बिहिप सेवा योजना गिरिवासी बनवासी सेवा प्रकल्प द्वारा श्री रामकथा का आयोजन

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डाला /सोनभद्र(गिरीश तिवारी)बिहिप सेवा योजना गिरिवासी बनवासी सेवा प्रकल्प द्वारा चल रहे स्थानीय नई बस्ती संगीतमय श्री राम कथा में कथा वाचक दिलिप कृष्ण भारद्वाज ने दुसरे दिन आदि अनादि महादेव का विस्तार पूर्वक वर्णन कर मनुष्य के जीवन के महत्व बताया |

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कार्यक्रम के मुख्यअतिथि भाजापा प्रदेश कार्य समिति सदस्य मनोज श्रीवास्तव रहे|प्राप्त जानकारी के अनुसार कथा वाचक दिलिप कृष्ण भारद्वाज ने बताया की शिव विवाह एक ऐसा विवाह है जिस विवाह का वर्णन अनादिकाल से आज तक किया जा रहा है प्रभु की लीला को बाहरी दृष्टिकोण के माध्यम से नहीं जाना जा सकता। क्योंकि प्रभु का जन्म और कर्म दोनों ही अलौकिक और दिव्य है।कथा वाचक शिव विवाह प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिव और पार्वती का मिलन सास्वत मिलन है और आत्मा और परमात्मा के सुमेल की कथा का नाम शिव-विवाह है। जब भगवान से किसी ने पूछा कि आप बैल पर चढ़कर क्यों जा रहे हैं लोग घोड़े से सवार होकर जाते हैं तब भगवान शिव ने कहा की घोड़ा कामवासना का प्रतीक है जबकि बैल धर्म का प्रतीक है मैं धर्मपत्नी लेने जा रहा हूं मैं विवाह वासना के लिए नहीं बल्कि उपासना के लिए कर रहा हूँ।

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भगवान शिव जब पार्वती से विवाह करने जा रहे है तो उनका स्वरूप भी अलग था। उन्होंने अपने गले में सर्प की माला, शरीर पर भस्म का लेप, हाथ में डमरू और त्रिशुल पकड़े थे इन सभी चिन्हों के पीछे अध्यात्मिकता छिपी है। संसार में आज विवाह के समय दूल्हा सोने एवं चांदी के आभूषण को धारण किए रहता है। जिसका तात्पर्य है कि सोने-चांदी धारण करने के बाद एक दिन ऐसा आता है कि यह आभूषण सर्प की भांति डसता है।शिव की संस्कृति महान है जिसके कारण उनका स्वरूप अपने भीतर कई रहस्य लिए हुए है, शिव प्रसंग पर शिव के दिव्य चरित्र पर व्याख्यान देते हुए कहा कि प्रभु की प्राप्ति के बाद मन में संशय नहीं रहता। प्रभु की प्राप्ति मानव जीवन का परम लक्ष्य होना चाहिए शिव-राम और कृष्ण आदि किसी में कोई भेद नहीं। जो भक्त किसी की भी पूजा करता है उसे सभी देवताओं का फल मिलता है। शिव के गुण अगर इंसान में आए तो वो महान हो जाता है। भगवान शिव ने जगत कल्याण के लिए विष का पान किया।कथा का संचालन बिहिप जिलाउपाध्यक्ष विशाल गुप्ता ने कीया | इस दौरान विश्व हिंदू परिषद के विभाग मंत्री नरसिंह त्रिपाठी,कोटा जिला पंचायत सदस्य सुभाष पाल, हिमाशुं, विद्याशंकर पाण्डेय, सत्यप्रकाश तिवारी,नीरज सिंह,तेजवंत पाण्डेय,नीरज द्विवेदी, मुकेश जैन,सुखसागर उपाध्याय,रमेश जैन ,विकाश जैन,प्रसांत पाल, गंगासागर, अवनिश पाण्डेय, रजत कुमार, मौजूद रहे।

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