अकाल का सारस उड़ गया

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*रामजियावन गुप्ता*

बीजपुर (सोनभद्र) आधुनिक हिंदी कविता के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह के निधन से साहित्य साधकों और साहित्य अनुरागियों में शोक की लहर दौड़ गई । रिहंद साहित्य मंच की ओर से आयोजित शोक सभा में दिवंगत कवि को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए संस्था के संरक्षक एवं प्रख्यात साहित्यकार डॉ0 दिनेश ‘दिनकर’ ने कहा कि सहज संवेदना के अकाल का सारस अपनी ज़मीन छोड़कर उड़ गया – रह गई उसके किलोल और कल्पना लोक की स्मृतियाँ । मन बार-बार पूछ रहा है कि अब करुणा की शृष्टि पर पहरा कौन देगा । जीवन के विविध बिंबों के प्रणेता तुम्हारी कृतियाँ युगों तक लोक जीवन के सपनों और आकांक्षाओं की अनमोल पूँजी बनी रहेगी ।
महासचिव मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि कवि, लेखक, आलोचक और संपादक के रूप में साहित्य जगत में प्रतिष्ठित ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता केदारनाथ सिंह का निधन वर्तमान समय की अपूर्णिया क्षति है । सांस्कृतिक सचिव मुकेश कुमार ने कहा कि मानवीय मूल्यों के पक्षधर कवि केदारनाथ सिंह की कृतियाँ उन्हें अमर रखेंगी । वरिष्ठ सदस्य डी एस त्रिपाठी ने कहा कि केदारनाथ जी अपने कृतियों के कारण हम सभी के दिलों में जीवंत रहेंगे । इस अवसर पर नरसिंह यादव काफी भावुक हो उठे एवं केदारनाथ जी पर एक कविता प्रस्तुत की । अन्य सदस्यों ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए ।

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