बौद्धिक व शारीरिक विकास के साथ ही जिले व प्रदेश तथा देशस्तरीय खेलों में सोनभद्र जिले का नाम रौशन करने के मकसद से खेला जाय।

जिला स्तरीय दिव्यांग बच्चों की खेल-कूद व सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रतियोगिता समारोह

दिव्यांग बच्चों द्वारा जनपद के लोक नृत्य, सरस्वती वंदना, स्वागत गीत आदि अन्य विधाओं में दिव्यांग बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम की शानदार प्रस्तुति

सोनभद्र।सोनभद्र जिले के परिषदीय स्कूलों के दिव्यांग बच्चों में प्रतिभाग की कोई कमी नहीं है, जरूरत है समय-समय पर इनको जागरूक करने की, खेल को हार-जीत के मकसद से नहीं बल्कि खेल भावना यानी बौद्धिक व शारीरिक विकास के साथ ही जिले व प्रदेश तथा देशस्तरीय खेलों में सोनभद्र जिले का नाम रौशन करने के मकसद से खेला जाय। सोनभद्र जिले के दिव्यांग बच्चों का मण्डल में प्रथम स्थान पाना बेहतरी का सबूत है, जिसके लिए बीएसए सहित उनकी पूरी टीम तारीफ के हकदार हैं। दिव्यांगता प्रतिभा के आड़े नहीं आती,जिन दिव्यांग बच्चों में प्रतिभा है, उनमें आगे बढ़ते हुए राष्ट्र की मुख्य धारा से जुड़ते हुए आगे बढ़ने की क्षमता है। खेल जीवन को बेहतर बनाने के साथ ही नागरिकों में राष्ट्र की भावना व स्वास्थ्य के साथ ही उच्च सोच को सृजित करने का माध्यम भी है। शिक्षा के साथ-साथ खेल प्रतियोगिता का आयोजन करना दिव्यांग बच्चों के लिए काफी लाभप्रद है। खेल जीवन के लिए महत्वपूर्ण है।

खेल से शारीरिक, मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चा स्वस्थ्य रहता है। खेल से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है। खेल-कूद से आपसी मेल-जोल बढ़ने के साथ ही स्वस्थ्य मनोरंजन को बढ़ावा मिलता है और बेहतरीन समाज की स्थापना होती है। उक्त बातें जिलाधिकारी एस0 राजलिंगम ने बुधवार को जिला शिक्षा प्रशिक्षण परिसर में आयोजित जिला स्तरीय दिव्यांग बच्चों की खेल-कूद व सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रतियोगिता समारोह में दिव्यांग बच्चों का हौसल अफजाई करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि खेल से हमारे जीवन में काफी कुछ सीखने को मिलता है, जो भविष्य में आगे बढ़ने के लिए काफी कारगर होता है।

कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती जी के चित्र पर दीप प्रज्जवलित कर माल्यार्पण करके, खेल ध्वज का ध्वजारोहण करके, हरी झण्डी दिखाने के साथ ही किया। साथ ही शान्ति के प्रतीक गुब्बारे व सफेद कबूतर आसमान में छोड़े। दिव्यांग बच्चों द्वारा जनपद के लोक नृत्य, सरस्वती वंदना, स्वागत गीत आदि अन्य विधाओं में दिव्यांग बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये गये। जिलाधिकारी एस0 राजलिंगम ने दिव्यांग बच्चों को उत्साह वर्धन किया और उन्होनें भविष्य को बेहतर बनाने के लिए अच्छी शिक्षा ग्रहण करने के लिए प्रेरित किया। दिव्यांग बच्चों की प्रतियोगिता में 100 मीटर की दौड़, छूकर पहचानों, चम्मच रेस, बोरा रेस, म्यूजिकल चेयर, रिंग पासिंग, बाल फेकना, रस्साकसी, मेढ़क दौड़, राष्ट्रीय लोक गीत आदि की प्रतियोगिता किया गया। जिला षिक्षा एवं प्रषिक्षण केन्द्र उरमौरा में प्रातः काल से सायंकाल तक विभिन्न प्रतियोगिताओं के साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रतियोगिता का आयोजन दिव्यांग स्कूली बच्चों द्वारा किया गया। जिलाधिकारी एस0 राजलिंगम ने खेल से हमें प्रतिस्पर्धा की भावना उत्पन्न होती है और प्रतिस्पर्धा भविष्य में आगे बढ़ने के लिए बहुत ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लोकप्रिय सरकार दिव्यांग स्कूली बच्चों के माध्यम से बच्चों को खेल से जोड़ने का काम कर रही है। बच्चों को मौसमी खेलों से जोड़ते हुए खेल को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस मौके पर जिलाधिकारी द्वारा स्थायी रूप से बाल क्रीड़ा की सदस्यता ग्रहण करने वाले अध्यक्ष प्राथमिक शिक्षक संघ अशोक कुमार सिंह को प्रमाण-पत्र दिया गया। इस मौके पर जिलाधिकारी एस0 राजलिंगम, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ0 गोरखनाथ पटेल, डीपीआरओ आर0के0 भारती, अध्यक्ष प्राथमिक शिक्षक अशोक कुमार सिंह, खण्ड शिक्षा अधिकारीगण, राष्ट्रपति पुरस्कार से पुरस्कृत रमाकान्त कुशवाहा, बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षक व खेल प्रशिक्षक, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के प्रषिक्षक सहित जिले के आठों विकास खण्डों के प्रतिभावान परिषदीय स्कूलों के बच्चों/बच्चियां सहित अन्य सम्बन्धितगण मौजूद रहें।

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