जानिये पंडित वीर विक्रम नारायण पांडेय जी से शरीर के 13 वेग…..

स्वास्थ्य डेस्क । जानिये पंडित वीर विक्रम नारायण पांडेय जी से शरीर के 13 वेग…..

मल, मुत्र, पाद, बूख, प्यास, ढकार, छींक, उबासी, नींद, आंसू, थकान से आये सांस, वीर्य और उल्टी।

हमारे शरीर में 13 वेग होते हैं अगर वो अपने समय पर आए तो उन्हें रोकना नही चाहिए।

और ना ही इन्हें जबरस्ती लाना चाहिए।

कई बार लोग जानबूझकर रोने की कोशिश करते हैं। हसने की कोशिश करते है जो अक्सर पार्को मैं देखा गया है जो बुजुर्ग लोग घेरा बना के बिना बात हस्ते हैं वो रोग का कारण बन जाता है।

वैसे तो हँसना सेहत के लिए अच्छा होता है लेकिन बिना बात नही। इसकी बजाय अगर वो कोई किस्सा या चुटकुला सुना मार laughing exercise करें तो ज्यादा बेहतर होता है।

कई बार जोर लगा लगा कर मल निकालते हैं जिसके कारण बवासीर या hernia की प्रॉब्लम हो जाती है।

आइये देखते हैं वेगो को रोकने से क्या रोग हो सकते हैं :

1 मल को रोकने से पेट में गुड़गुड़ाहट, गुदा में पीड़ा, कब्ज, बवासीर, भगन्दर और अन्य गुदा के रोग हो जाते हैं।

2 मुत्र को रोकने से मूत्राशय और लिंग में जलन व दर्द, मुत्र संबंधित सभी बीमारी, प्रमेह, किडनी की बीमारियां, पत्थरी, सिर में पीड़ा, पेशाब का बार बार आना या कम आना,पेशाब में जलन आदि।

3 पाद को रोकने अफारा, पेट दर्द, कब्ज, क्लांति, बुखार, पेट के बहुत से रोग हो जाते हैं।

4 उबासी को रोकने से cervical spondelitis, जबड़ा दुखना, गर्दन में दर्द, सिर में पीड़ा, सिर के बहुत से रोग, आँख, नाक, कान के बहुत से रोग और वात के रोग हो जाते हैं।

5 आंसू चाहे वो खुशी के हों या गम के उनको रोकने से सिर में भारीपन, आखों के बहुत से रोग, भयंकर जुखाम, नजला और नाक के रोग आदि रोग हो जाते हैं।

6 छींक को रोकने cervical spondelitis, सिर में दर्द, मुह का लकवा, पक्षाघात, इंद्रियों का काम करना बंद करना और भी अन्य वात के भयंकर रोग होते हैं।

7 डकार को रोकने से गला और मुख भरा रहता है मानो खाना गले में ही है, सम्पूर्ण शरीर में दर्द होना, आंतो में शब्द होना, अफारा बन जाना, पाद न निकलना और भी वात के रोग हो जाते हैं।

8 उल्टी को रोकने से खाज, खुजली, अरुचि, चहरे पे झाइयां पड़ना, edema, पिलिया, बुखार, सभी प्रकार के चर्म रोग, उभकाई और erysipelas रोग हो जाते हैं।

9 वीर्य को रोकने से मूत्राशय, गुदा, अंडकोष में दर्द और सूजन, वीर्य संबंधित सभी रोग, नपुंसकता, मुत्र में वीर्य निकलना, पत्थरी, अंडकोष में पथरी रोग हो जाते है।

10 भूख में खाना न खाने से आलस्य, शरीर का टूटना, अरुचि, आखों की दृश्टि में कमी, पेट का cancer और पेट के रोग हो जाते हैं।

11 प्यास में पानी न पीने से कंठ और मुख सूखता है, श्रवणशक्ति का अवरोध होता है, हृदय में पीड़ा होति है, शरीर टूट जाता है।

NOTE : अगर भूख लगे तो खाना ही खाना चाहिए। और प्यास लगे तो पानी ही पीना चाहिए। अगर बूख लगी हो और पानी पी लिया जाए तो जलोदर रोग हो जाता है। और प्यास लगी हो और खाना खा लिया जाए तो पेट का cancer हो जाता है।

12 थकान से आये सांस को रोकने से दिल के सभी रोग, मोह और stomach cancer हो जाता है।

13 नींद आने पर अगर सोएं नही तो उबासी, शरीर का टूटना, आखों के बहुत से रोग, सिर भारी होना और दर्द होना और आलस्य हो जाता है।

इसीलिए हमे शरीर के वेगो को ना तो रोकना चाहिए न जबरदस्ती लाना चाहिए।

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