जानिये पंडित वीर विक्रम नारायण पांडेय जी से कोरोना वायरस से बचने एवं प्रभाव समाप्त करने के उपाय…..

स्वास्थ्य डेस्क। जानिये पंडित वीर विक्रम नारायण पांडेय जी से कोरोना वायरस से बचने एवं प्रभाव समाप्त करने के उपाय…..

घर पर बनाये सस्ता सेनेटाइजर

घरेलू सेनेटाइजर की विधि इस प्रकार है-

1 लीटर स्प्रिट (कीमत 110 रुपए)
200 ml ग्लिसरीन (60 रुपए)
एक ढक्कन डिटोल का….
महक चाहिए तो कोई भी इत्र चल जाएगा….

विधि

पहले स्प्रिट व ग्लिसरीन को मिलाइये, फिर डिटोल मिला दीजिए… आपका सेनिटाइजर तैयार हो जाएगा… मात्र 200 रुपए में आपका 1200 ml सेनिटाइजर तैयार हो जाएगा….

फिटकरी से सेनेटाइजर बनाने की विधि

1 लीटर पानी मे 100ग्राम फिटकरी डाल 1 ढक्कन डिटोल. गाढा करने के लिए ग्लिसरीन या एलोविरा मिलाकर भी सेनिटाइजर बना सकते है।

ये घरेलू सेनेटाइजर बनाने की विधि है इसके अतिरिक्त मंत्रो की शक्ति को अब धीरे धीरे विज्ञान भी मान रहा है इसलिये आपसे किसी मंत्र विशेष का जप करने के लिये कोई जबरदस्ती नही है आपका जिस भी मंत्र के प्रति अधिक लगाव (निष्ठा) हो उसी का अधिक से अधिक संख्या में जप करें। सभी पौराणिक मंत्र स्वयं सिद्ध होते है बस इनको करने वाले के सामर्थ्य पर फल का निर्धारण होता है जितना अधिक जप करेंगे फल उतना ही अधिक और स्पष्ट मिलेगा।

महाभय नाशक महामृत्युंजय मंत्र जप

महामृत्युंजय मंत्र के 33 अक्षर हैं। जो महर्षि वशिष्ठ के अनुसार 33 करोड़ देवताओं के प्रतिक हैं। उन तैंतीस देवताओं में 8 वसु 11 रुद्र और 12 आदित्य, 1 प्रजापति तथा 1 षटकार हैं। इन तैंतीस कोटि देवताओं की सम्पूर्ण शक्तियाँ महामृत्युंजय मंत्र से निहीत होती है।

मंत्र का अर्थ हम त्रि-नेत्रीय वास्तविकता का चिंतन करते हैं। जो जीवन की मधुर परिपूर्णता को पोषित करता है और वृद्धि करता है। ककड़ी की तरह हम इसके तने से अलग हम जीवन व मृत्यु के बंधन से मुक्त हो। महामृत्युंजय मंत्र-संस्कृत में महामृत्युंजय उस व्यक्ति को कहते हैं जो मृत्यु को जीतने वाला हो। ऋग्वेद से लेकर यजुर्वेद में भी इस मंत्र का उल्लेख मिलता हैं। इसके अलावा शिवमहापुराण में इस मंत्र व इसके आशय को विस्तार से बताया गया हैं।

महामृत्युंजय का प्रभावशाली मंत्र
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ॐ ह्रौं जूं सः। ॐ भूः भुवः स्वः। ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्‌। स्वः भुवः भूः ॐ। सः जूं ह्रौं ॐ ॥

महामारी एवं विपत्ति नाश के लिये दुर्गा सप्तशती के विशेष मंत्र इनका मन ही मन जप करते रहने से अत्यंत लाभ मिलता है।

देव्या यया ततमिदं जग्दात्मशक्त्या निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूर्त्या | तामम्बिकामखिलदेव महर्षिपूज्यां भक्त्या नताः स्म विदधातु शुभानि सा नः ||

देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतोखिलस्य | प्रसीद विश्वेश्वरि पाहि विश्वं त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य ||

रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभिष्टान् । त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्माश्रयतां प्रयान्ति ॥

जयन्ती मड्गला काली भद्रकाली कपालिनी । दुर्गा क्षमा शिवाधात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते ॥

ध्यान रहे निष्काम भाव से अथवा परोपकार या जगत कल्याण की कामना से किये गए जप तप आदि का कोई नियम मान्य नही है अजपाजप कही भी किसी भी परिस्थिति में किया जा सकता है।

आध्यात्म और आयुर्वेद के अतिरिक्त हमें अपनी जिम्मेदारी स्वयं ही लेनी होगी इसलिये सरकार के बताये नियमो का पालन अवश्य करें 22 मार्च के दिन घर पर ही रहे इसके बाद भी जब तक खतरा बना हुआ है सार्वजनिक स्थानों पर जाने से बचे जिम्मेदार नागरिक बने हम आने वाले समय मे स्थिति को गंभीर होने से स्वयं ही बचा सकते है।

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