मंदिर तालाब के बीच डूबा है, जिसके चलते भक्तगण शिवलिंग के दर्शन नहीं कर पाते।

धर्म डेस्क।भारत को धर्मप्रधान देश माना गया है और यहां सभी धर्मों को महत्व दिया जाता है। सभी धर्मों से जुड़े धार्मिक स्थल अपने में ही एक एहम स्थान रखते हैं। जहां देश से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी भक्तों की भीड़ दर्शन के लिए आते हैं। वैसे तो आपने बहुत से मंदिरों के बारे में सुना और देखा होगा लेकिन आज हम आपको एक ऐसे ही मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जो चमत्कारों से घिरा हुआ है। किसी समय श्मशान और वीरान जंगल में बना कंकाली तालाब वर्तमान दौर में राजधानी की घनी बस्ती के बीच स्थित है। बताया जाता है कि नागा साधुओं ने मां कंकाली के स्वप्न में दिए आदेश पर 650 साल पहले कंकाली मंदिर का निर्माण करवाया था। मंदिर के ठीक सामने भव्य सरोवर बनाकर बीच में छोटा सा मंदिर बनवाकर शिवलिंग की स्थापना की। शुरुआती दौर में नागा साधु और शिवभक्त पूजन-दर्शन करने आते थे।

इसके बाद कुछ ऐसा चमत्कार हुआ कि धरती से पानी की धारा फूट पड़ी और सरोवर लबालब भर गया। 20 फुट ऊंचा मंदिर पूरी तरह से पानी में डूब गया। किवंदती है कि कई बार तालाब को खाली करके आम भक्तों के लिए मंदिर खोला गया, लेकिन कुछ दिनों में पुनः मंदिर तालाब में डूब गया। आखिरकार प्रभु इच्छा के चलते मंदिर को उसी हाल में छोड़ दिया गया। सदियों से आज भी मंदिर तालाब के बीच डूबा है, जिसके चलते भक्तगण शिवलिंग के दर्शन नहीं कर पाते।

आज भी मां कंकाली के बाद होती है शिवलिंग पूजा-
मां कंकाली मंदिर में कई पीढ़ी से पूजा कर रहे पुजारी परिवार के वंशज पं. आशीष शर्मा बताते हैं कि 700 साल पहले आजाद चौक, ब्राह्मणपारा के समीप नागा साधुओं ने डेरा डालकर मठ की स्थापना की थी। वे मां कंकाली के परम भक्त थे। महंत कृपाल गिरी महाराज को मां कंकाली ने स्वप्न में दर्शन देकर कुछ ही दूर मंदिर निर्माण करने की आज्ञा दी। लगभग 650 साल पहले मंदिर का निर्माण पूरा हुआ और मठ से स्थानांतरित करके मां कंकाली की प्रतिमा मंदिर में प्रतिष्ठापित की गई।सौजन्य से दैनिक सवेरा।

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