कोरोना काल में चिकित्सा जगत के लिए मिसाल बने डॉक्टर शिवराज

-अनिल बेदाग़-

मुंबई : देश और दुनिया ही नहीं, पूरे महाराष्ट्र में कोरोना ने कहर मचाया हुआ है। आम जनता डरी, सहमी और ख़ौफ़ में जी रही है। ऐसे में डॉक्टर्स ही फरिश्ते का रूप लेकर लोगों का जीवन बचाने में जुटे हुए हैं। ऐसे ही एक फरिश्ता रूपी डॉक्टर हैं मुंबई के जे जे अस्पताल एवं ग्रांट मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर और इंटरविंशनल रेडियोलाजिस्ट डॉक्टर शिवराज इंगोले, जो कोरोना के इस संकटकालीन समय में अपनी जान की परवाह न करते हुए हज़ारों गंभीर रोगियों की जान बचा चुके हैं। इस दौरान उन्होंने कोरोना ही नहीं, अन्य बीमारियों से जूझ रहे रोगियों को भी मुसीबतों से बाहर निकालते हुए उन्हें जीवनदान दिया है। जैसे कि पैरों की फुली हुई नसें (वेरीकोज वेन्स), पैरों के अंदरूनी हिस्सों की नसों में गुठलिया होना(डीवीटी), रोज़मर्रा की ज़िंदगी में पैदा होने वाले दर्द, दिमाग़ की नसों में खून की गुठली की रुकावटें आदि ऐसी कई बीमारियों से रोगियों को मुक्ति दिलाने के मिशन में जुटे हुए हैं डॉक्टर शिवराज।
इसके अलावा दिमाग़ की नसें फटने की वजह से होने वाले और ब्रेन हैमरेज, पैरों की नसें बंद हो जाना(गैंग्रीन)जैसे आपातकालीन उपचारों को करने से भी पीछे नहीं हटे डॉक्टर शिवराज। इन सबका इलाज त्वचा को चीरते हुए करने की बजाय एक छोटी नस के माध्यम से करने में माहिर हैं डॉक्टर शिवराज। कोरोना के इस खतरनाक दौर में भी इस हुनर का इस्तेमाल करते हुए डॉक्टर शिवराज चिकित्सा जगत में अपना सराहनीय योगदान देते हुए एक मिसाल बन गए हैं।
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