संगोष्ठी तथा सांस्कृतिक संध्या हरीतिमा कार्यक्रम का हुआ आयोजन

संगीत एवं पर्यावरण के अंतरसम्बन्धीय आयाम विषयक संगोष्ठी तथा सांस्कृतिक संध्या हरीतिमा कर्यक्रम का आयोजन !

वाराणसी। भारत अध्ययन केंद्र बी एच यू के सभागार मे ग्रीन इको मूवमेंट सोसायटी एवं भाव प्रभा पद्म संस्थान तथा भारत अध्ययन केंद्र केल संयुक्त तत्त्वाधान मे संगीत एवं पर्यावरण के अंतरसम्बन्धीय आयाम विषयक संगोष्ठी तथा सांस्कृतिक संध्या हरीतिमा कर्यक्रम का आयोजन सम्पन्न हुआ। विशेष सहयोग रहा अनुनाद इंडिया फाउंडेशन का। कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि विश्वभूषण मिश्र मुख्य कार्यकारी अधिकारी काशी विश्वनाथ मंदिर एवं अन्य अतिथियो के करकमलो द्वारा

दीप प्रज्ज्वलन कर हुआ।। विशिष्ट अतिथि रहे प्रो शरदिंदु तिवारी समन्वयक भारत अध्ययन केंद्र एवं मुख्य वक्ता के रूप मे सहभागिता रही प्रो के एन मूर्ति अध्यक्ष काय चिकित्सा विभाग चिकित्सा विज्ञान संस्थान बी एच यू की तथा आशीर्वाचन रहा पद्मश्री डॉ राजेश्वर आचार्य का।अध्यक्षता की डॉ गीता सिंह ने। इस अवसर पर साहित्य के क्षेत्र मे विशिष्ट योगदान हेतु तीनो संस्थाओ द्वारा संयुक्त रूप से हरीतिमा सम्मान डॉ रत्नेश वर्मा संस्थापक सुबह ए बनारस एवं साहित्य के क्षेत्र मे प्रो सदाशिव द्विवेदी संस्कृत विभाग बी एच यू के अध्यक्ष को मुख्य अतिथि के करकमलो से प्रदान किया गया।। मुख्य अतिथि श्री विश्व भूषण मिश्र ने कहा वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर सर जगदीश चंद्र बसु ने वनस्पतियों के साथ साथ धात्विक एवं पाषाण मे भी चेतन प्राण का शिवत्व संचार की व्यख्या करते हुए कंकर कंकर मे भी शंकर की उक्ति को प्रमाण प्राण दिया। पद्मश्री डॉ राजेश्वर आचार्य ने आशीर्वाचन प्रदान करते हुए हरितिमा की कामना करते हुए पूरे विश्व को हरा भरा रहने की कामना व्यक्त की। धन्यवाद ज्ञापित करते हुए ग्रीन इको मूवमेंट सोसायटी की अध्यक्षा डॉ रमेश कुमार भाटिया ने पर्यावरण संरक्षण के सत्कार्य मे लगे रहने का संकल्प व्यक्त किया संचालन किया डॉ प्रीतेश आचार्य ने। साथ ही सांस्कृतिक संध्या मे अनुनाद स्कूल के छात्र पांच वर्षीय बाल कलाकार प्परिक्षित त्रिपाठी ने तबला वादन कर सबका मन मोह लिया। इसी क्रम मे डॉ शिवानी शुक्ला ने कबीर के भजन देख तमाशा लकड़ी का सुमुधुर गायन से पर्यावरण एवं संगीत के अंतर सम्बन्ध को अनुप्राणित किया। तबला संगति रही अंकित सिंह की एवं संवादिनी पर साथ दिया श्री हर्षित उपाध्याय ने।

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