शाहगंज बाजार में बृहस्पतिवार को जगह-जगह भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना भक्तिभाव से की गई। शिल्पकारों और भक्तों ने भगवान विश्वकर्मा की आराधना की।


पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि की शुरुआत में भगवान विष्णु प्रकट हुए थे। उनकी नाभि से एक कमल निकला, जिससे ब्रह्मा जी का जन्म हुआ। ब्रह्मा जी के पुत्रों में से एक वास्तुदेव थे।
वास्तुदेव, धर्म की वस्तु नामक स्त्री के सातवें पुत्र थे। उनकी पत्नी का नाम अंगीरसी था, जिन्होंने ऋषि विश्वकर्मा को जन्म दिया। ऋषि विश्वकर्मा को अपने पिता से वास्तुकला का ज्ञान मिला और वे इसके आचार्य बने।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा ने कई महत्वपूर्ण चीजों का निर्माण किया था। इनमें भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र, पांडवों की इंद्रप्रस्थ नगरी, भगवान श्रीकृष्ण की द्वारिका नगरी, इंद्र का वज्र और सोने की लंका शामिल हैं।
सुबह से ही बाजार में राजेश विश्वकर्मा, प्रकाश विश्वकर्मा सहित अन्य दुकानदारों ने अपनी दुकानों को रंग-बिरंगे फूलों और मालाओं से सजाया और आचार्य के द्वारा पूजा-अर्चना कराई गई और अपने – अपने प्रतिष्ठानो पर देर शाम तक प्रसाद बांटा जाता रहा।
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