दिव्य विभूतियों की स्मृति में हुआ सम्मान समारोह
घोरावल-सोनभद्र। शिवशक्ति लोक रंगमंच महोत्सव की बिखरी दिव्य छटा शिवद्वार में देखने को मिला जिसमें लोकगीत , लोकनाट्य , गायन – वादन की रसधार बही। दीपावली के अगले दिवस सन्ध्या वेला से शुरू महोत्सव में मानद विभूतियों के नाम उनकी स्मृति में सम्मान समारोह भी आयोजित हुआ। विलुप्त होती सोनभद्र की

सांस्कृतिक लोकविधाओं की जीवन्त प्रस्तुतियों से गुलजार रंगमंच पर अन्य विविध विधाओं से रात्रि भर से सुबह तक महोत्सव चला। पण्डित शीतला प्रसाद शुक्ल, स्मृति सम्मान से सामाजिक गतिविधियों में पूर्व जिला पंचायत सदस्य अमरनाथ सिंह को अंगवस्त्र , स्मृतिचिन्ह सम्मान पत्र से सम्मानित हुए। तो भोजपुरी कविसम्राट मुंशी मंगल लाल स्मृतिचिन्ह व परमहंस सिंह चंदौली को सम्मानित किया गया। पूर्व ब्लाक प्रमुख संजय सिंह एवं जिला पंचायत सदस्य नीरज कुमार श्रीवास्तव को स्मृतिचिन्ह व सम्मान पत्र दिए गए। इसी कड़ी में कुछ अन्य लोग भी सम्मानित किए गए। समिति के अध्यक्ष मुन्नर यादव व संरक्षक डॉ0 परमेश्वर दयाल श्रीवास्तव “पुष्कर” रहे। विलुप्त हो रही सोनांचल की लोकविधाओं कर्मा , कोलदहकी , शैला , नटुआ का शाश्वत प्रदर्शन हुआ जिसमें रामबली कोल की मण्डली ने सराहनीय प्रस्तुति दी तो कर्मा नृत्यगीत का कई लोकभाषाओं में अविस्मरणीय प्रदर्शन शिवनारायण गिरिया की टीम ने किया। लोकगायक में कवि मुरेश , सोहन मौर्य , कैलाश भारती , राजकुमारी गुप्ता , श्यामवीर यादव ,रामधनी विश्वकर्मा , गजानन्द पाण्डे ,कमलेश कुमार प्रजाति , कवि मुन्नर यादव , जगबन्धन पाल ,रामधनी विश्वकर्मा , हरिप्रसाद प्रजापति , लवकुश कुमार व अन्यान्य गायक कलाकारों की प्रस्तुति रही जिसमें उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों मध्यप्रदेश , झारखण्ड , बिहार व छत्तीसगढ़ के लोकगायकों की लम्बी जमात शामिल रही । महोत्सव में आभार ज्ञापित मुन्नर यादव ने तो स्वागत उद्बोधन संरक्षक डॉ0 परमेश्वर दयाल पुष्कर ने किया। सफल संचालन हीरापति यादव तथा शेषधर पाल ने दो सत्रों में कार्यक्रम आयोजित किया। महोत्सव में अपर जिलाधिकारी बागीश शुक्ला, लवकुश कुमार गुप्त, दयाशंकर रौनियार , देवचरन यादव, लोकपति पटेल मौजूद रहे। इनके साथ ही मंचस्थ अनेक गणमान्य जन की मौजूदगी रही कार्यक्रम में जिन्होंने आद्योपांत अलग – अलग विधाओं का अंतस्तल से आनन्द उठाया।
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