एनसीएल प्रबंधन के विरुद्ध लामबंद हुए ट्रांसपोर्टर

एनसीएल

एनसीएल प्रबंधन के खिलाफ लामबंद हुआ सिंगरौली मोटर एसोसिएशन

प्रेसवार्ता कर बताई अपनी समस्याएं

200 करोड़ के रोड प्रोजेक्ट सिंगरौली से ख़नहना,पानी के छिड़काव का अभाव,

मशीनरी को यमराज कहा जाना, कोल ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर जल्द बनाना,

डीएमएफ,CSR के पैसे का दुरूपयोग,

जिला पंचायत रकम की वसूली पर कहा एनसीएल सीधे जमा करे ।

स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव आदि बिंदुओं पर उठाए सवाल

एनसीएल प्रबंधन को दिया समस्याओं के निदान के लिये 15 दिन का अल्टीमेटम ,

एसोसिएशन ने 15 दिन बाद NCL हेडक्वार्टर के सामने प्रदर्शन करने की कही बात

सिंगरौली मोटर यूनियन के अध्यक्ष राजेश सिंह ने दी आंदोलन की चेतावनी

सिगरौली।कोल ट्रांसपोर्टर ने एनसीएल प्रबंधन को आड़े हाथों लिया है। सोमवार दोपहर मोरवा स्थित निजी होटल में सिंगरौली व सोनभद्र के ट्रांसपोर्टरों ने प्रेसवार्ता कर एनसीएल प्रबंधन के खिलाफ अपनी भड़ास निकाली। प्रेसवार्ता में सिंगरौली मोटर यूनियन के अध्यक्ष राजेश सिंहने बताया की इस जिले में रोजगार की लाइफ लाइन कोल ट्रांसपोर्टिंग है, जो बिना रोड के संभव नहीं। यहां एनएच रोड की स्थिति काफी दयनीय हो चली है। जिसे बनाने के लिए एनसीएल द्वारा पूर्व में स्वीकारा गया था की 200 करोड़ का प्रोजेक्ट रोड टेंडर हेतु खनहना से शुक्ला मोड़ के लिए तैयार किया जा रहा है। इससे ट्रांसपोर्टरों के साथ स्थानीय लोगों में कुछ उम्मीद जागी थी। परंतु वर्तमान समय में उसी रोड का (बी ओ क्यू) करीब 6 करोड़ की लागत से एनसीएल द्वारा तैयार किया गया है और यह संभव होता नहीं दिखता की 9 किलोमीटर की यह रोड मात्र 5 से 6 करोड़ में बन टिके रहने योग बन सकेगी। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि सिंगरौली जिला भयानक पर्यावरण प्रदूषण की चपेट में है। एनसीएल द्वारा कोल ट्रांसपोर्टर से 50 प्रति टन विक्रय किए गए कोयले पर पर्यावरण प्रदूषण आदि पर खर्च हेतुु वर्षोंं से लिया जा रहा है, परंतु क्षेत्र की स्थिति देखकर यह स्पष्ट हैै कि एनसीएल प्रबंधन द्वारा इस पैसे का सदुपयोग नहीं किया जा रहा। इसके विपरीत पानी का छिड़काव के लिए भी ट्रांसपोर्टरों की लायबिलिटी तय कर दी जाती है। एनसीएल हर वर्ष हजारोंं पेड़ लगाने का दावा करती है परंतु रोड किनारे से लेकर निकाले गए कोयले के स्थानों पर भी हरियाली नहींं दिखती जो जगजाहिर है। उन्होंने बताया कि एनसीएल द्वारा टैक्स इनवॉइस के साथ 14% रॉयल्टी लगाई जाती है *जिसका 30% डीएमएफ चार्ज किया जाता है। इस पैसे पर स्टेट गवर्नमेंट का हक है, जिससे यहां की जनता पर खर्च किया जाना चाहिए। परंतु प्रशासन व जनप्रतिनिधियों केे उदासीन रवैया के कारण प्रदूषण व बीमारियों की मार झेल रहे सिंगरौली और सोनभद्र वासी को वंचित कर इसका लाभ अन्य जगह के लोगों को दिया जा रहा है। एनसीएल एवंं एनटीपीसी के *सोशल रिस्पांसिबिलिटी* पर भी सवाल खड़ा करते हुए उन्होंने आरोप लगाया की यहां स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध नहीं है। जिस कारण लोगों को इलाज के लिए बाहर पलायन करना पड़ता है, जो इस क्षेत्र की एक बड़ी़ समस्या है। प्रेसवार्ता में उन्होंने जिला पंचायत की रकम की अवैध वसूली का भी आरोप लगाकर एनसीएल प्रबंधन को 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया। उन्होंनेे बताया कि आने वाले दिनों में यदि रोड निर्माण सहित इन बिंदुओं पर कार्यवाही नहीं की गई तो वह दोबारा उग्र आंदोलन केेेे लिए विवश हो जाएंगे।कोल ट्रांसपोर्टरों का एनसीएल प्रबंधन से गतिरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। विगत महीने एनजीटी की ओवर साइट कमिटी ने एनसीएल की कोल खदानों से सड़क मार्ग द्वारा हो रहे कोल परिवहन पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। जिसके बाद से ही नाराज ट्रांसपोर्टर लामबंद होकर धरने पर बैठ गए थे। करीब सप्ताह भर बाद 1 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रांसपोर्टरों व एनसीएल प्रबंधन को राहत प्रदान करते हुए कोल परिवहन की अनुमति दे दी गई थी। जिसके बाद जल्द एनएच रोड निर्माण का कार्य पूरा करने, सड़क मार्ग पर पानी का छिड़काव करने, खदानोंं से त्रिपाल लगाकर ही गाड़ियों को बाहर आने की अनुमति प्रदान करने आदि कुछ बेसिक मुद्दों पर एनसीएल प्रबंधन द्वारा जल्द कार्यवाही के आश्वासन के बाद कोल ट्रांसपोर्टरों ने अपना धरना समाप्त किया था। विगत 15 दिनों में भी उनकी मांगों पर सुनवाई न होता देख, एक बार फिर कोल ट्रांसपोटरो का जनसैलाब सड़क पर उतरेगा।

प्रेसवार्ता में मौजूद

उक्त प्रेसवार्ता में सिंगरौली मोटर यूनियन के कोषाध्यक्ष मुन्ना अग्रहरी, संरक्षक बजरंग सिंह राठौर, पवन अग्रवाल, एपी मिश्रा, लालता राम, जयकांत यादव, करुणाकर पुरी, ओपी सिंह सरदार, रोहित सिंह समेत अन्य ट्रांसपोर्टर मौजूद रहे।

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