यूपी सरकार के मंत्रिपरिषद के द्वारा लिये गए निर्णय

मंत्रिपरिषद ने लिए महत्वपूर्ण निर्णय
लखनऊ 24 सितम्बर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आज यहां लोक भवन में सम्पन्न मंत्रिपरिषद की बैठ क में निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए:-

राज्य स्मार्ट सिटी मिशन की गाइडलाइन्स पर मेरठ, गाजियाबाद, अयोध्या, फिरोजाबाद, गोरखपुर, मथुरा-वृन्दावन एवं शाहजहांपुर को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किए जाने का निर्णय

मंत्रिपरिषद ने प्रदेश के 07 नगर निगमों (मेरठ, गाजियाबाद, अयोध्या, फिरोजाबाद, गोरखपुर, मथुरा-वृन्दावन एवं शाहजहांपुर) को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किए जाने के लिए राज्य स्मार्ट सिटी मिशन की गाइडलाइन्स पर अनुमोदन प्रदान कर दिया है।
वर्तमान में प्रदेश में 17 नगर निगम हैं। इनमें से 10 नगर निगमों यथा-लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, आगरा, अलीगढ़, बरेली, झांसी, सहारनपुर एवं मुरादाबाद में केन्द्र एवं राज्य सरकार के 50ः50 प्रतिशत (मैचिंग ग्राण्ट) धनराशि के अंशदान के माध्यम से स्मार्ट सिटी मिशन योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री द्वारा बजट 2019-20 पर चर्चा के समय मा0 सदन की कार्यवाही के दौरान शेष 07 नगर निगमों यथा-मेरठ, गाजियाबाद, अयोध्या, फिरोजाबाद, गोरखपुर, मथुरा-वृन्दावन एवं शाहजहांपुर को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किए जाने की घोषणा की गई थी।
पर्याप्त जलापूर्ति, सुनिश्चित विद्युत आपूर्ति, ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन सहित सफाई, सक्षम शहरी गतिशीलता और सार्वजनिक परिवहन, सक्षम आई0टी0 कनेक्टिविटी और डिजिटलाइजेशन, सुशासन, विशेषतः ई-गवर्नेन्स और नागरिक भागीदारी, स्वच्छ पर्यावरण, विशेषतः महिलाओं, बच्चों और वृद्ध नागरिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और शिक्षा इत्यादि राज्य स्मार्ट सिटी के प्रमुख अवसंरचना में सम्मिलित हैं। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2019-20 में राज्य स्मार्ट सिटी के विकास के लिए आय-व्ययक में 175 करोड़ रुपये की व्यवस्था कराई गई है। प्रत्येक राज्य स्मार्ट सिटी के लिए 50 करोड़ रुपये की धनराशि प्रतिवर्ष उपलब्ध कराई जानी है।
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खरीफ विपणन वर्ष 2019-20 में मूल्य समर्थन योजना के अन्तर्गत मक्का क्रय नीति का प्रस्ताव अनुमोदित

मंत्रिपरिषद ने खरीफ विपणन वर्ष 2019-20 में मूल्य समर्थन योजना के अन्तर्गत मक्का क्रय नीति के प्रस्ताव को अनुमोदन प्रदान कर दिया है। मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1760 रुपये प्रति कुन्तल निर्धारित है। मक्का का क्रय लक्ष्य 01 लाख मी0 टन रखा गया है। मक्का क्रय अवधि 15 अक्टूबर, 2019 से 15 जनवरी, 2020 तक होगी।
मक्का की खरीद प्रदेश के 22 जनपदों-अलीगढ़, फिरोजाबाद, कन्नौज, एटा, मैनपुरी, कासगंज, बदायूं, बहराइच, फर्रूखाबाद, इटावा, हरदोई, कानपुर नगर, जौनपुर, कानपुर देहात, उन्नाव, गोण्डा, बलिया, बुलन्दशहर, ललितपुर, श्रावस्ती, हापुड़ एवं देवरिया में की जाएगी। मक्का विक्रय से पूर्व कृषक का पंजीयन तथा आॅनलाइन मक्का क्रय की प्रक्रिया अनिवार्य की गई है। मक्का की उतराई, छनाई, सफाई इत्यादि के खर्च के मद में कृषकों को अधिकतम 20 रुपये प्रति कुन्तल की दर से भुगतान किया जाएगा।
किसानों से मक्का की खरीद जोतबही/खाता नं0 अंकित कम्प्यूटराइज खतौनी, फोटोयुक्त पहचान पत्र, यथासम्भव आधार कार्ड के आधार पर तथा चकबन्दी ग्रामों में चकबन्दी सम्बन्धी संगत भू-लेख के आधार पर मक्का क्रय किया जाएगा। किसानों को मक्का के मूल्य का भुगतान आॅनलाइन आर0टी0जी0एस0 के माध्यम से मक्का क्रय के 72 घण्टे के अन्दर उसके बैंक खाते में किया जाएगा। चेक के माध्यम से भुगतान को मान्यता नहीं दी जाएगी।
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नवस्थापित मेडिकल काॅलेज, जौनपुर को स्वशासी माध्यम से संचालन हेतु सोसाइटी गठित करने के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने जनपद जौनपुर में नवस्थापित मेडिकल काॅलेज को स्वशासी माध्यम से संचालन हेतु सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम-1860 के अन्तर्गत सोसाइटी गठित करने का निर्णय लिया है। साथ ही, स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के निमित्त सोसाइटी गठन के मेमोरेण्डम व बायलाॅज को अनुमोदित कर दिया है।
ज्ञातव्य है कि जनपद जौनपुर में मेडिकल काॅलेज के निर्माण कार्य हेतु शासनादेश दिनांक 12 जनवरी, 2015 द्वारा प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई। निर्माण कार्य प्रगति पर है। मेडिकल काॅलेज हेतु प्रधानाचार्य एवं शैक्षणिक संवर्ग के 47 पदों का सृजन किया जा चुका है तथा गैर-शैक्षणिक संवर्ग पदों के सृजन की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।
सोसाइटी के गठन से मेडिकल काॅलेज, जौनपुर के स्तर पर निर्णय की स्वायत्तता में वृद्धि होगी तथा स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप निर्णय लेने में लचीलापन आएगा। मेडिकल काॅलेज, जौनपुर को स्वायत्तता मिलने से शिक्षकों को नवस्थापित मेडिकल काॅलेज, जौनपुर में कार्य करने हेतु आकर्षित किया जा सकेगा।
वर्तमान में राजकीय मेडिकल काॅलेजों के चिकित्सा शिक्षकों एवं नर्सेज का चयन उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग तथा पैरा-मेडिकल स्टाफ का चयन उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से किया जाता है। इस चयन/नियुक्ति की प्रक्रिया में लगभग डेढ़ से 02 वर्ष का समय लगने के साथ ही समेकित भर्ती होने से छोटे शहरों में स्थित नए मेडिकल काॅलेजों में फैकल्टी द्वारा प्रायः योगदान नहीं किया जाता है, जिससे पठन-पाठन का कार्य प्रभावित होता है।
उल्लेखनीय है कि चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा केन्द्र सहायतित योजना (फेज-1) के अन्तर्गत नवस्थापित स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय जैसे-अयोध्या, बस्ती, बहराइच, फिरोजाबाद एवं शाहजहांपुर को सोसाइटी के माध्यम से सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा है। नवस्थापित मेडिकल काॅलेज, जौनपुर में फैकल्टी तथा नाॅन फैकल्टी के पदों पर भर्ती/नियुक्ति आदि की प्रक्रिया तीव्रगति से सम्पन्न किए जाने हेतु सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम-1860 के अधीन सोसाइटी के गठन का निर्णय लिया गया है।
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जनपद कुशीनगर में राजकीय मेडिकल काॅलेज की स्थापना हेतु राजस्व विभाग की भूमि को चिकित्सा शिक्षा विभाग को निःशुल्क हस्तान्तरित किये जाने के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने जनपद कुशीनगर में राजकीय मेडिकल काॅलेज की स्थापना हेतु जनपद के ग्राम-रामपुर तप्पा-चैराबड़गांव, परगना-सिधुआ जोवना, तहसील-पड़रौना स्थित खतौनी खाता संख्या-00361 के गाटा संख्या-478, रकबा 1.50 एकड़, गाटा संख्या-479 रकबा 0.51 एकड़, गाटा सं0-480 रकबा 1.87 एकड,़ गाटा सं0-481 रकबा 2.19 एकड़, गाटा सं0-556 रकबा 3.26 एकड़, गाटा सं0-557 रकबा 1.70 एकड़, गाटा सं0-558 रकबा 1.50 एकड़, गाटा सं0-567 रकबा 1.38 एकड़ कुल 08 गाटा रकबा 13.91 एकड़ राजस्व विभाग की भूमि को चिकित्सा शिक्षा विभाग को निःशुल्क हस्तान्तरित किये जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है।
केन्द्र सहायतित योजना पर जिला चिकित्सालय को उच्चीकृतकर राजकीय मेडिकल काॅलेज बनाया जाना है।
प्रत्येक मेडिकल काॅलेज की लागत 325 करोड़ रुपये प्रस्तावित है। केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा उक्त धनराशि 60ः40 के अनुपात में वहन की जाएगी।
वर्तमान में उत्तर प्रदेश की जनसंख्या 22 करोड़ है तथा यहां पर लगभग 59000 एलोपैथिक डाॅक्टर्स पंजीकृत हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार डाॅक्टर तथा जनसंख्या के मध्य अनुपात 1ः1000 होना चाहिए, जबकि प्रदेश में यह अनुपात 1ः3700 है जो मानक से बहुत कम है। ऐसी स्थिति में प्रदेश में मेडिकल काॅलेज की स्थापना से चिकित्सकों की कमी के साथ ही साथ चिकित्सा शिक्षकगण की कमी भी दूर हो सकेगी तथा टर्शरी केयर में सुधार होगा। प्रदेश में जिला चिकित्सालयों को उच्चीकृत कर मेडिकल काॅलेज स्थापित किये जाने हेतु असेवित जिलों का चयन किया गया है।
केन्द्र सहायतित योजना (फेज-3) के अन्तर्गत जिला चिकित्सालय, कुशीनगर को उच्चीकृत कर राजकीय मेडिकल काॅलेज की स्थापना हेतु जिला चिकित्सालय से 10 किलोमीटर परिधि के अन्तर्गत ग्राम रामपुर तप्पा-चैराबड़गांव, परगना-सिधुआ जोवना, तहसील-पड़रौना में राजस्व विभाग की 13.91 एकड़ भूमि राजकीय मेडिकल काॅलेज हेतु चिन्हित की गयी है।
जनपद कुशीनगर में मेडिकल काॅलेज की स्थापना से न केवल कुशीनगर के निवासियों को चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध होगी अपितु निकटवर्ती जनपदों के निवासियों को भी उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा का लाभ होगा। इससे बी0आर0डी0 मेडिकल काॅलेज, गोरखपुर पर दबाव कम होगा।
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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की 150वीं जयन्ती के अवसर पर 02 अक्टूबर, 2019 से 31 दिसम्बर, 2019 तक खादी वस्त्रों की फुटकर बिक्री पर 05 प्रतिशत की विशेष छूट दिए जाने का निर्णय

मंत्रिपरिषद ने प्रदेश में खादी कार्यक्रम को बढ़ावा देने तथा अधिक से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दृष्टि से चालू वित्तीय वर्ष 2019-20 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की 150वीं जयन्ती के अवसर पर 02 अक्टूबर, 2019 से 31 दिसम्बर, 2019 तक खादी वस्त्रों की फुटकर बिक्री पर 05 प्रतिशत की विशेष छूट दिए जाने का निर्णय लिया है।
विशेष छूट के दावों का भुगतान वित्तीय वर्ष 2019-20 में पं0 दीन दयाल उपाध्याय खादी विपणन विकास सहायता के अन्तर्गत स्वीकृत 10 करोड़ रुपये की धनराशि से किया जाएगा। इसके लिए अलग से बजट व्यवस्था की आवश्यकता नहीं होगी। विशेष छूट से राज्य सरकार के ऊपर कोई अतिरिक्त व्ययभार नहीं पड़ेगा। यह योजना राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की 150वीं जयन्ती के उपलक्ष्य में मात्र चालू वित्तीय वर्ष के लिए ही लागू की गई है।
प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में खादी की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस कार्य में परम्परागत रूप से लगे धुनकर, कत्तिन, बुनकर, रंगरेज, दर्जी आदि कमजोर वर्ग के व्यक्तियों, जिनसे पास आय के अन्य साधन नहीं हैं, को रोजगार मिलता है। प्रदेश में खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड/आयोग से वित्तपोषित मान्यता प्राप्त खादी संस्थाएं खादी के उत्पादन व बिक्री के कार्य में लगी हुई हैं। प्रदेश में खादी उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विगत वर्षाें से संचालित बिक्री पर छूट आधारित योजना के स्थान पर उत्पादन पर छूट आधारित पं0 दीन दयाल उपाध्याय खादी विपणन विकास सहायता दिनांक 01 अक्टूबर, 2017 से प्रारम्भ की गयी है, जिसके अन्तर्गत खादी संस्थाओं को उत्पादन लागत पर 15 प्रतिशत सहायता अनुमन्य है। खादी संस्थाओं द्वारा स्वयं के स्रोत से 20 प्रतिशत छूट ग्राहकों को दिए जाने पर और 05 प्रतिशत की विशेष छूट फुटकर बिक्री पर दिए जाने से समेकित रूप से 25 प्रतिशत तक की छूट आम जनता को प्राप्त होगी।
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बेसिक शिक्षा विभाग के अन्तर्गत महानिदेशक, स्कूल शिक्षा (डी0जी0एस0ई0) का पद सृजित करते हुए अधिकार एवं कर्तव्य निर्धारित किए जाने सम्बन्धी प्रस्ताव अनुमोदित

मंत्रिपरिषद ने बेसिक शिक्षा विभाग के अन्तर्गत समस्त निदेशालयों व उनके अधीन कार्यरत अधिकारियों/कर्मचारियों पर कार्यकारी, प्रशासनिक एवं वित्तीय नियंत्रण (जो शासन द्वारा समय-समय पर प्रतिनिधानित किये जाएंगे) तथा बेसिक शिक्षा विभाग में संचालित महत्वपूर्ण योजनाओं के त्वरित गति से क्रियान्वयन, प्राथमिक शिक्षा के स्तर में गुणात्मक सुधार एवं शिक्षकों की दक्षता हेतु महानिदेशक, स्कूल शिक्षा (डी0जी0एस0ई0) का पद सृजित करते हुए इस पद पर भारतीय प्रशासनिक सेवा के सचिव स्तर से अनिम्न/राज्य परियोजना निदेशक, समग्र शिक्षा अभियान के समकक्ष स्तर के अधिकारी को तैनात किये जाने सम्बन्धित प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है।
महानिदेशक, स्कूल शिक्षा (डी0जी0एस0ई0) के वेतनमान के सापेक्ष अनुमन्य वेतन/भत्तों हेतु आय-व्ययक की व्यवस्था बेसिक शिक्षा विभाग के मानक मदों के अन्तर्गत की जाएगी। मंत्रिपरिषद ने भविष्य में स्कूल शिक्षा (डी0जी0एस0ई0) सम्बन्धी पद सृजन, अधिकार एवं कर्तव्य आदि के निर्णय के परिप्रेक्ष्य में किसी प्रकार के तकनीकी संशोधन हेतु मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किये जाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी प्रदान की है।
इस निर्णय के अनुसार बेसिक शिक्षा विभाग के प्रशासनिक नियंत्रणाधीन 05 निदेशालयों क्रमशः शिक्षा निदेशक (बेसिक), निदेशक साक्षरता, वैकल्पिक शिक्षा, उर्दू एवं प्राच्य भाषाएं, राज्य परियोजना निदेशक समग्र शिक्षा अभियान, निदेशक मध्यान्ह् भोजन प्राधिकरण एवं निदेशक राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद सहित सचिव बेसिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज एवं परीक्षा नियामक प्राधिकारी, प्रयागराज पर प्रभावी प्रशासनिक नियंत्रण तथा विभाग में संचालित महत्वपूर्ण योजनाओं को त्वरित गति से संचालन एवं प्राथमिक शिक्षा के स्तर में गुणात्मक सुधार महानिदेशक, स्कूल शिक्षा (डी0जी0एस0ई0), जो भारतीय प्रशासनिक सेवा के विशेष सचिव के स्तर से अनिम्न/राज्य परियोजना निदेशक, समग्र शिक्षा अभियान के समकक्ष स्तर का अधिकारी होगा, के द्वारा किया जाएगा।
महानिदेशक, स्कूल शिक्षा (डी0जी0एस0ई0) इन सभी का प्रशासकीय नियंत्रक होगा तथा इन सभी के मध्य सेतु का कार्य करते हुए समस्त निदेशालयों पर अपना प्रभावी प्रशासकीय नियंत्रण रखते हुए इन सभी के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित करेंगे तथा शासन द्वारा वित्त विभाग की सहमति से वित्तीय नियंत्रण सम्बन्धी, जो कार्य समय-समय पर सौंपे जाएंगे, उनका भी कार्यान्वयन किया जाएगा।
महानिदेशक, स्कूल शिक्षा (डी0जी0एस0ई0) इन सभी के स्तर पर संचालित विभिन्न विभागीय योजनाओं/कार्यों की नियमित रूप से समीक्षा करेंगे तथा यथावश्यक नीतियों के क्रियान्वयन का कार्य करते हुए इन सभी के कार्यों का प्रभावी पर्यवेक्षण करेंगे। साथ ही, इन समस्त निदेशालयों के नीति-निर्माण हेतु समेकित डाटा विश्लेषण का कार्य भी करेंगे।
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जनपद बस्ती के मुण्डेरवा में स्थित चीनी मिल में 5000 टी0सी0डी0 (7500 टी0सी0डी0 क्षमता तक विस्तारीकरण योग्य) क्षमता की नई चीनी मिल व 27 मेगावाट का कोजन प्लान्ट एवं रिफाइनरी-सल्फरलेस शुगर प्लान्ट की स्थापना के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम लि. की सहायक कम्पनी उ0प्र0 राज्य चीनी एवं गन्ना विकास निगम की जनपद बस्ती के मुण्डेरवा में स्थित चीनी मिल में 5000 टी0सी0डी0 (7500 टी0सी0डी0 क्षमता तक विस्तारीकरण योग्य) क्षमता की नई चीनी मिल व 27 मेगावाट का कोजन प्लान्ट एवं रिफाइनरी-सल्फरलेस शुगर प्लान्ट की स्थापना हेतु पुनरीक्षित लागत 43,887.70 लाख रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है।
उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम लि. की सहायक कम्पनी उ0प्र0 राज्य चीनी एवं गन्ना विकास निगम लि0 की जिला बस्ती में मुण्डेरवा में स्थित चीनी मिल में 3500 टी0सी0डी0 (5000 टी0सी0डी0 तक क्षमता विस्तारीकरण योग्य) की चीनी मिल एवं 18 मेगावाॅट कोजन लगाये जाने हेतु पी0आई0बी0 द्वारा आंकलित लागत 31,408.91 लाख रुपये की संस्तुति पर दिनांक 09 जनवरी, 2019 को मंत्रिपरिषद द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया था। मंत्रिपरिषद के अनुमोदन के क्रम में शासनादेश संख्या 1684/46-2-17-40/17 दिनांक 11 जनवरी, 2018 निर्गत किया गया था। उक्त परियोजना की स्थापना हेतु मै0 इस्जैक हैवी इंजीनियरिंग लि0, नोएडा के पक्ष में दिनांक 16 मार्च, 2018 को लेटर आॅफ इन्टेन्ट (एल0ओ0आई0) निर्गत कर अनुबन्ध निष्पादित किया गया। चीनी मिल व कोजन प्लान्ट की स्थापना का कार्य करते हुए पेराई 2018-19 में चीनी मिल का ट्रायल संचालन माह अप्रैल, 2019 में किया गया।
प्रश्नगत परियोजना की स्थापना की अवधि में चीनी मिल में सल्फरलेस शुगर बनाये जाने की घोषणा मुख्यमंत्री जी द्वारा की गयी। जिला बस्ती के मुण्डेरवा में स्थित चीनी मिल में 5000 टी0सी0डी0 (7500 टी0सी0डी0 क्षमता तक विस्तारीकरण योग्य) क्षमता की नयी चीनी मिल व 27 मेगावाट का कोजन प्लान्ट एवं रिफाइनरी सल्फरलेस शुगर प्लान्ट की स्थापना हेतु पी0आई0बी0 द्वारा पुनरीक्षित लागत 43,887.70 लाख रुपये की लागत आंकलित की गयी है। इस परियोजना की स्थापना पर होने वाला व्ययभार शतप्रतिशत ऋण के रूप में राज्य सरकार द्वारा प्रदान किया जाएगा।
परियोजना की स्थापना से वित्तीय लाभ होगा एवं सल्फरलेस चीनी के उत्पादन से वैश्विक बाजार में चीनी का निर्यात सम्भव हो सकेगा। चीनी मिल क्षेत्र के किसानों की समृद्धि, क्षेत्र का सर्वांगीण विकास, प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार का सृजन होना एवं प्रदेश के आर्थिक विकास को गति देना। उक्त परियोजना की स्थापना से लगभग 30,000 किसानों को लाभ होगा तथा लगभग 8500 प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रोजगार का सृजन होगा।
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जनपद गोरखपुर के पिपराइच में स्थित चीनी मिल में 5000 टी0सी0डी0 (7500 टी0सी0डी0 क्षमता तक विस्तारीकरण योग्य) क्षमता की नई चीनी मिल व 27 मेगावाट का कोजन प्लान्ट, रिफाइनरी-सल्फरलेस शुगर प्लान्ट एवं 120 के0एल0पी0डी0 आसवनी प्लान्ट (गन्ने के जूस व शीरे पर आधारित) की स्थापना के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम लि. की सहायक कम्पनी उ0प्र0 राज्य चीनी एवं गन्ना विकास निगम की जनपद गोरखपुर के पिपराइच मंे स्थित चीनी मिल में 5000 टी0सी0डी0 (7500 टी0सी0डी0 क्षमता तक विस्तारीकरण योग्य) क्षमता की नई चीनी मिल व 27 मेगावाट का कोजन प्लान्ट, रिफाइनरी-सल्फरलेस शुगर प्लान्ट एवं 120 के0एल0पी0डी0 आसवनी प्लान्ट (गन्ने के जूस व शीरे पर आधारित) की स्थापना हेतु पुनरीक्षित लागत 65,796.96 लाख रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है।
उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम लि. की सहायक कम्पनी उ0प्र0 राज्य चीनी एवं गन्ना विकास निगम लि0 की पिपराइच चीनी मिल की अविवादित भूमि पर 3500 टी0सी0डी0 (5000 टी0सी0डी0 तक क्षमता विस्तारीकरण योग्य) की चीनी मिल एवं 18 मेगावाॅट कोजन एवं 60 के0एल0पी0डी0 की आसवनी लगाये जाने हेतु पी0आई0बी0 द्वारा आंकलित लागत 40089.67 लाख रुपये था। मंत्रिपरिषद के अनुमोदन के क्रम में शासनादेश संख्या 1685/46-2-17-40/17 दिनांक 11 जनवरी, 2018 निर्गत किया गया था। उक्त परियोजना की स्थापना हेतु मै0 इस्जैक हैवी इंजीनियरिंग लि0, नोएडा के पक्ष में दिनांक 16 मार्च, 2018 को लेटर आॅफ इन्टेन्ट (एल0ओ0आई0) निर्गत कर अनुबन्ध निष्पादित किया गया। चीनी मिल व कोजन प्लान्ट की स्थापना का कार्य करते हुए पेराई 2018-19 में चीनी मिल का ट्रायल संचालन माह अप्रैल, 2019 में किया गया।
प्रश्नगत परियोजना की स्थापना की अवधि में चीनी मिल में सल्फरलेस शुगर बनाये जाने की घोषणा मुख्यमंत्री जी द्वारा की गयी। जिला गोरखपुर में स्थित चीनी मिल में 5000 टी0सी0डी0 (7500 टी0सी0डी0 क्षमता तक विस्तारीकरण योग्य) क्षमता की नयी चीनी मिल व 27 मेगावाट का कोजन प्लान्ट, रिफाइनरी-सल्फरलेस शुगर प्लान्ट एवं 120 के0एल0पी0डी0 आसवनी प्लान्ट (गन्ने के जूस व शीरे पर आधारित) की स्थापना हेतु पी0आई0बी0 द्वारा पुनरीक्षित लागत 65,796.96 लाख रुपये की लागत आंकलित की गयी है। इस परियोजना की स्थापना पर होने वाला व्ययभार शतप्रतिशत ऋण के रूप में राज्य सरकार द्वारा प्रदान किया जाएगा।
परियोजना की स्थापना से वित्तीय लाभ होगा एवं सल्फरलेस चीनी के उत्पादन से वैश्विक बाजार में चीनी का निर्यात सम्भव हो सकेगा। चीनी मिल क्षेत्र के किसानों की समृद्धि, क्षेत्र का सर्वांगीण विकास, प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार का सृजन होना एवं प्रदेश के आर्थिक विकास को गति देना। उक्त परियोजना की स्थापना से लगभग 30,000 किसानों को लाभ होगा तथा लगभग 8500 प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रोजगार का सृजन होगा।
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विधान सभा क्षेत्र बदलापुर, जनपद-जौनपुर में बस स्टेशन का निर्माण कराये जाने हेतु भूमि उपलब्ध कराए जाने के सम्बन्ध में

मुख्यमंत्री जी द्वारा विधान सभा क्षेत्र बदलापुर, जनपद-जौनपुर में बस स्टेशन निर्माण कराये जाने हेतु भूमि उपलब्ध कराये जाने के सम्बन्ध में गत वर्ष की गयी घोषणा के अनुक्रम में जिलाधिकारी, जौनपुर के अद्यतन पत्र दिनांक 31.08.2019 द्वारा अवगत कराया गया कि राजस्व अनुभाग-1 के शासनादेश दिनंाक 03.06.2016 में निहित व्यवस्थानुसार, परिवहन निगम एक वाणिज्यिक निगम होने के दृष्टिगत चिन्हित भूमि, ग्राम मुरादपुर कोटिला तहसील बदलापुर, जनपद जौनपुर स्थित गाटा संख्या-1370घ मि/0.550, 1371घ मि/0.259 कुल 2 गाटा 0.809हे0 ग्राम सभा के बंजर खाते की भूमि को हस्तान्तरित करने के लिए देयता के सम्बन्ध में 12,62,04,000,00 रुपये (मु0 बारह करोड़ बासठ लाख चार हजार मात्र) एक मुश्त जमा करने तथा वार्षिक किराया 3,015 रु0 (तीन हजार पन्द्रह रुपये मात्र) प्रतिवर्ष सम्बन्धित लेखा शीर्षक में जमा करने की विभागीय सहमति उपलब्ध करायी जाए।
परिवहन निगम की वित्तीय स्थिति एवं यात्रियों को इस बस स्टेशन के निर्माण से होने वाली सुविधा एवं व्यापक जनहित को दृष्टिगत रखते हुए मंत्रिपरिषद द्वारा इस भूमि को परिवहन विभाग के पक्ष में निःशुल्क पुनर्ग्रहण किये जाने के प्रस्ताव को अनुमोदित किया गया है। इस अनुमोदन से विधान सभा क्षेत्र बदलापुर, जनपद-जौनपुर में बस स्टेशन का निर्माण शीघ्र प्रारम्भ कराया जा सकेगा।
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अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय परिसर, किंग जाॅर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ ऐट बलरामपुर की स्थापना के अन्तर्गत 300 बेडेड चिकित्सालय के निर्माण कार्याें में उच्च विशिष्टियों के प्रयोग से सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने ‘अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय परिसर, किंग जाॅर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ ऐट बलरामपुर’ की स्थापना के अन्तर्गत प्रथम चरण में 300 बेडेड चिकित्सालय के निर्माण कार्य में प्राविधानित उच्च विशिष्टियों-मेटल फाल्स शिलिंग, वी0आर0वी0/वी0आर0एफ0 तथा विट्रीफाइड वाल टाइल्स के प्रयोग के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है।
जनपद बलरामपुर तथा नेपाल से सटे हुए तराई क्षेत्र के अन्य पिछड़े जनपदों की जनता को समुचित उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराये जाने के साथ ही साथ पर्याप्त प्रशिक्षित चिकित्सक, चिकित्सा शिक्षक एवं नर्स/पैरामेडिकल स्टाफ आदि मानव संसाधन उपलब्ध कराये जाने के उद्देश्य से जनपद बलरामपुर में ‘अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय परिसर, किंग जाॅर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ ऐट बलरामपुर’ के नाम से किंग जाॅर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय, उ0प्र0 लखनऊ (के0जी0एम0यू0) के सैटेलाइट कैम्पस की स्थापना का निर्णय लिया गया।
के0जी0एम0यू0, लखनऊ के सैटेलाइट कैम्पस के स्थापना के प्रथम चरण में 300 बेडेड चिकित्सालय के निर्माण हेतु कुलसचिव, के0जी0एम0यू0 के पत्र दिनांक 29 जुलाई, 2019 द्वारा प्रारम्भिक आगणन 10756.97 लाख रुपये का प्रस्ताव उपलब्ध कराया गया, जिसमें ‘बेसमेन्ट$भूतल$4 तल’ एवं कतिपय उच्च विशिष्टियों का प्राविधान है। व्यय वित्त समिति की बैठक दिनांक 30 अगस्त, 2019 में प्रश्नगत प्रायोजना हेतु प्रस्तावित आगणन 10756.97 लाख रुपये के सापेक्ष सम्यक विचारोपरान्त धनराशि ‘8512.00 लाख रुपये$जी0एस0टी0 नियमानुसार देय’ की लागत मूल्यांकित की गयी है।

मा0 उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मा0 मुख्य न्यायाधीश/न्यायमूर्तिगण एवं उनके पति/पत्नी तथा परिवार के आश्रित सदस्यों को सेवारत मा0 न्यायमूर्तिगण के समान प्रदान की जा रही चिकित्सा सुविधाओं के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने मा0 उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में मा0 उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मा0 मुख्य न्यायाधीश/न्यायमूर्तिगण एवं उनके पति/पत्नी तथा परिवार के आश्रित सदस्यों को सेवारत मा0 न्यायमूर्तिगण के समान ही समस्त चिकित्सा सुविधाएं प्रदान किए जाने के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है।
साथ ही, वर्तमान में प्रदेश में सेवारत मा0 न्यायमूर्तिगण के समान ही सेवानिवृत्त मा0 न्यायमूर्तिगण को जिला/राज्य के बाहर के चिकित्सालयांे में उच्चतर/विशिष्ट उपचार हेतु सन्दर्भित किए जाने की स्थिति में राज्य सरकार का पूर्वानुमोदन अपेक्षित है। इसलिए मा0 न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में मंत्रिपरिषद ने निजी चिकित्सालयों में कराए गए चिकित्सा उपचार हेतु मा0 उच्च न्यायालय, इलाहाबाद का पूर्वानुमोदन प्राप्त किए जाने के प्राविधान को मंजूरी प्रदान की गई है।
इसके अलावा, वर्तमान में प्रदेश में प्रभावी शासनादेशानुसार मा0 उच्च न्यायालय के सेवारत/सेवानिवृत्त मा0 न्यायमूर्तिगण के 10 लाख रुपये तक के चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावों को स्वीकृत करने हेतु मा0 मुख्य न्यायाधीश, उच्च न्यायालय, इलाहाबाद को प्राधिकृत किया गया है। इसलिए मा0 न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में मंत्रिपरिषद ने मा0 उच्च न्यायालय, इलाहाबाद के न्यायमूर्तिगण के चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावों को स्वीकृत करने हेतु मा0 उच्च न्यायालय के महानिबन्धक को प्राधिकृत किए जाने का निर्णय लिया है।
साथ ही, वर्तमान में प्रदेश में प्रचलित व्यवस्थानुसार सेवारत मा0 न्यायमूर्तिगण के समान ही सेवानिवृत्त मा0 न्यायमूर्तिगण को भी अन्य राज्यों में कराए गए चिकित्सा उपचार की प्रतिपूर्ति की जाती है। इसलिए मा0 उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में मंत्रिपरिषद ने इस प्राविधान को मंजूरी प्रदान की है। इसके अतिरिक्त, मा0 उच्चतम न्यायालय द्वारा कैशलेस सुविधा लागू किए जाने हेतु अपने निर्णय दिनांक 25 जुलाई, 2019 से 06 माह का समय दिया है। अतः इस निर्देश के सम्बन्ध में अन्य राज्यों द्वारा की गई व्यवस्था से सम्बन्धित शासनादेश/अधिसूचना आदि प्राप्त कर परीक्षणोपरान्त आवश्यक कार्यवाही किए जाने का निर्णय लिया गया है।

उत्तर प्रदेश मंत्री (वेतन, भत्ता और प्रकीर्ण उपबन्ध) अधिनियम-1981 (यथा संशोधित)’ में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी

मंत्रिपरिषद ने ‘उत्तर प्रदेश मंत्री (वेतन, भत्ता और प्रकीर्ण उपबन्ध) अधिनियम-1981 (यथा संशोधित)’ में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है।
ज्ञातव्य है कि वर्ष 1981 में प्रख्यापित इस अधिनियम की धारा-3 की उपधारा (3) को प्रवृत्त हुए 35 वर्ष से अधिक का समय हो गया है। उल्लेखनीय है कि आयकर कानून की परिधि में आने वाले समस्त नागरिकों द्वारा आयकर का भुगतान किया जाता है। इसलिए मंत्रिगण द्वारा देय आयकर का वहन राज्य सरकार द्वारा किए जाने से सम्बन्धित धारा-3 की उपधारा (3) को बनाए रखने का औचित्य प्रतीत न होने पर मंत्रिपरिषद ने इसे विलुप्त किए जाने का निर्णय लिया है।
चूंकि वर्तमान में राज्य विधान मण्डल सत्र में नहीं है। इसलिए अधिनियम में संशोधन के निर्णय को लागू किए जाने के लिए अध्यादेश प्रख्यापित किए जाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी प्रदान की गई है।

उ0प्र0 दुकान और वाणिज्य अधिष्ठान विधेयक-2019 का प्रारूप अनुमोदित

मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश दुकान और वाणिज्य अधिष्ठान अधिनियम-1962 की धारा-4ग में संशोधन हेतु उत्तर प्रदेश दुकान और वाणिज्य अधिष्ठान विधेयक-2019 के प्रारूप को अनुमोदित कर दिया है। प्रस्तावित संशोधन द्वारा अधिनियम के अधीन स्वीकृत रजिस्ट्रीकरण प्रमाण-पत्र उस अवधि के लिए विधिमान्य होगा, जिस अवधि तक के लिए दुकान और वाणिज्य अधिष्ठान विद्यमान हो, का निर्णय लिया गया है। इस प्रकार दुकान एवं वाणिज्य अधिष्ठान के नवीनीकरण की आवश्यकता नहीं होगी।
दुकान एवं वाणिज्य अधिष्ठान अधिनियम के अन्तर्गत पंजीकृत दुकान एवं वाणिज्यिक अधिष्ठानों का बार-बार नवीनीकरण नहीं कराना पड़ेगा, जिससे व्यापार (बिजनेस) करना सुगम होगा। साथ ही, लाल फीताशाही से मुक्ति मिलेगी तथा पारदर्शिता आएगी।
दुकान एवं वाणिज्य अधिष्ठान अधिनियम के अन्तर्गत एक बार पंजीकृत कराए जाने के उपरान्त दुकानदार/नियोजक नवीनीकरण की चिन्ता से मुक्त हो जाएंगे तथा यह कदम ‘ईज़ आॅफ डूइंग बिजनेस’ के लिए उपयोगी साबित होगा। ‘ईज़ आॅफ डूइंग बिजनेस’ का उद्देश्य स्वरोजगार को बढ़ावा देना है। नवीनीकरण समाप्त किया जाना ‘ईज़ आॅफ डूइंग बिजनेस’ के अन्तर्गत ही किया जा रहा है। अतः इस कदम से स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे। श्रम कानूनों का अनुपालन सुनिश्चित कराया जा सकेगा।

उ0प्र0 आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई, इटावा के संकायी सदस्यों, गैर संकायी अधिकारियों एवं कर्मचारियों तथा रेजीडेण्ट डाॅक्टर्स को 7वें वेतन आयोग की संस्तुतियों के क्रम में स0जी0पी0जी0आई0, लखनऊ के सादृश्य भत्ते प्रदान किए जाने का निर्णय

मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई, इटावा के संकायी सदस्यों, गैर संकायी अधिकारियों एवं कर्मचारियों तथा सीनियर एवं जूनियर रेजीडेण्ट डाॅक्टर्स को 7वें वेतन आयोग की संस्तुतियों के क्रम में संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एस0जी0पी0जी0आई0), लखनऊ के सादृश्य दिनांक 01 जुलाई, 2017 से भत्ते उन्हीं दरों, शर्तों एवं प्रतिबन्धों के अनुसार प्रदान किए जाने का निर्णय लिया है, जिस प्रकार एस0जी0पी0जी0आई0, लखनऊ में अनुमन्य किया गया है। यह सुविधा अनुमन्य किए जाने से राज्य सरकार पर लगभग 1514.40 लाख रुपये का अतिरिक्त वार्षिक व्ययभार आएगा।
उ0प्र0 आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई, इटावा में संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ की भांति गम्भीर रोगियों के उपचार हेतु टर्शियरी चिकित्सा सुविधा प्रदान की जा रही है तथा चिकित्सा शिक्षा के अन्तर्गत सुपर स्पेशियलिटी पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
शासनादेश दिनांक 15 मार्च, 2013 द्वारा एस0जी0पी0जी0आई0, लखनऊ के संकाय सदस्यों को अनुमन्य समस्त भत्ते उ0प्र0 आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई, इटावा के संकाय सदस्यों को अनुमन्य किए जाने के आदेश निर्गत किए गए। शासनादेश दिनांक 16 मई, 2016 द्वारा संस्थान के गैर शैक्षणिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों को एस0जी0पी0जी0आई0 के गैर शैक्षणिक कार्मिकों के समान वेतन, भत्ते व अन्य सुविधाएं अनुमन्य की गई हैं।
7वें वेतन आयोग की संस्तुतियों के क्रम में शासनादेश दिनांक 06 दिसम्बर, 2017 द्वारा विश्वविद्यालय के गैर शैक्षणिक कार्मिकों को एस0जी0पी0जी0आई0, लखनऊ के समतुल्य वेतन दिया जा रहा है। शासनादेश दिनांक 31 मई, 2018 द्वारा विश्वविद्यालय के संकाय सदस्यों/रेजीडेण्ट डाॅक्टरों को एस0जी0पी0जी0आई0, लखनऊ के संकाय सदस्यों/रेजीडेण्ट डाॅक्टरों के समान वेतन अनुमन्य किए गए हैं।

राजीव कुमार यादव, उप निदेशक (सेवायोजन) के विरुद्ध संस्थित अनुशासनिक कार्यवाही के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासनिक एवं अपील) नियमावली-1999 के नियम-7 के तहत संस्थित अनुशासनिक जांच में श्री राजीव कुमार यादव, उप निदेशक (सेवायोजन) के विरुद्ध सिद्ध पाए गए आरोपों के दृष्टिगत उन्हें उनके मूल पद क्षेत्रीय सेवायोजन अधिकारी के निम्नतम प्रक्रम पर प्रत्यावर्तित किए जाने के प्रस्ताव को अनुमति प्रदान कर दी है।
ज्ञातव्य है कि श्री राजीव कुमार यादव, उप निदेशक, सेवायोजन, उ0प्र0 को अपनी फेसबुक आई0डी0 पर सरकार एवं सरकार की नीतियों की आलोचना करने से सम्बन्धित पोस्ट्स को शेयर करने के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया। यह कृत्य उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली-1956 के नियम-7 का उल्लंघन है, जिसके लिए दोषी पाए जाने के आधार पर श्री राजीव कुमार यादव के विरुद्ध आदेश दिनांक 02 जुलाई, 2018 द्वारा उ0प्र0 सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली-1999 के तहत अनुशासनिक कार्यवाही संस्थित कर विशेष सचिव, श्रम को आरोपों की जांच हेतु जांच अधिकारी नामित किया गया था। आरोपों की गम्भीरता के दृष्टिगत आदेश दिनांक 05 जुलाई, 2018 द्वारा उन्हें निलम्बित कर दिया गया।
जांच अधिकारी द्वारा नियमानुसार जांच कार्यवाही पूर्ण कर जांच आख्या उपलब्ध करायी गयी, जिसमें अपचारी अधिकारी के विरुद्ध अधिरोपित दोनों आरोप प्रमाणित पाए गए। आरोपों के प्रमाणित पाए जाने के आधार पर नियमावली के नियम-9(4) में निहित व्यवस्थानुसार अपचारी अधिकारी को जांच आख्या की प्रति उपलब्ध कराते हुए अभ्यावेदन प्रस्तुत किए जाने का अवसर प्रदान किया गया। अपचारी अधिकारी द्वारा प्रस्तुत अभ्यावेदन एवं जांच आख्या पर सम्यक विचार करते हुए अपचारी अधिकारी को उक्त कृत्य के लिए दोषी पाया गया। फलस्वरूप नियमावली के नियम-3 में निहित दीर्घ शास्ति के तहत उन्हें उनके मूल पद क्षेत्रीय सेवायोजन अधिकारी के निम्नतम् प्रक्रम पर प्रत्यावर्तित किए जाने की शास्ति का विनिश्चित किया गया। इस प्रकार विनिश्चित शास्ति पर लोक सेवा आयोग, उ0प्र0 सहमत नहीं हुए तथा ‘प्रस्तावित दण्ड को अनानुपातिक बताते हुए अपचारी अधिकारी की 02 वेतनवृद्धि अस्थायी प्रभाव से 02 वर्ष के लिए रोका जाना पर्याप्त होगा’ का परामर्श दिया गया।
लोक सेवा आयोग द्वारा दिए गए उक्त परामर्श पर शासन द्वारा विचार कर पुनः पूर्व विनिश्चित शास्ति पर सहमति हेतु लोक सेवा आयोग को प्रकरण सन्दर्भित किया गया, जिस पर लोक सेवा आयोग द्वारा सम्यक्रूपेण विचारोपरान्त अपने पूर्व मत पर दृढ़ हैं, का परामर्श दिया गया। लोक सेवा आयोग के इस अभिमत का शासन स्तर पर हुए पुनः परीक्षणोपरान्त, उत्तर प्रदेश सचिवालय अनुदेश-1982 के नियम-51(7) में दी गई व्यवस्था के तहत अपचारी अधिकारी के विरुद्ध मंत्रिपरिषद द्वारा विनिश्चित शास्ति का निर्णय लिया गया है।

नोएडा इण्टरनेशनल ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट, जेवर के निर्माण के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने नोएडा इण्टरनेशनल ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट, जेवर के निर्माण के सम्बन्ध में च्तवरमबज डवदपजवतपदह ंदक प्उचसमउमदजंजपवद ब्वउउपजजमम ;च्डप्ब्द्ध दिनांक 19 अगस्त, 2019 एवं दिनांक 12 सितम्बर, 2019 की बैठक द्वारा की गई संस्तुतियों पर अनुमोदन प्रदान कर दिया है। साथ ही, पूर्व में अनुमोदित ठपक क्वबनउमदज ;त्फि बनउ त्च्द्धि एवं क्तंजि ब्वदबमेेपवद ।हतममउमदज क्वबनउमदज को संशोधित कर बिड प्रक्रिया में आगे की कार्यवाही किए जाने की भी अनुमति प्रदान कर दी है। मंत्रिपरिषद द्वारा परियोजना के सम्बन्ध में समय-समय पर यथा आवश्यकतानुसार निर्णय लेने के लिए मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया गया है।

उ0प्र0 विकलांग कल्याण विभाग राजपत्रित अधिकारी सेवा (द्वितीय संशोधन) नियमावली-2019 के प्रख्यापन का निर्णय

मंत्रिपरिषद ने उ0प्र0 विकलांग कल्याण विभाग राजपत्रित अधिकारी सेवा (द्वितीय संशोधन) नियमावली-2019 के प्रख्यापन का निर्णय लिया है।
दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के राजपत्रित अधिकारियों की सेवाओं को संचालित करने के उद्देश्य से ‘उ0प्र0 विकलांग कल्याण विभाग राजपत्रित अधिकारी सेवा नियमावली-2002’ प्रख्यापित की गई है। अग्रेतर यथावश्यक इस नियमावली के प्रथम संशोधन के रूप में ‘उ0प्र0 विकलांग कल्याण विभाग राजपत्रित सेवा (प्रथम संशोधन) नियमावली-2008’ भी प्रख्यापित की गई है।
इसके बाद से कतिपय नए पदों के सृजन, इन पदों की संख्या/वेतनमानों में हुए संशोधनों, कतिपय कार्मिक नियमों में हुए संशोधन एवं विभाग के नाम में किए गए संशोधन आदि को नियमावली में समाहित करने के उद्देश्य से ‘उ0प्र0 विकलांग कल्याण विभाग राजपत्रित अधिकारी सेवा (द्वितीय संशोधन) नियमावली-2019’ प्रख्यापित की जा रही है।

उ0प्र0 सचिवालय विधायी विभाग अधिकारी सेवा (प्रथम संशोधन) नियमावली-2019 अनुमोदित

मंत्रिपरिषद ने ‘उत्तर प्रदेश सचिवालय विधायी विभाग अधिकारी सेवा नियमावली-2013’ में प्रथम संशोधन को मंजूरी प्रदान करते हुए ‘उत्तर प्रदेश सचिवालय विधायी विभाग अधिकारी सेवा (प्रथम संशोधन) नियमावली-2019’ को अनुमोदित कर दिया है। इस संशोधन के माध्यम से उत्तर प्रदेश सचिवालय विधायी विभाग अधिकारी सेवा नियमावली-2013 में विद्यमान विधीक्षण अधिकारी संवर्ग के पदों की संख्या को 02 से बढ़ाकर 03 किया गया है। इसके अतिरिक्त, परिवीक्षा एवं वेतनमान सम्बन्धी नियम में भी संशोधन किया गया है।
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स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग, उ0प्र0 एवं मुख्य लेखा परीक्षा अधिकारी सहकारी समितियां एवं पंचायतें, उ0प्र0 द्वारा संपरीक्षित संस्थाओं पर बकाया संपरीक्षा शुल्क राइट आॅफ किए जाने का निर्णय

मंत्रिपरिषद ने स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग, उ0प्र0 एवं मुख्य लेखा परीक्षा अधिकारी सहकारी समितियां एवं पंचायतें, उ0प्र0 द्वारा सम्परीक्षित संस्थाओं पर बकाया सम्परीक्षा शुल्क राइट आॅफ किए जाने का निर्णय लिया है। स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग का दिनांक 31 जुलाई, 2019 तक कुल 2,54,90,88,779 (दो सौ चैवन करोड़ नब्बे लाख अठ्ठासी हजार सात सौ उन्यासी) रुपये तथा दिनांक 31 अगस्त, 2019 तक सहकारी समितियों एवं पंचायतें पर कुल 56,13,60,000 (छप्पन करोड़ तेरह लाख साठ हजार) रुपये सम्परीक्षा शुल्क बकाया है।
इन दोनों ही विभागों द्वारा ऐसी संस्थाओं की संपरीक्षा की जाती है जो यह तो शासकीय अनुदान प्राप्त हैं या स्थानीय प्राधिकारी घोषित होने के कारण राजस्व अर्जित करती हैं। इस प्रकार परोक्ष रूप से सम्परीक्षा शुल्क राज्य के संसाधन से ही लिया जा रहा है। इसे राइट आॅफ किया जाना आवश्यक है। जिन संस्थाओं द्वारा दिनांक 01-10-2018 के पूर्व का लेखा परीक्षा शुल्क जमा किया जा चुका है, उसकी वापसी की मांग नहीं की जाएगी।
ज्ञातव्य है कि स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग द्वारा तथा मुख्य लेखा परीक्षा अधिकारी, सहकारी समितियां एवं पंचायतें उ0प्र0 द्वारा संपरीक्षा के लिए सम्बन्धित संस्थाओं से सम्परीक्षा शुल्क लिया जाता था। शासनादेश दिनांक 01-10-2018 द्वारा समस्त संस्थाओं/निकायों की सम्परीक्षा निःशुल्क कर दिया गया है।
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आबकारी विभाग की सम्पूर्ण कार्य प्रणाली को पी0ओ0एस0 मशीनों सहित आॅनलाइन किये जाने के क्रम में एण्ड टू एण्ड सोल्यूशन उपलब्ध कराने वाले सेवाप्रदाता के चयन हेतु आबद्ध ई0 एण्ड वाई0 परामर्शदाता कम्पनी द्वारा तैयार किये गये आर0एफ0पी0 एवं मास्टर सर्विस एग्रीमेन्ट के आलेख एवं भुगतान प्रक्रिया के अनुमोदन के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने आबकारी विभाग की सम्पूर्ण कार्य प्रणाली को पी0ओ0एस0 मशीनों सहित आॅनलाइन किये जाने के क्रम में एण्ड टू एण्ड सोल्यूशन उपलब्ध कराने वाले सेवाप्रदाता के चयन हेतु आबद्ध ई0 एण्ड वाई0 परामर्शदाता कम्पनी द्वारा तैयार किये गये आर0एफ0पी0 एवं मास्टर सर्विस एग्रीमेन्ट के आलेख एवं भुगतान प्रक्रिया को अनुमोदन प्रदान कर दिया है। साथ ही, मंत्रिपरिषद की स्वीकृति के उपरान्त प्रश्नगत आर0एफ0पी0 एवं मास्टर सर्विस एग्रीमेन्ट तथा भुगतान की प्रक्रिया के क्रियान्वयन में आने वाली यदा-कदा आने वाली कठिनाइयों के समाधान/निवारण एवं प्रक्रिया के सरलीकरण हेतु आबकारी आयुक्त की संस्तुति पर आबकारी मंत्री के माध्यम से मुख्यमंत्री जी द्वारा निर्णय लिये जाने के प्रस्ताव को भी अनुमोदित कर दिया है।
पूर्व प्रणाली में बिना किसी कम्प्यूटरीकृत/आॅनलाइन व्यवस्था के मदिरा की प्रत्येक बोतल पर सिक्योरिटी होलोग्राम चस्पा किये जाने की व्यवस्था थी। वर्ष 2018-19 में होलोग्राम के सम्बन्ध में उसके प्रतिरूपांे (डुप्लीकेट) की शिकायत प्राप्त होने एवं राजस्व में पर्याप्त वृद्धि प्राप्त ने होने के कारण होलोग्राम व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया।
पूर्व में ट्रैक एण्ड ट्रैस प्रणाली में आये व्यवधानों एवं भविष्य मे रिटेल सतर पर पी0ओ0एस0 मशीन एवं जियोफैन्सिंग की प्रणाली भी विकसित कराये जाने के दृष्टिगत एक ही सेवाप्रदाता के माध्यम से आबकारी विभाग की सम्पूर्ण कार्य प्रणाली को पी0ओ0एस0 मशीनों सहित आॅनलाइन किये जाने का उच्च स्तर पर निर्णय लिया गया है। शीरा के उत्पादन/संचय/वितरण से लेकर एल्कोहल का उत्पादन/संचयन/ वितरण, बाटलिंग एवं उपभोग के विभिन्न चरणों हेतु आवश्यक पी0ओ0एस0 मशीन्स, हैण्डहेल्ड स्कैनर्स, सी0सी0टी0वी0, डिजीलाक्स, जी0पी0एस0 आदि विभिन्न प्रकार के हार्डवेयर की आपूर्ति, स्थापना एवं संचालन/अनुरक्षण आदि का समावेश इस परियोजना में किया गया है। प्रश्नगत परियोजना के क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश सरकार पर कोई व्ययभार नहीं आएगा।
तकनीक के प्रभावपूर्ण उपयोग से विभाग के कार्यकलापों में दक्षता एवं पारदर्शिता आयेगी। वास्तविक उत्पादन, निकासी, राजस्व आदि का मानकों के अनुयप मिलान हो सकेगा तथा उत्पादकता, आपूर्ति एवं राजस्व में वृद्धि सम्भव हो सकेगी। प्रस्तावित व्यवस्था में उपभोक्ता एवं जनमानस के लिए मोबाइल एप्लीकेशन भी तैयार की जाएगी, जिसमें वह मदिरा की किसी बोतल के सम्बन्ध में सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकेगा। परियोजना अवधि में मुख्यालय, आसवनी/यवासवनी, हेल्पडेस्क, सी0सी0टी0वी0 सर्विलांस सिस्टम आदि में बड़ी मात्रा में टेक्निकल मैनपावर की आवश्यकता सृजित होगी।

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