जानिये पंडित वीर विक्रम नारायण पांडेय जी से नजला (जुकाम) के 22 घरेलु उपचार………

स्वास्थ्य डेस्क । जानिये पंडित वीर विक्रम नारायण पांडेय जी से नजला (जुकाम) के 22 घरेलु उपचार………

*नजला या जुकाम ऐसा रोग है जो किसी भी दिन किसी भी स्त्री या पुरुष को हो सकता है| यह रोग वैसे तो ऋतुओं के आने-जाने के समय होता है लेकिन वर्षा, जाड़े और दो ऋतुओं के बीच के दिनों में ज्यादातर होता है|

*“नजला (जुकाम) के 22 घरेलु उपचार

दूषित वातावरण धूल-धुएं के फैलने वाले स्थान तथा बर्फीले स्थान में यह रोग बगैर किसी शिकायत के भी हो जाता है| गले के अन्य रोग, नाक की बीमारियां, वायु प्रकोप तथा क्षय आदि इस रोग की मदद करते हैं| फलत: यह रोग तेजी से फैलता है|

नजला (जुकाम) के 22 घरेलु नुस्खे इस प्रकार हैं:

1. अदरक और देशी घी

अदरक के छोटे-छोटे टुकड़ों को देशी घी में भून लें| फिर उसे दिन में चार-पांच बार कुचलकर खा जाएं| इससे जुकाम बह जाएगा और रोगी को शान्ति मिलेगी|

2. हल्दी, अजवायन, पानी और गुड़

10 ग्राम हल्दी का चूर्ण और 10 ग्राम अजवायन को एक कप पानी में आंच पर पकाएं| जब पानी जलकर आधा रह जाए तो उसमें जरा-सा गुड़ मिला लें| इसे छानकर दिन में तीन बार पिएं| दो दिन में जुकाम छूमंतर हो जाएगा|

3. लहसुन, शहद और कलौंजी

लहसुन की दो पूतियों को आग में भूनकर पीस लें| फिर चूर्ण को शहद के साथ चाटें| कलौंजी का चूर्ण बनाकर पोटली में बांध लें| फिर इसे बार-बार सूंघें| नाक से पानी आना रुक जाएगा|

4. जायफल और पानी

जायफल को पानी में घिसकर चंदन की तरह माथे और नाक पर लगाएं|

5. तुलसी, लौंग, अदरक, सोंठ, गुड़, चीनी और कालीमिर्च

तुलसी की पांच पत्तियां, दो लौंग, एक छोटी गांठ अदरक या सोंठ तथा चार कालीमिर्च – सबको मोटा पीसकर एक कप पानी में आग पर चढ़ा दें| जब पानी जलकर आधा रह जाए तो छानकर उसमें जरा-सा गुड़ या चीनी डालकर गरम-गरम पी जाएं|

6. गोमूत्र

दोंनो नथुनों में गोमूत्र (ताजा) की दो-दो बूंदें सुबह-शाम टपकाएं|

7. सोंठ

एक चम्मच पिसी सोंठ की फंकी लगाकर ऊपर से गुनगुना पानी पी लें|

8. मुनक्का

पांच मुनक्के एक कप पानी में उबालें| जब पानी आधा रह जाए तो मुनक्के निकालकर चबा जाएं| फिर घूंट-घूंट पानी पी लें| जुकाम भाग जाएगा|

9. अदरक और शहद

एक चम्मच अदरक के रस में आधा चमच शहद मिलाकर चाट लें|

10. दालचीनी और जायफल

दालचीनी तथा जायफल – दोंनो एक चम्मच की मात्रा में चूर्ण के रूप में लेने से जुकाम फूर्र हो जाता है|

11. अमरूद

पके हुए अमरूद को उपलों में भूनकर खाएं|

12. मूली और शहद

मूली के बीजों का चूर्ण आधा चम्मच शहद के साथ चाटें|

13. तुलसी और कालीमिर्च

तुलसी के आठ पत्ते और चार कालीमिर्च – दोनों की चटनी बनाकर गुड़ के साथ खाएं|

14. अनार और गुड़

अनार के पत्तों को पीस लें| फिर उसमें थोड़ा-सा गुड़ मिलाकर 5 ग्राम की मात्रा में खाएं|

15. चिरायता, सोंठ, अड़ूसा और कटेरी

चिरायता, सोंठ, अड़ूसे की जड़ तथा कटेरी की जड़ – सब 5-5 ग्राम लेकर काढ़ा बनाकर पिएं|

16. गाय दूध, हल्दी और चीनी

एक कप गाय के दूध में एक चम्मच पिसी हुई हल्दी तथा थोड़ी-सी चीनी मिलाकर पि जाएं|

17. सरसों

नाक के बाहर तथा नथुनों के भीतर सरसों-का तेल थोड़ी-थोड़ी देर बाद लगाएं| जुकाम का पानी बह जाएगा|

18. नीम, रीठा, कनेर, ग्वारपाठा और सेंधा नमक

नीम के बीजों की गिरी, रीठे के बीज, सफेद कनेर का फूल तथा ग्वारपाठा-सबको पीसकर जरा-सा सेंधा नमक डालकर खा जाएं|

19. पुदीना, कालीमिर्च और नमक

आठ पत्तियां पुदीना, पांच दाने कालीमिर्च तथा एक चुटकी नमक-सबको चाय की तरह उबालकर पी जाएं|

20. नीबू और सेंधा नमक

नीबू के छिलके को पीसकर चटनी बना लें| उसमें जरा-सा सेंधा नमक मिलाकर सेवन करें|

21. हींग

हींग को पानी में घोलकर विक्स की तरह बार-बार सूंघने से जुकाम जल्दी बह जाता है|

22. सौंफ, लौंग और कालीमिर्च

चार चम्मच सौंफ, चार लौंग और पांच कालीमिर्च को एक कप पानी में उबालें| चौथाई कप रह जाने पर बूरा मिलकर घूंट-घूंट पिएं|

नजला (जुकाम) में क्या खाएं क्या नहीं

बहुत ठंडी और बहुत गरम तासीर वाली चीजें न खाएं| चाय, दूध, अमरूद और पपीता, पालक, मेथी आदि की सब्जी, गेहूं तथा जौ की चपाती खाएं| रात को बंद कमरे में लेटकर अदरक, तुलसी और कालीमिर्च का काढ़ा पीकर सो जाएं| गुनगुना पानी पिएं| मट्ठा, छाछ, दही, बर्फ, ठंडा पानी, आलू, करेला, बैंगन, फूलगोभी, मूली, टमाटर, सेब, नाशपाती, केला आदि का सेवन न करें| यदि जुकाम के साथ पेट में भारीपन मालूम पड़े तो मूंग की दाल की खिचड़ी खाएं|

नजला (जुकाम) का कारण

भोजन की खराबी, अधिक मेहनत, चिन्ता, पानी में भीगने, ठंडी हवा या ओस में सोने, अधिक शराब पीने, शारीरिक कमजोरी, शौच, छींक, मूत्र, प्यास, भूख, नींद, खांसी एवं जंभाई आदि को रोकने से भी यह रोग उत्पन्न हो जाता है| रात में जागने और दिन में सोने के बाद तुरन्त मुंह धोने, अत्यधिक क्रोध करने, बर्फ का ठंडा पानी पीने, अधिक रोने, अधिक मैथुन करने तथा ठंडे पानी से स्नान करने से भी यह रोग पैदा हो जाता है| यह एक संक्रामक रोग है| इसमें नाक की श्लैष्मिक झिल्ली में हल्की सूजन आ जाती है|

नजला (जुकाम) की पहचान

शुरू में नाक में खुश्की मालूम पड़ती है| बाद में छींकें आने लगती हैं| आंख-नाक से पानी निकलना शुरू हो जाता है| जब श्लेष्मा (पानी) गले से नीचे उतरकर पेट में चला जाता है तो खांसी बन जाती है| कफ आने लगता है| कान बंद-से हो जाते हैं| माथा भारी और आंखें लाल हो जाती हैं| बार-बार नाक बंद होने के कारण सांस लेने में परेशानी होती है| रात में नींद नहीं आती| रोगी को मुंह से सांस लेनी पड़ती है|

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