जानिये पंडित वीर विक्रम नारायण पांडेय जी से बुध का जातक के जीवन पर प्रभाव

धर्म डेक्स । जानिये पंडित वीर विक्रम नारायण पांडेय जी से बुध का जातक के जीवन पर प्रभाव



बुध ग्रह और जन्मपत्रिका

ज्योतिष में सूर्य को ग्रहों का राजा पिता चन्द्रमा को ग्रहों की रानी और मंगल को ग्रहों का सेनापति और भाई का कारक माना गया है। बुध को युवराज/युवराज्ञी और बहन माना गया है। बुध ग्रह मिथुन राशि और कन्या राशि का स्वामी है बुध कन्या में उच्च और मीन राशि में नीच होता है मिथुन राशि इसकी अपनी राशि है। तुला राशि में यह सबसे अधिक प्रसन्न रहता है। साल में लगभग यह 24 दिन वक्री रहता है। युवराज या युवराज्ञी इसलिए माना जाता है कि जब इसकी दशा/अन्तरदशा आती है तब यह तत्काल फल देता है यह ग्रह बचपन में भी जल्दी प्रभावी हो जाता है इसलिए इसे युवराज्ञी की संज्ञा दिया जाता है। बुध की महादशा 17 साल की होती है इसका रंग हरा और रत्न पन्ना है। आकृति गोल है और स्वाद मिश्रित खट्टा- मीठा, नमकीन 21 से 30 दिन तक रहता है। प्रचीन ज्योतिष के हिसाब से देवता विष्णु भगवान और लाल किताब के हिसाब से दुर्गा माता मानी जाती है इसकी दिशा उत्तर है और दृष्टि तिरछी है यह जिस घर में बैठा है उससे सप्तम दृष्टि से देखता है। विद्या, बुद्धि और मामा का विचार इससे किया जाता है बुध प्रधान व्यक्ति अर्थशास्त्र, लेखाशास्त्र, शिल्पकला और रसायन शास्त्र और चिकित्सा शास्त्र अधिक पढ़ते है।

विचारणीय विषय-बुध से हरियाली, खाली स्थान, खोल-ढांचा, खाम्चा, ठप्पा, छप्पा, ठठेरा, नकल, नकलची, दलाल, सट्टेबाज, जी-हजूरिया हीजड़ा, बहन, लड़की, साली, मौसी, नर्स, तोता, भेड़, बकरी, चमगादड़, मुर्गी, ढाक, दांत, नाड़े, जुबान, मुंह का स्वाद, सींग, बांस, शीशा, कोड़ी, फटकड़ी, ढोलक, रेडियों, तबला, सांरगी, राग, रंग के सामान, हुनर, कोरा कागज, सितार, टोपी, नाड़ी, तागड़ी पेटटी, सूखी घास, सीढ़ी, सींग, कौड़ी, शंख, सौंप, कली, मटका, अंडा, प्याज, लोटा, गड़वी चेचक बीमारी, पूंछ, चौड़े पत्तों के वृक्ष, व्यापार, नौकरानी, टूटी, पाईप, जबान, हलवा, पक्का कद्दू सबजी वाला, हरा पेठा मिठाई, रेत, राख आदि का संबंध बुध से माना जाता है। जिनका बुध अच्छा होता है वे प्रकृति प्रेमी, काव्य संगीत में रूचि, हसमुख, विनोदी स्वभाव, और द्विअर्थी भाषा का प्रयोग करने एवं संगी या समय के हिसाब से बदलने वाला माहिर होता है। बुध प्रभावी व्यक्ति सरल स्वभाव का कामकाजी, विद्वान चुस्त और अध्यवासी होता है। उसका स्वभाव मृदु एवं प्रत्येक गतिविधि में प्रसन्नता टपकती है नम्र, विनीत, आत्मविश्वासी, हाजिर जवाब होने के साथ-2 चतुर भी होते है। बुध उत्तम होने पर व्यक्ति के जीवन पर 32 से 36 वर्ष में विशेष शुभ प्रदर्शित करता है। यदि इस अवधि में दशा एवं अन्य ग्रह स्थिति भी अनुकूल हो तो सर्वाधिक उन्नति होती है। बुध प्रधान व्यक्ति निम्न व्यवसाय करते हैं बैंकिंग व्यवसाय, रूपयों का लेने-देन अर्थात् व्याज पर उधार देना, ज्योतिष या कर्मकाण्ड का काम पुरोहित का काम, लिपक, टाइपिस्ट, अध्यापन, प्रध्यापक, वकालत, अनुवादक, लेखक, संपादक, पत्रकार, प्रिटिंग प्रेस प्रकाशक, शिल्पकार, भवन निर्माता, पुस्तक विक्रेता, चालक, सेल्समैन संबंधी कार्य या व्यवसाय से धन प्राप्त करना और साहित्यक ज्ञान प्राप्त करना इनका विचार बुध से किया जाता है।

ज्योतिष शास्त्र में बुध को पृथ्वी तत्व माना गया है इसकी जाति वैश्य और गुण रज माना गया है समिधा चिरचिटे यह कंटीले फूलों वाला कुरुप पौधा झांड झंखार के रूप में सर्वत्र पाया जाता है। वर्षा ऋतु में आकर गर्मी तक रहता है। लम्बाई 2 से 3 फीट, टहनी लम्बी व पतली होती है अगर किसी के दांत में कोई खराबी हो इसकी दातुन रोज करें तो दांत मजबूत होगे। ज्योतिष में दांत, फिटकरी, और चिरचिटा को बुध में बुध मिलाकर बुध को लाभ पहुंचाया जाता है। फिटकरी से कुल्ली करने से भी दांत दर्द कम और दांत की बीमारी समाप्त होती है। ज्योतिष के अनुसार गुरू और राहु मिलकर बुध ग्रह बनते है राहु का रंग काला नीला और गुरु का पीला मिलाकर हरा बना है। कारक अच्छा है तो अच्छा फल देगा अगर कारक खराब हो तो अच्छा फल नहीं देगा। जिस जातक के दांत कम उम्र में खराब हो गये हैं बहन बुआ, मौसी कमजोर स्थिति में है या फिर बीमार रहती है या उनकी आर्थिक स्थिति खराब है या जातक से विचार नहीं मिलते है जातक की घड़ी गायब हो गयी है और जातक को सुगन्ध का पता नहीं चलता है इससे पता चलता है कि बुध खराब है या कमजोर स्थिति में है। चन्द्र राहु एक साथ होने पर बुध खराब हो जाता है। बुध को बुद्धि का
कारक माना गया। आगर जातक कि बुद्धि अच्छी है तो वह राजा बन जाता है अगर बुद्धि खराब हो गई है उसका राज्य छीना जा सकता है। बुध के साथ केतु या मंगल मिलने से या इनकी दृष्टि पड़ने से बुध खराब कमजोर हो जाता है। सूर्य, शुक्र और राहु इसके मित्र है चन्द्रमा बुध से शत्रुता करता है लेकिन बुध चन्द्रमा से शत्रुता नहीं करता है। राहु और बुध जो आपस में मित्र और एक दूसरे के सहयोगी है यदि किसी टेवे में दोनो ही मन्दे घरों में चले जाये। बुध 3,8, 9, 12 राहु 1, 5, 7, 8, 11 तो जातक बहुत परेशान हो जायेगा उसके दिमाग पर इतना बोझ होगा कि जिन्दा होते हुए भी जीवन का सुख नहीं पायेगा। ज्योतिष में सब ग्रहों के बारे में दो स्थिति लिखी है शुभ और अशुभ, हमने देखा कि बुध के साथ जब उपयुक्त स्थिति बनती है तब मन्दो स्थिति मानी जाती है उपयुक्त विषयों में कमजोर विद्यार्थी का बुध कमजोर या खराब माना जाता है जब बुध खराब हो तो बुध से संबंधित चीजों को अपने पास रखने से उसका बुरा प्रभाव और पड़ना शुरू हो जायेगा ग्रहों के कारक से संबंधित चीजों से परहेज सहायता करेगा। उदाहरण के तौर पर जिसका बुध खराब है वह हरा कपड़ा न पहने, हरी मुंगी न खायें अपने घर में मनीप्लांट न लगाये बुध के बुरे प्रभाव से बचने के लिए 9 साल से कम उम्र कि कन्याओं के पैर धोकर खाना खिलाये हरा सूट दान करे । दुर्गा सप्तसती का रोज पाठ करे । जब बुध खराब हो उस समय पन्ना धारण नहीं करना चाहिए। ऊपर हमने लिखा था कि राहु और चन्द्र एक साथ होने पर बुध खराब हो जाता है वे इसलिए होता है कि राहु बुध का मित्र है वह चन्द्र के साथ बैठ जाता है उस समय चुप हो जाता है। हाथी राहु की सूंड में बुध का पानी चन्द्र आया तो गन्दा हो गया। भाव यह है कि चन्द्र ने जब भी राहु को शांत किया या राहु से जब भी चन्द्र मिला तो बुध को हानि हुई क्योंकि उसका मित्र राहु उसका साथ छोड़ गया। चन्द्र के साथ से राहु चुप हो जाया करता है। अर्थात् चन्द्र राहु के इक्कठे होने पर बुध कमजोर और मन्दा हो जायेगा।

बुध के बुरे प्रभाव से बचने के कुछ सामान्य उपाय

  1. दुर्गा चालीसा का रोज पाठ करने से बुध के बुरे प्रभाव से बचाव होगा।
  2. बुध को ठीक रखने के लिए मटर, हरी दालें. हरी साबूत मूंग, अमरूद, हरी सब्जियां अधिक से अधिक खाना चाहिए जातक को अपने पास इलायची रखना चाहिए और उसे दिन में 2/3 पर इलायची खाना चाहिए आपने घर में तुलसी का पौधा लगाये रोज़ नहाकर जल चढ़ाये तथा 5/7 पता तुलसी का रोज खाया करे। चम्पा के तेल या इत्र का प्रयोग करना चाहिए
  3. अगर कुण्डली के बुध ग्रह ठीक है फिर पन्ना रत्न चांदी /सोने की अंगूठी में जड़वाकर बुधवार/पूर्णमासी के दिन कच्चे दूध में धोकर दुर्गा चलीसा का पाठ करके अंगुठी का धूप देकर धारण करना चाहिए उसके बाद में कच्चा दूध किसी फल वाले या फूल वाले पेड़ में डाल देना चाहिए।

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