संविधानिक चेतना का उत्सव है गणतंत्र दिवस

विशेष संवाददाता – भोलानाथ मिश्र

सोनभद्र। गणतंत्र दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि उस संविधानिक चेतना का महापर्व है, जिसने भारतीय नागरिकों को अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का भी बोध कराया। यह दिन उन असंख्य ज्ञात-अज्ञात बलिदानों की स्मृति है, जिनके कारण भारत लोकतंत्र, समानता और सामाजिक न्याय के पथ पर निरंतर अग्रसर है।

लोकतंत्र को जीवंत बनाए रखने के लिए जागरूक, संवेदनशील और उत्तरदायी नागरिकों की नितांत आवश्यकता है। उक्त विचार सोमवार को ईश्वर प्रसाद स्नातकोत्तर महाविद्यालय एवं ईश्वर प्रसाद विधि महाविद्यालय के महामना सभागार में आयोजित 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में विद्वान वक्ताओं ने व्यक्त किए।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रबंध समिति के संरक्षक हेमनाथ पाण्डेय द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराने के साथ हुआ। इसके पश्चात महापुरुषों के चित्रों पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। समारोह को संबोधित करते हुए प्रबंध समिति के अध्यक्ष आशीष पाण्डेय एडवोकेट, प्रबंधक मनीष पाण्डेय, प्रख्यात समाजशास्त्री डॉ. विमलेश कुमार त्रिपाठी, सहायक आचार्य मृत्युंजय नारायण, बृजेश सिंह पटेल, विधि स्नातक प्रथम वर्ष की छात्रा लक्ष्मी मौर्य , बीए की छात्रा प्रीति ने संविधान की महत्ता, नागरिक कर्तव्यों और लोकतांत्रिक मूल्यों पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि संविधान केवल शासन की व्यवस्था नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, मानवीय गरिमा और न्यायपूर्ण समाज का आधार है। युवाओं से संविधानिक मूल्यों को आत्मसात कर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया। समारोह का संचालन भोलानाथ मिश्र ने किया। इस अवसर पर उप-प्राचार्य राजेश द्विवेदी, विमलेश कुमार पाठक, विनय प्रजापति, कार्यालय अधीक्षक विनीत पाण्डेय, शिक्षणेत्तर कर्मचारी रामचंद्र पाण्डेय, रामजी तिवारी, सरिता, संदीप, श्यामा गुप्ता सहित समस्त स्टाफ उपस्थिति रहे। कार्यक्रम के अंत में मिष्ठान वितरण के साथ गणतंत्र दिवस का उल्लासपूर्ण जश्न मनाया गया। बड़ी संख्या में उपस्थित छात्र-छात्राओं ने देशभक्ति के भाव के साथ 77वें गणतंत्र दिवस का अभिनंदन किया।

Translate »