अजित दादा पवार का समर्थन एक सुनियोजित पटकथा थी? बन सकते हैं मंत्री

मुम्बई ।
अजित पवार को बुधवार की सुबह महाराष्ट्र विधानमंडल में अपनी चचेरी बहन सुप्रिया सुले के साथ गले मिलते देखा गया। इसके बाद दिन में उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की विधायक दल की बैठक में भी भाग लिया और विधायकों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी पार्टी नहीं छोड़ी। सूत्रों का कहना है कि उन्हें नियत समय में फिर से विधायक दल का नेता बनाया जाएगा।
आईएएनएस के अनुसार, उनमें अचानक इस तरह से आया बदलाव भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता एकनाथ खडसे को रास नहीं आया है। इसलिए उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर कथित रूप से अजित पवार के साथ गठबंधन करने के फैसले पर सवाल उठा दिया है। अब भाजपा के अंदर सवाल उठ रहा है कि क्या अजित पवार की दलबदल का मतलब सरकार बनाने में भाजपा को लालच देना था।

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