मानवीय मूल्यों को ख़त्म कर देगा चौथी अधौगिक क्रंति

देश मे सबसे ज्यादा रोजगार कृषि और पशु पालन में

बनवासी सेवा आश्रम में आयोजित की गयी परिचर्चा

म्योरपुर/सोनभद्र(विकास कुमार)

देश की प्रख्यात सामाजिक संस्थाओं में एक बनवासी सेवा आश्रम में शनिवार को चौथी अधौगिक क्रांति के खतरे और सावधानियां पर परिचर्चा का आयोजन मुंबई ,औरंगाबाद, वर्धा ,मालेगांव के गांधी बिचारको ,और लेखकों,अर्थशास्त्री कार्यकर्ताओ के साथ किया गया।जिसमें मशीनीकरण, अधौगिक विकास, रोजगार,और पर्यावरण आदि ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की गयी। मुंबई से आये विजय तांबे और नागपुर के प्रदीप ने कहा कि आने वाले 15 से 25 वर्षो में चौथी अधौगिक क्रांति से मानवीय मूल्य खत्म हो जायेगे और बेरोजगारी ,बढ़ेगी ,पर्यावरण खतरे में होगा और कार्यालय ,उधोगो के साथ कृषि ,पशुपालन पर रोबेट का कब्जा होगा। बैंकों में 69 फीसदी कर्मचरियो को काम नही मिलेगा। कहा कि रोबेट केवल काम नही करेगा बल्कि सोचेगा भी की उसे क्या करना है क्या उचित है।और यह केवल भारत मे नही पूरी दुनिया मे होने वाला है। सर्व सेवा संघ के पूर्व अध्यक्ष डॉ सुगन बरण्ठ ने बताया कि वर्था में तो कपास से बीज निकालने और अन्य कामो के लिए रोबेट 12 हजार में बिकने लगा है।कहा कि अधौगिक क्रांति को भले ही न रोका जा सके लेकिन हम सावधान हो सकते है और कृषि ,पशु पालन ,कुटीर उधोगो में इसके प्रयोग से बच सकते है। कहा कि अन्य देश मे चाहे प्रस्थितिया जो हो लेकिन अपने देश मे सबसे ज्यादा रोजगार खेती में है। उसके अनुसार हमे सोचना होगा। मौके पर प्रोफेसर रविन्द्र ,शुभा प्रेम, विमल सिंह,देवनाथ ,यज्ञ नारायण ,शिव शरण सिंह, उमेश चौबे,अजय झा रमेश यादव, शिव नारायण,नीरा,मान मति, बिलवंती देवी, आदि रहे।

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