17 वर्षीय नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में दो अभियुक्त दोषसिद्ध, मुख्य अभियुक्त को 10 वर्ष के कठोर कारावास व ₹50,000 अर्थदंड
सोनभद्र | विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट, सोनभद्र के न्यायालय के पीठासीन अधिकारी ओमकार शुक्ला ने विशेष सत्र परीक्षण संख्या 71/2019 (राज्य बनाम दिनेश कुमार एवं अन्य) में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए दोनों अभियुक्तों को दोष सिद्ध कर दंडित किया।
अभियोजन कथानक
अभियोजन के अनुसार दिनांक 25 जुलाई 2019 को अभियुक्त दिनेश कुमार, जो पहले से विवाहित था, अपने सह-अभियुक्त सूर्य नारायण के साथ मिलकर लगभग 17 वर्षीय नाबालिग पीड़िता को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। अभियोजन का आरोप था कि अभियुक्त दिनेश कुमार ने पीड़िता को अपने कब्जे में रखकर उसके साथ उसकी इच्छा के विरुद्ध दुष्कर्म किया। घटना की जानकारी होने पर पीड़िता की माता द्वारा थाना में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई गई। विवेचना के दौरान पीड़िता का चिकित्सीय परीक्षण कराया गया, उसका न्यायिक बयान दर्ज कराया गया तथा विद्यालयीय अभिलेख एवं जन्मतिथि संबंधी दस्तावेजों से यह सिद्ध किया गया कि घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी। विवेचना पूर्ण होने पर दोनों अभियुक्तों के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया गया। विचारण के दौरान अभियोजन ने पीड़िता, उसकी माता, चिकित्सक, विवेचक, प्रथम सूचना रिपोर्ट के लेखक तथा विद्यालय की प्रधानाध्यापिका सहित साक्षियों के बयान एवं जन्म प्रमाण पत्र, विद्यालयीय अभिलेख, चिकित्सकीय परीक्षण रिपोर्ट, धारा 164 दण्ड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत दर्ज बयान सहित अन्य दस्तावेजी साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए। न्यायालय ने उपलब्ध मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन का मामला संदेह से परे सिद्ध पाया। न्यायालय ने मुख्य अभियुक्त दिनेश कुमार (आयु लगभग 30 वर्ष) को भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 366, 376 तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 3/4 के अपराध में दोषसिद्ध करते हुए धारा 363 में 5 वर्ष का कारावास एवं ₹10,000 अर्थदंड, धारा 366 में 7 वर्ष का कारावास एवं ₹10,000 अर्थदंड तथा धारा 376 में 10 वर्ष के कठोर कारावास एवं ₹30,000 अर्थदंड से दंडित किया। सभी सजाएँ साथ-साथ चलेंगी।
सह-अभियुक्त सूर्य नारायण को भारतीय दंड संहिता की धारा 363 के अपराध में दोषसिद्ध कर 5 वर्ष के कारावास एवं ₹10,000 अर्थदंड से दंडित किया गया।
न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि अभियुक्तों से वसूल की गई अर्थदंड की राशि नियमानुसार पीड़िता के चिकित्सीय उपचार, मानसिक पुनर्वास एवं अन्य सहायता हेतु उपलब्ध कराई जाएगी। मुकदमे में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक दिनेश प्रसाद अग्रहरी एवं विशेष लोक अभियोजक नीरज कुमार सिंह ने प्रभावी पैरवी की। अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों एवं विधिक तर्कों के आधार पर विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट, सोनभद्र ने दोनों अभियुक्तों को दोषसिद्ध करते हुए उपरोक्त दंडादेश पारित किया।
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