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ठंड में निर्बल व असहाय आदिवासियों को कम्बल वितरण कर सदर विधायक ने किया सहभोज

सोनभद्र(चंद्रकांत मिश्रा/संतोष सोनी)हाड़ कपाती ठंड में निर्बल व असहाय को कम्बल देना सबसे बड़ा पुनीत कार्य है तो वही उस गरीब जनता के बीच बैठकर कोई जनप्रतिनिधि भोजन कर ले तो उसके लिए इससे बड़ी  बात क्या हो सकती है।
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ऐसा पुनीत कार्य कर दिखाया है सोनभद्र के सदर विधायक भूपेश चौबे ने जो आज नगवां ब्लाक के अति नक्सल क्षेत्र के सोमा गांव में आदिवासियों के साथ जमीन पर बैठकर भोजन किया और निर्बल लोगो को कम्बल देकर इस कड़ाके की ठंड में उन्हें कुछ राहत पहुचाने का कार्य किया।

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बताते चले कि आज सदर विधायक ने असहाय गरीबों में 500 सौ कम्बल वितरण किये। इस अवसर पर विधायक ने धरती माता के पूजा स्थल पर हाल व चबूतरा बनवाने की घोषणा की । सोमा गांव के पास अड़गुड़ घाट का निर्माण कराकर चननी सम्पर्क मार्ग को भी शीघ्र बनवाने का भी आश्वासन दिया।

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पेयजल जल संरक्षण प्रधानमंत्री आवास योजना समेत सभी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए उन्होंने क्षेत्र के ग्राम प्रधानों से पात्रों की सूची बनाने को कहा।इस मौके पर उन्होंने केवटम गांव के दिब्याङ्ग शिवदास के बच्चो की पढाई का सम्पूर्ण खर्च उठाने की घोषणा करते हुए उन सभी दिब्याङ्गो के बच्चों की पढाई का खर्च उठाने की घोषणा की जो अपने परिवार के मुखिया होंगे।

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इस मौके पर आयोजित कार्यक्रम में सदर विधायक ने कहा कि इस क्षेत्र के विकास के लिए भाजपा संकल्पित है।
सोमा की धरती के नाम से विख्यात आदिवासियों की यह कुल देवी सोनभद्र के हर ओझाओं व तांत्रिको के बीच काफी प्रसिद्ध हैं। सोनभद्र के साथ सीमावर्ती राज्यों बिहार झारखण्ड छत्तीसगढ़ से भी आदिवासी वर्ष भर यहां पूजा पाठ के लिए आते रहते है। जहाँ कभी  नक्सलियों का प्रशिक्षण शिविर संचालित होता था  उसी नगवां विकास खंड के सोमा गांव में शनिवार से ही नये वर्ष की पूर्व संध्या पर होने वाली पूजा में शामिल होने के लिए आदिवासी पुरुष महिलाओं का आना शुरू हो गया था।सोमा गाँव कैमूर पहाड़ी के शिखर पर स्थित है ।
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यह इलाका आज भी अड़गुड़ घाट यानि जो दुरूह हो उस नाम से प्रसिद्ध है।इस गाँव के पूर्वी छोर पर खड़ा होने पर सोन नदी के दक्षिण व पूरब में स्थित बिहार व झारखण्ड के कई गांव दिखाई देते हैं।इसके चारों तरफ घने जंगल व पहाड़ ।नीचे ऐसी घाटी की वहां जंगलों के बीच रहने वाले ही पहुचं सकें।इसी का लाभ उठाकर पूर्व में यहां पीपुल्स वार ग्रुप व एम सी सी के हथियार बन्द दस्तों का यहां प्रशिक्षण शिविर संचालित होने लगा।आने जाने का कोई रास्ता नहीं था। सुबह जब कोई जिला मुख्यालय से चले तो पहुचते पहुचते दिन बीत जाता था। शासन स्तर पर जब सक्रियता बढ़ी तो सड़के बननी शुरू हुईं। यहां मुखबिरी के शक में माओवादियों ने एक युवक की हत्या मुखबिर होने के शक में कर दी । एक लाख के इनामी रामबृक्ष कोल ने इस गांव को अपनी पनाह गाह बना लिया और इसी गांव की एक महिला को अपनी रखैल बना लिया । बाद में वह टीम के साथ चलने लगी और पुलिस के हत्थे चढ़ गई। जेल में ही बच्चे को जन्म दी।

        यहाँ के दर्जन भर युवक जेल गए। इस गांव में सबसे अधिक आबादी उराँव जति की है।सोमा के आस पास खेती लायक जमीन काफी कम है। जंगल ही इनका जीवन है ।लेकिन वन विभाग की तानाशाही पूर्ण रवैये से इनका जीवन संकट में है।
     कार्यक्रम में उमड़ी भीड़ इस बात की गवाही दे रही थी की उनका जीवन कितना अभावों में है। इस मौके पर बिंदु जायसवालआलोक सिंह , राजकुमार गौड़ , बुद्धिनारायन भूपेंद्र सिंह कमलेश चौबे, संतोष शुक्ला, सुनील सिंह, राजकुमार तिवारी रवि प्रकाश चौबे , कमलेश रजनीश रघुवंशी नंदलाल विश्कर्मा गोपाल जायसवाल दादे चौबे समेत तमाम लोग मौजूद रहे।

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