जानिये पंडित वीर विक्रम नारायण पांडेय जी से सौभाग्य (लाभ) पंचमी विशेष

धर्म डेक्स । जानिये पंडित वीर विक्रम नारायण पांडेय जी से सौभाग्य (लाभ) पंचमी विशेष



दीपावली पर्व के बाद आने वाली कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी को लाभ पंचमी के नाम से जाना जाता है। इस वर्ष यह तिथि आज 19 नवंबर 2020, गुरुवार को मनाई जाएगी।

सौभाग्य पंचमी जीवन में सुख और सौभाग्य की वृद्धि करती है इसलिए कार्तिक शुक्ल पक्ष कि पंचमी को सौभाग्य पंचमी के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा सभी सांसारिक कामनाओं का पूरा कर परिवार में सुख-शांति लाती है तथा श्री गणेश पूजन समस्त विघ्नों का नाश कर काराबोर को समृद्ध और प्रगत्ति प्रदान करता है।

जीवन में बेहतर और सुखी जीवन का सूत्र सभी की चाह है. इसलिए हर व्यक्ति कार्यक्षेत्र के साथ पारिवारिक सुख-समृद्धि की कामना रखता है. अत: यह सौभाग्य पंचमी पर्व सुख-शांति और खुशहाल जीवन की ऐसी इच्छाओं को पूरा करने की भरपूर ऊर्जा प्राप्त करने का शुभ अवसर होता है।

यह शुभ तिथि दीवाली पर्व का ही एक हिस्सा कही जाती है कुछ स्थानों पर दीपावली के दिन से नववर्ष की शुरुआत के साथ ही सौभाग्य पंचमी को व्यापार व कारोबार में तरक्की और विस्तार के लिए भी बहुत ही शुभ माना जाता है. सौभाग्य पंचमी पर शुभ व लाभ की कामना के साथ भगवान गणेश का स्मरण कर की जाती है।

सौभाग्य पंचमी पूजन

सौभाग्य पंचमी पूजन के दिन प्रात: काल स्नान इत्यादि से निवृत होकर सूर्य को जलाभिषेक करना चाहिए. तत्पश्चात शुभ मुहूर्त में विग्रह में भगवान शिव व गणेश जी की प्रतिमाओं को स्थापित करना चाहिए. संभव हो सके तो श्री गणेश जी को सुपारी पर मौली लपेटकर चावल के अष्टदल पर विराजित करना चाहिए. भगवान गणेश जी को चंदन, सिंदूर, अक्षत, फूल, दूर्वा से पूजना चाहिए तथा भगवान आशुतोष को भस्म, बिल्वपत्र, धतुरा, सफेद वस्त्र अर्पित कर पूजन करना चाहिए. गणेश को मोदक व शिव को दूध के सफेद पकवानों का भोग लगाना चाहिए।

निम्न मंत्रों से श्री गणेश व शिव का स्मरण व जाप करना चाहिए।

गणेश मंत्र –

लम्बोदरं महाकायं गजवक्त्रं चतुर्भुजम्। आवाहयाम्यहं देवं गणेशं सिद्धिदायकम्।।,

शिव मंत्र –

त्रिनेत्राय नमस्तुभ्यं उमादेहार्धधारिणे। त्रिशूलधारिणे तुभ्यं भूतानां पतये नम:।।

इसके पश्चात मंत्र स्मरण के बाद भगवान गणेश व शिव की धूप, दीप व आरती करनी चाहिए. द्वार के दोनों ओर स्वस्तिक का निर्माण करें तथा भगवान को अर्पित प्रसाद समस्त लोगों में वितरित करें व स्वयं भी ग्रहण करें.

सौभाग्य पंचमी महत्व

सौभगय पंचमी के शुभ अवसर पर विशेष मंत्र जाप द्वारा भगवान श्री गणेश का आवाहन करते हैं जिससे शुभ फलों की प्राप्ति संभव हो पाती है. कार्यक्षेत्र, नौकरी और कारोबार में समृद्धि की कामना की पूर्ति होती है. इस दिन गणेश के साथ भगवान शिव का स्मरण शुभफलदायी होता है. सुख-सौभाग्य और मंगल कामना को लेकर किया जाने वाला सौभगय पंचमी का व्रत सभी की इच्छाओं को पूर्ण करता है. इस दिन भगवान के दर्शन व पूजा कर व्रत कथा का श्रवण करते हैं।

सौभाग्य पंचमी के अवसर पर मंदिरों में विषेष पूजा अर्चना की जाती है गणेश मंदिरों में विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होते हैं. लाभ पंचमी श्रद्धापूर्वक मनाई जाती है. पंचमी के अवसर पर लोगों ने घरों में भी प्रथम आराध्य देव गजानंद गणपति का आह्वान किया जाता है. भगवान गणेश की विधिवत पूजा अर्चना की और घर परिवार में सुख समृद्धि की मंगल कामना की जाती है. इस अवसर पर गणपति मंदिरों में भगवान गणेश की मनमोहक झांकी सजाई जाती है जिसे देखने के लिए दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती हैं. रात को भजन संध्या का आयोजन होता है।

लाभपंचमी के दिन इन पाँच अमृतमय वचनों को अपने जीसान में उतारने का संकल्प लेना चाहिए।

पहली बात ‘भगवान हमारे हैं, हम भगवान के हैं – ऐसा मानने से भगवान में प्रीति पैदा होगी । ‘शरीर, घर, संबंधी जन्म के पहले नहीं थे और मरने के बाद नहीं रहेंगे लेकिन परमात्मा मेरे साथ सदैव हैं – ऐसा सोचने से आपको लाभपंचमी के पहले आचमन द्वारा अमृतपान का लाभ मिलेगा।

दूसरी बात हम भगवान की सृष्टि में रहते हैं, भगवान की बनायी हुई दुनिया में रहते हैं । तीर्थभूमि में रहने से पुण्य मानते हैं तो जहाँ हम–आप रह रहे हैं वहाँ की भूमि भी तो भगवान की है सूरज, चाँद, हवाएँ, श्वास, धडकन सब–के–सब भगवान के हैं, तो हम तो भगवान की दुुनिया में, भगवान के घर में रहते हैं। मगन निवास, अमथा निवास, गोकुल निवास ये सब निवास ऊपर–ऊपर से हैं लेकिन सब के सब भगवान के निवास में ही रहते हैं। यह सबको पक्का समझ लेना चाहिए। ऐसा करने से आपके अंतःकरण में भगवद्धाम में रहने का पुण्यभाव जगेगा।

तीसरी बात आप जो कुछ भोजन करते हैं भगवान का सुमिरन करके, भगवान को मानसिक रूप से भोग लगाके करें । इससे आपका पेट तो भरेगा, हृदय भी भगवद्भाव से भर जायेगा।

चौथी बात माता–पिता की, गरीब की, पडोसी की, जिस किसीकी सेवा करो तो ‘यह बेचारा है… मैं इसकी सेवा करता हूँ… मैं नहीं होता तो इसका क्या होता… – ऐसा नहीं सोचो; भगवान के नाते सेवाकार्य कर लो और अपने को कर्ता मत मानो।

पाँचवीं बात अपने तन–मन को, बुद्धि को विशाल बनाते जाओ । घर से, मोहल्ले से, गाँव से, राज्य से, राष्ट्र से भी आगे विश्व में अपनी मति को फैलाते जाओ और ‘सबका मंगल, सबका भला हो, सबका कल्याण हो, सबको सुख–शांति मिले, सर्वे भवन्तु सुखिनः… इस प्रकार की भावना करके अपने दिल को बडा बनाते जाओ । परिवार के भले के लिए अपने भले का आग्रह छोड दो, समाज के भले के लिए परिवार के हित का आग्रह छोड दो, गाँव के लिए पडोस का, राज्य के लिए गाँव का, राष्ट्र के लिए राज्य का, विश्व के लिए राष्ट्र का मोह छोड दो और विश्वेश्वर के साथ एकाकार होकर बदलनेवाले विश्व में सत्यबुद्धि तथा उसका आकर्षण और मोह छोड दो।

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