जानिये पंडित वीर विक्रम नारायण पांडेय जी से धन संबंधित उपायों की सम्पूर्ण व्याख्या

धर्म डेक्स । जानिये पंडित वीर विक्रम नारायण पांडेय जी से धन संबंधित उपायों की सम्पूर्ण व्याख्या



धन की समस्या समस्त जनसमाज में प्रतिदिन विकराल रूप लेती जा रही है। जैसे जैसे व्यक्ति की आवश्यकताए बढ़ी है उससे अधिक व्यर्थ के खर्च बढ़े है। इन सभी की पूर्ति करने के लिये धन की आवश्यकता से इनकार नही किया जा सकता व्यक्ति कभी भी आकस्मिक घटनाओं अथवा दुर्घटनाओं के लिये तैयार नही रहता इसलिये जब भी अनापेक्षित एवं अनायास किसी प्रकार की घटना अथवा दुर्घटना का सामना करना पड़ता है तो अनेक समस्याओं के साथ साथ धन संबंधित समस्या भी उभर कर सामने आती है। अपने उत्तरदायित्वों को पूरा करने में भी धन की आवश्यकता पड़ती है।
इसके अतिरिक्त एक अन्य स्थिति को भी देखना चाहिये जो धन संबंधित समस्या उत्पन्न करती है।ये समस्या अधिकांशतः व्यवसाय से संबंधित ही होती है। व्यवसाय में किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न होने पर भी खर्च यथावत रहते है। इस स्थिति में धन की अधिक आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में यह विचार उत्पन्न होता है जिस धन की हमे आवश्यकता है उसे कैसे प्राप्त किया जाए प्रारंभ से ही हमारे विद्वान ऋषियों ने किसी भी समस्या से मुक्ति के अनेकों उपाय बताए है। धन संबंधित समस्याओं के लिये भी की ऐसे चमत्कारिक उपाय है जिनका प्रयोग कर धन प्राप्ति के मार्ग में आने वाली बाधाये समाप्त हो सकती है। आज से हम आपके साथ प्रतिदिन धन अथवा अन्य समस्याओं से छुटकारा दिलाने के स्वानुभूत प्रयोग सांझा करेंगे।

धन संबंधित उपाय कब करें

हमारे द्वारा बताए गए धन संबंधित अधिकांश उपाय को लक्ष्मी जी की कृपा प्राप्ति के साथ जोड़कर दिखाया गया है इससे आप यह विचार ना करें कि लक्ष्मी के उपाय केवल दीपावली पर ही करें आप दीवावली के अतिरिक्त भी अन्य शुभ अवसरों पर ये उपाय कर सकते है। लेकिन जब भी कोई उपाय करें तो पूरी श्रद्धा के साथ करें तभी शीघ्र फल की प्राप्ति होती है। आडंबर से भरपूर और विशाल स्तर पर की गई आस्था एवं श्रद्धाहीन पूजा का फल कभी नही मिलता इसका विशेष ध्यान रखें। इसके अतिरिक्त कुछ नियम का पालन करना भी अतिआवश्यक है जो आपको नीचे बताये जा रहे है।

आवेश की अवस्था मे उपाय नही करें अधिकांश अवसरों पर व्यक्ति दुखो परेशानियों से क्षुब्ध होकर पूजा पाठ अथवा उपाय करने बैठता है तब भी आवेश से भरा रहता है। ऐसे स्थित में आपका ध्यान उपायों पर कम अपनी समस्याओं पर अधिक रहता है परिणाम स्वरूप जिस स्थित और समर्पित भाव से उपाय करना है उस स्थिति में आया ही नही जा सकता ऐसे में किये उपाय का लाभ नही मिल पाता।

असम्भव की प्राप्ती के लिये उपाय नही करें।

किसी के अनिष्ट के लिये उपाय नही करे अन्यथा प्रकृति के नियम अनुसार आप जिसके साथ जैसा करेंगे वैसा ही फल आपको भी आगे भोगने को मिलेगा।

संस्कृत ज्ञान ना होने पर हिंदी अनुवाद में पाठ अथवा स्त्रोत्र करें संस्कृत को जबरदस्ती पढ़ने का प्रयास हानि करा सकता है।

उपाय करते समय अपने गुरु और इष्ट के प्रति समर्पित भाव होना चाहिये तभी सफलता निश्चित होती है।

फल प्राप्ति में विलंब होने पर निराश ना हो पूर्वसंचित कर्म धीरे धीरे ही कटते है उसके बाद ही उपायों में सफलता मिकने लगती है एक या दो बार सफल ना होनेपर भी निष्ठा से उपाय करते रहे पत्थर पर भी रस्सी बार बार रगड़ते रहने पर निशान आ जाता है इससे भी कुछ प्रेरणा लें।

जिस उपाय के प्रति अधिक आस्था हो विलंब होने पर भी उसे बदलें नही अन्यथा नया उपाय करने पर शक्तियों को संग्रहित होने में फिर से उतना ही समय लगेगा।

उपाय करने के साथ-साथ कर्म भी करते रहे कुछ व्यक्ति सोचते है कि जो उपाय कर रहे है उसका फल मिलते ही उनकी समस्त संमस्या समाप्त हो जाएगी इसलिये अब अधिक पुरुषार्थ करने की आवश्यता नही जबकि ऐसा नही होता जैसे कर्ज होने की स्थिति में केवल उपाय पर ही निर्भर नही रहा जा सकता साथ मे व्यवसाय अथवा अन्य रोजगार में अधिक परिश्रम करने पर ही कर्ज उतारने की स्थिति बनेगी परिश्रम के साथ परमार्थ भी करने पर शीघ्र ही भगवत कृपा प्राप्त होती है।

सामग्री को जल में प्रवाहित कैसे करें?

अनेक उपायों में यह उल्लेख आता है कि अमुक सामग्री को जल में प्रवाहित करें इसके पीछे छुपा कारण आपको बताते है कि इसके पीछे यह भावना होती है जिस प्रकार से प्रवाहित करने पर वस्तु हमसे दूर जा रही है उसी में हमारे कष्ट और समस्याए है जिन्हें तीव्र वेग वाले जल में बहाने पर उसी तीव्र वेग से हमारे दुख एवं कष्ट दूर चले जाएं। अधिकांश पाठकों के समक्ष यह समस्या आती है कि हमारे आस-पास बहता जल नही है ऐसी स्थिति में आप किसी तालाब में भी यह उपाय कर सकते है जो सामग्री आपने प्रवाहित करनी है उसे जल में छोड़कर दोनो हाथों से ११ अथवा २१ बार जल को आगे की ओर धकेले ऐसा करने पर सामग्री आपसे दूर चली जायेगी इसके बाद बहती सामग्री को प्रणाम कर ईश्वर से प्रार्थना करे जिसप्रकार सामग्री डोर जा रही है उसी प्रकार मेरी समस्याओं को दूर करें।

सामग्री 👉 उपायों में प्रयोग करने वाली सामग्री हमेशा स्वच्छ ही ले अधिकांश वस्तु आपके आसपास ही मिल जाती है लेकिन कुछ वस्तु ऐसी भी होती है जिन्हें डोर शहर से मंगाना पड़ता है जैसे कि शंख, गौमती चक्र, कौड़िया, यंत्र, रुद्राक्ष, अथवा अन्य सामग्री जो कि आपके पास पहुचने से पहले कई हाथों से गुजरती है इसलिये इनका पुनः शुद्धिकरण होना आवश्यक हो जाता है। इसलिये इन्हें गंगाजल में धोकर प्रयोग करें गंगाजल उपलब्ध ना होने पर गौमूत्र का भी प्रयोग कर सकते है। इसके बाद आप जो भी उपाय करेंगे वह अवश्य ही सफल होगा।

आज आपको उपाय संबंधित नियम निर्देशो की जानकारी दी गई है कल से नियमित उपाय के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी दी जाएगी आशा है आप सभी इनका प्रयोग कर लाभ के भागी बनेंगे।

Translate »