शशिकान्त ने बागवान और मचान खेती से किसानों को करवाया रूबरू

समर जायसवाल-



विधान संस्था के निदेशक श्री मुकेश कुमार पांडे ने बताया कि नाबार्ड राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक द्वारा वित्त पोषित आदिवासी विकास निधि अंतर्गत जनपद सोनभद्र के दुद्धी ब्लाक के ग्राम डुमरा,बासीन, बोधडीह, करहिया आदि गांवों का चयन जुलाई में वाड़ी विकास परियोजना हेतु किया गया है। निदेशक ने बताया कि विधान संस्था के वाड़ी परियोजना का संचालन परियोजना प्रबंधक शशिकान्त कर रहे है, उक्त परियोजना की जानकारी से किसान अति उत्साहित है उन्होंने आगे बताया कि वाड़ी विकास परियोजना के क्रियान्वयन से किसानों की आय में दोगुनी वृद्धि होगी उन्होंने आगे कहा कि आने वाले 5 सालों के पश्चात किसान बागवानी और अन्य कृषि की नई तकनीक के माध्यम से अपनी आय में कई गुना वृद्धि देखेंगे जिससे उनकी एवं उनके परिवार का जीवन स्तर ऊंचा होगा ।




*परियोजना प्रबंधक शशिकान्त* ने बताया कि वाड़ी परियोजना के चयनित गांवों में से उत्साहित एवं आदिवासी ग्रामीण कुछ जागरूक किसानों को यथा स्थिति से अवगत कराने हेतु तथा पहले से वाडी विकास परियोजना के संचालित गांव में दिनांक 22 सितंबर 2021 को जनपद सोनभद्र के बभनी तथा म्योरपुर ब्लाक में नाबार्ड के सहयोग से पहले से संचालित वाड़ी विकास परियोजना के अंतर्गत गांवों में सफल किसानों के मध्य शैक्षिक भ्रमण कराया गया। इसके साथ किसानों को बागवानी खेती से आम, अमरूद, नीबू एवम बनदार जानकारी प्रशिक्षण के माध्यम से दिया गया । उक्त प्रशिक्षण के दौरान परियोजना के किसानों के बीच संवाद एवं एक्सपोजर विजिट के माध्यम से उन्हें जागरूक करने का प्रयास भी किया गया, सांसद आदर्श ग्राम नगवा के किसानों द्वारा अपनाई गई त्रिस्तरीय खेती 3 लेयर खेती से किसानों को अवगत कराया गया तथा सफलतम किसानों के बीच संवाद के माध्यम से उन्हें जागरूक करने का प्रयास किया गया कार्यक्रम के पश्चात किसानों ने *आदिवासी एकता जिंदा बाद जिंदा बाद, जय नाबार्ड, जय विधान* का अपने गद्द गद्द हृदय की अनुभूति से नारा लगा कर प्रबंधक शशिकान्त ने धन्यवाद किया इस कार्यक्रम में विधान संस्था के किसान व स्थानीय किसान संस्था के पदाधिकारी व सर्च एवम वाई0एम0सी के कार्यकर्ता मौजूद रहे ।

कैप्सन – 1 आदिवासी को किसानों को प्रशिक्षण देते परियोजना प्रबंधक शशिकान्त ।
2-नाबार्ड के सहयोग से आदिवासी किसानों का पांच वर्षो के पश्चात के आय में दोगुनी बृद्धि का साधन बनेगी विधान संस्था।
3- उबड़ खाबड़ आदिवासी के जमीनों में फल के साथ त्रिस्तरी खेती का दिखाई देगी हरियाली, संस्था ने ठाना है विकास का प्रयास

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