एक खिलाड़ी पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता सही नहीं

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वनडे और टेस्ट क्रिकेट के विपरीत एक अकेला खिलाड़ी टी-20 में अपने प्रदर्शन से अधिक प्रभाव डालता है। यहां बात सिर्फ रन बनाने या विकेट लेने की नहीं है, बल्कि विपक्षी टीमें भी इसी के हिसाब से अपनी रणनीति बनाने लगती हैं। ये दोनों ही तथ्य हमें इस सप्ताह खेले गए मुकाबलों में देखने को मिले। सीएसके के खिलाफ केकेआर एक समय 180 से ज्यादा रन बनाने की ओर बढ़ रही थी। शायद यह स्कोर जीत के लिए काफी रहता। मगर अंतिम ओवरों में केकेआर का आक्रमण पूरी तरह आंद्रे रसेल पर निर्भर है। बेशक टीम के पास और भी कई अच्छे खिलाड़ी हैं, लेकिन रसेल पर निर्भरता ने टीम को प्रभावित किया।

ऐसा ही हैदराबाद में राशिद के साथ देखने को मिला। बेशक वो उतने ही विकेट नहीं ले सके हैं, जितने कि अक्सर लिया करते थे। हालांकि उनका इकॉनोमी रेट बेहतरीन है। मतलब साफ है कि विपक्षी टीमें जानती हैं कि राशिद के ओवरों में छह रन प्रति ओवर के हिसाब से रन बनाना घाटे का सौदा नहीं है। बल्कि अगर वे उनकी गेंदों पर आक्रमण करने की कोशिश करेंगे तो यह राशिद के हाथों में खेलने जैसा होगा। हैदराबाद राशिद के 22 रन देकर बिना कोई विकेट के बजाय 35 रन देकर 3 विकेट जैसे प्रदर्शन से अधिक खुश होगी।

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Harsha Bhogle says dependency on one player in IPL T-20 cricket not good for teams

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