरी कला के दूधनाथ पांडेय इसी रास्ते से परासी के शहीद उद्यान से प्रकाशित होने वाले परिवर्तन नामक समाचार को प्रकाशित करवा वितरित करा दिया करते थे । इसी रास्ते के तियरा गांव में पँ महादेव चौबे ने एक मड़ई का निर्माण कराया , जब 1941 में गम्भीर अकाल ने लोगों की हिम्मत पस्त कर दी थी और व्यक्तिगत सत्याग्रह आंदोलन करते हुए पँ महादेव चौबे अपने दोनों पुत्रों प्रभाशंकर व देवेन्द्रनाथ के साथ कारावास की यातना झेल रहे थे उसी समय अंग्रेज सिपाहियों ने मड़ई में रह रहे पँ महादेव चौबे के परिजनों को भी तंग करना शुरू कर दिया तो पँ महादेव चौबे की पत्नी सुकुमारी देवी भी जेल जाने के लिए तैयार हो गयी थीं। मड़ई को गौरव वाटिका के रूप में विकसित कर दिया गया है। देवरी खुर्द के उस स्थान को जहां नमक कानून भंग किया गया था वहां स्मृति वाटिका के लिए डीएम चन्द्र विजय सिंह ने स्मृति वाटिका के निर्माण के लिए अधीनस्थों को निर्देशित किया है। ग्रामसभा ने स्मृति वाटिका के लिए भूमि का प्रस्ताव भी अधिकारियों को प्रेषित कर दिया है। युवक मंगल दल के जिलाध्यक्ष सौरभकान्त तिवारी ने कहा कि इस स्मृति वाटिका का लाभ पड़ोसी गांवों को भी मिलेगा । लोकनिर्माण विभाग भी आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत इस मार्ग के सुधार के लिए योजना बना रहा है। इस मार्ग से जुड़े ग्रामप्रधानगण अर्चना त्रिपाठी, सुशीला देवी, प्रीति चतुर्वेदी, राजेन्द्र प्रसाद व प्रवीण पटेल ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर इस ऐतिहासिक मार्ग को विकसित करने की मांग की है।


अमृत सरोवरों से समृद्ध होगा क्रांतिपथ

क्रांतिपथ से जुड़े स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के ग्रामों के तालाबों को अमृत सरोवर के रूप में विकसित करने की योजना पर जिला प्रशासन ने कार्य प्रारंभ कर दिया है, इसकी घोषणा शीघ्र हो सकती है। ऊँचडीह , देवरी कला, तियरा , महुरेसर, ओईनी मिश्र और देवरी खुर्द के तालाबों को अमृत सरोवर के रूप में घोषित करने के लिए ग्राम प्रधान अर्चना त्रिपाठी ने मुख्य विकास अधिकारी को पत्र प्रेषित कर दिया है।

ऐतिहासिक है गौरव वाटिका
स्वतंत्रता सेनानी और अविभाजित मिर्ज़ापुर के स्वतंत्रता आंदोलन के महानायक पँ महादेव चौबे का निधन मड़ई तियरा के इसी स्थान पर हुआ था, इस वाटिका में सेनानी पँ महादेव चौबे और प्रभाशंकर चौबे की प्रतिमा भी स्थापित है। पँ महादेव चौबे के दूसरे सेनानी पँ देवेन्द्रनाथ चौबे की प्रतिमा लगाने की तैयारी चल रही है। गौरव वाटिका का सृजन निर्माण सेनानियों के वंशज विजय शंकर चतुर्वेदी द्वारा किया गया है। वाटिका में देश विदेश के दुर्लभ पौधों को भी रोपित किया गया है।

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