जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक उपेक्षा के शिकार होते देश के नौनिहाल

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गुरमा/सोनभद्र(मोहन गुप्ता)गुरमा का कसहवा घाट  जनप्रतिनिधियों के केवल कोरे वादों से अपने अस्तित्व के साथ-साथ बच्चों को भी नदी की धारा में बहाने को तैयार है। बार-बार केवल आश्वासन और सरकारी उपेक्षा के कारण यह रास्ता कभी भी जनहानि करा सकता है और पहले भी कई दुर्घटनाएँ इस पुल की जर्जरता के कारण घट चुकी हैं। लगभग 50 वर्ष पूर्व इस लगाई गई लोहे की जालियाँ पूरी तरह गायब हो चुकी हैं और पत्थर के पिलर भी जगह-जगह से टूट गए हैं। प्रतिदिन 600 से भी अधिक स्कूली बच्चे और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग तथा जिला जेल में ड्यूटी करने वाले सिपाही भी इस निकटतम रास्ते से गुजरते हैं।

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  स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जिलाधिकारी महोदय को अविलंब इस गम्भीर समस्या का समाधान करने की सार्थक पहल करनी चाहिए अन्यथा किसी भी दिन गम्भीर दुर्घटना हो सकती है।

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