आयुष्मान गोल्डेन कार्ड का जिलाधिकारी स्वयं करेगे निगरानी

सोनभद्र। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत लाभुकों को गोल्डेन कार्ड देने की प्रक्रिया यूपी में काफी धीमी है। जिसको लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अख्तियार किया तो उसका असर सोनभद्र जिले में भी आज देखने को मिला है। यहां जिलाधिकारी एस राजलिंगम ने आयुष्मान भारत के गोल्डेन कार्ड जारी करने के लिए स्वास्थ्य विभाग से जिम्मेदारी लेते हुए स्वयं कमान संभाल लिया है और इसका नोडल अधिकारी जिला पंचायत राज अधिकारी को बनाया है। विकास भवन में स्थित जिला पंचायत राज विभाग के ओडीएफ वार रूम को आयुष्मान भारत गोल्डेन कार्ड जारी करने का निगरानी सेन्टर बनाया है। इस निगरानी रूम में पंचायत विभाग के सफाईकर्मी , सेक्रेटरी और स्वास्थ्य विभाग के आशा , एएनम सहित 20 लोगो की तैनाती की गई है , जिसकी निगरानी स्वयं जिलाधिकारी कर रहे है।नीति आयोग द्वारा चयनित देश के 115 अति पिछड़े जिले में शामिल सूबे के अति नक्सल प्रभावित जिला सोनभद्र में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का वर्ष 2011 की आर्थिक जनगणना के आधार पर कुल नौ लाख पात्र लाभार्थियों के गोल्डन कार्ड बनने है। जिले में आयुष्मान भारत के तहत जारी होने वाले गोल्डेन कार्ड की गति धीमी देखते हुए जिकाधिकारी एस राजलिंगम ने स्वयं कमान थाम लिया है। जिलाधिकारी ने इसके लिए जिले को खुले में शौच मुक्त बनाने में अहम भूमिका निभाने में जिला पंचायत राज विभाग को इस योजना का नोडल बनाया है।इस कार्य के लिए जिलाधिकारी का आदेश मिलते ही डीपीआरओ ने ओडीएफ वार रूम को निगरानी सेन्टर बनाया है। इस ओडीएफ वार रूम में 20 लोगो को जिलाधिकारी ने तैनात किया है और स्वयं निगरानी कर रहे है। इस योजना के तहत जिले में प्रथम चरण में 211 गांवो का चयन कियब गया है। इन गांवों में 25 नवम्बर से 10 दिनों तक गोल्डन कार्ड बनाने का महा अभियान चलेगा। इन चिन्हित गांवो में सभी प्रधान, सचिव, एएनएम, आशा, आंगनबाड़ी और सफाईकर्मियों को पात्र लाभार्थियों के गोल्डेन कार्ड बनवाने की जिम्मेदारी सौपी गयी है। इसके लिए इन 211 गांवो को 18 जोन और 52 सेक्टर में बाटा गया है।वही आयुष्मान भारत के नोडल अधिकारी डीपीआरओ आरके भारती ने बताया कि जिस तरह से जिले को खुले में शौच मुक्त बनाया गया है , उसी तरह आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्रों का गोल्डेन कार्ड बनवाया जाएगा। जिले में अभी तक आयुष्मान भारत की टीम स्वतंत्र रूप से स्वास्थ्य विभाग की निगरानी में कार्य कर रही थी। जिसकी गति गोल्डेन कार्ड जारी करने में धीमी पाई गई है। जिसको लेकर जिलाधिकारी ने स्वयं कमान सम्भाली है और जिला पंचायत राज विभाग को नोडल बनाया है। जिस पर ओडीएफ वार रूम को उन्होंने निगरानी सेन्टर बनाया है जहां 20 कर्मचारियो के माध्यम से गोल्डेन कार्य करने वालो पर निगरानी जिलाधिकारी स्वयं रखेंगे। इस योजन के तहत प्रथम चरण में 211 गांवो का चयन किया गया है जिसमे लगभग दो लाख पात्र परिवारो का गोल्डेन कार्ड बनाया जाएगा।

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